" /> जमीन निगल गया नालासोपारा का नाला

जमीन निगल गया नालासोपारा का नाला

नालासोपारा में एक हजार लोग प्रतिदिन डर-डर के अपनी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। बारिश की हर एक बूंद और ट्रेनों की तेज रफ्तार से जर्जर इमारत के रहिवासियों की जान सांसत में फंसी हुई है। नालासोपारा इलाके के ओसवाल नगरी बाबा संकुल इलाके में स्थित `सार्इं पूजा’ और `सार्इं तीर्थ’ नामक दो इमारतें हैं। इन इमारतों में लगभग २०० घर हैं, जिनमें तकरीबन ८०० से एक हजार लोग रहते हैं। वर्ष २०१९ में भारी बारिश ने जमकर तबाही मचाई थी, जिसे देखते हुए वसई-विरार मनपा ने २०१९ के सितंबर माह में इमारत के किनारे बनाए गए नाले की सफाई की। ठेकेदार ने नाला सफाई के दौरान कचरे के साथ ही इमारत के नीचे की जमीन की भी सफाई कर दी गई, जिससे इमारत जर्जर हो गई।
जुलाई माह में एक बार फिर नाला सफाई का कार्य किया गया, जिससे जर्जर हुई इमारत की ७० फीट की दीवार गिर गई। इमारत के करीब ही पश्चिम रेलवे की पटरियां हैं। इन पटरियों पर लोकल ट्रेनों समेत राजधानी दिल्ली, गुजरात, मुंबई की तरफ आने-जानेवाली तेज रफ्तार की एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें जब धड़धड़ाते हुए गुजरती हैं तो इमारत हिलने लगती है, वहीं तेज बारिश ने भी लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
इमारत के निवासियों का कहना है कि रात-दिन चलनेवाली लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ ही भारी बारिश की वजह से इमारत के नीचे की मिट्टी बहने लगती है। इन सबके चलते इमारत और जर्जर हो गई है। इमारत में रहनेवाले तकरीबन एक हजार लोग डर के साए में अपना जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं।

हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं। इमारत जर्जर होने के कारण हमें घर खाली करना पड़ रहा है। एक तरफ कोरोना की मार से अभी हम उबर भी नहीं पाए हैं। ठेकेदार की लापरवाही से इमारत में रहना मुश्किल हो गया है।
-संदीप दुबे, रहिवासी

मैं पिछले १० वर्ष से इस इमारत में रहता हूं। मनपा का करदाता हूं। नाला सफाई के ठेकेदार की लापरवाही से ८०० से एक हजार लोग प्रतिदिन डर के साए में रात-दिन अपना जीवन जीने को मजबूर हैं। नाला सफाई और तेज गति की ट्रेनों के चलते इमारत के नीचे की जमीन खिसकने लगी है, जिसके कारण इमारत जर्जर हो गई है। मनपा में शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इस तरह किसी की भी जान जोखिम में डालने का क्या मतलब है?
-राकेश केवट, रहिवासी

अभियंता को जांच के लिए भेजा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
-नागेश राठौड़, सहायक आयुक्त