नीलम गोर्हे चुनी गइं उपसभापति, ५४ साल बाद दूसरी महिला

शिवसेना विधायक नीलम गोर्‍हे को कल विधान परिषद के उपसभापति पद पर निर्विरोध चुना गया। विधानसभा के कामकाज के दौरान सभापति रामराजे निंबालकर ने उपसभापति पद के चुनाव की घोषणा की। विरोधी दल की ओर से कांग्रेस विधायक दल के नेता शरद रणपिसे ने जोगेद्र कवाडे का नाम सुझाया था। राज्य के परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने उपसभापति पद के लिए शिवसेना की विधायक नीलम गोर्‍हे के नाम का प्रस्ताव रखा था। जिसका अनुमोदन पशुसंवर्धन मंत्री महादेव जानकर ने किया। सभापति ने चुनाव की प्रक्रिया की शुरुआत की। इसी दरम्यान विधान परिषद में कांग्रेस विधायक दल नेता शरद रणपिसे ने जोगेंद्र कवाडे का नाम वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद सभी दल के सदस्यों ने नीलम गोर्‍हे के नाम पर सर्वसम्मति से सहमति जताई। इसके बाद सभापति रामराजे निंबालकर ने गोर्‍हे के निर्विरोध उपसभापति चुने जाने की घोषणा की। बता दें कि १९ अगस्त १९५५ से २४ अगस्त १९६२ तक श्रीमती जे पी सीपाहिमलानी उपसभापति पद पर चुनी गई थीं। इसके बाद नीलम गोर्‍हे सर्वसम्मति से निर्विरोध उपसभापति पद पर चुनी गई हैं। नीलम गोर्‍हे को उपसभापति पद पर चुने जाने के बाद अभिनंदन प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नीलम गोर्‍हे ने सामाजिक और समाज से जुड़े प्रश्नों को लेकर हमेशा कार्य किया। गरीबों और पिछड़ों की लड़ाई हमेशा लड़ती रहीं।
सदन के अहम मुद्दों सहित हर मुद्दे पर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि उपसभापति की परंपरा को कायम रखते हुए राज्य व देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हुए और आगे बढ़ेंगी। विधान परिषद में विरोधी दल नेता धनंजय मुंडे, कांग्रेस विधायक दल नेता शरद रणपिसे सहित कई सदस्यों ने नीलम गोर्‍हे का अभिनंदन करते हुए अपने-अपने विचार व्यक्त किए।