" /> ओली की शोध,  अरे, उन्होंने बाबर को भी ‘टोपी’ पहना दी!

ओली की शोध,  अरे, उन्होंने बाबर को भी ‘टोपी’ पहना दी!

नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली चीन के हाथ की कठपुतली हैं। चीन के इशारे पर ही ओली महाशय प्रतिदिन हिंदुस्थान विरोधी बातें करते रहते हैं। पहले ओली ने नक्शा विवाद शुरू किया और अब उन्होंने सीधे प्रभु श्रीराम को ही नेपाल-हिंदुस्थान के झगड़े में खींच लिया है। ओली ने घोषित किया है कि हिंदुस्थान ने नेपाल पर सांस्कृतिक अतिक्रमण किया है। हिंदुस्थान की अयोध्या नकली है। असली अयोध्या नेपाल में है। प्रभु श्रीराम हिंदुस्थानी नहीं थे, बल्कि नेपाली थे। ओली की ये बातें हास्यास्पद हैं। गत कुछ दिनों से श्रीमान ओली हिंदुस्थान के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और उनसे यह सब बुलवाने वाले चीन के लाल बंदर हैं। इसी के कारण उनकी वानरों वाली ये हरकत बढ़ी हैं। हिंदुस्थान विरोधी नीति के कारण ओली के खिलाफ पार्टी और संसद में बगावत हो गई। उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गई। तब नेपाल के चीनी राजदूत ओली की कुर्सी बचाने के लिए दौड़-भाग करते दिख रहे थे। मतलब ओली चीन के गुलाम बन चुके हैं और पूरे नेपाल तथा वहां की हिंदू संस्कृति को वे चीन की परंपरा में ढालने का मन बना चुके हैं। यदि आज प्रभु श्रीराम नेपाल में होते तो जैसे उन्होंने रावण का वध करके पापों को नष्ट किया, वैसा ही वे हिंदूद्रोही ओली के साथ भी करते। ओली ने रामायण काल को लेकर जो स्वयंभू खोदकार्य किया है, उस गड्ढे में वे खुद ही गिरेंगे और नेपाल की जनता उस पर मिट्टी डालेगी। हिंदुस्थान की अयोध्या एक दंतकथा है और प्रभु श्रीराम नेपाल के हैं, उन्हें ऐसा दावा करने में इतना समय क्यों लगा? लगभग ७० -७५ सालों से अयोध्या में राम जन्मभूमि की लड़ाई शुरू है और इस लड़ाई में सैकड़ों कारसेवकों तथा साधु-संतों ने अपना बलिदान दिया है। ओली अगर समय पर आगे आ जाते तो यह रक्तपात और हिंसा रुक सकती थी। ओली इतिहास और पुराणकाल के इतने महान भाष्यकार हैं, यह पता होता तो हमारी सर्वोच्च न्यायालय के मुकदमे में ओली को गवाह के रूप में बुलाया जा सकता था। सच कहें तो बाबर से भी इस मामले में बड़ी चूक हो गई। बाबर को उसके साथियों ने गलत रास्ता और नक्शा दिखा दिया। बाबर को हिंदुओं के प्राणप्रिय श्रीराम मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनानी थी इसलिए उसने अयोध्या की ओर कूच किया था। अब ओली ने बाबर को भी मूर्ख साबित कर दिया है। अयोध्या नेपाल में थी और ओली के पूर्वजों ने बाबर को चकमा देकर हिंदुस्थान की ओर मोड़ दिया। ओली ने बाबर को भी टोपी पहना दी। ये एक तरह से इस्लाम का अपमान है और ओली का जूनियर बाप पाकिस्तान इस बात के लिए ओली को इस्लामी कानून के अनुसार सजा देगा क्या? हकीकत यह है कि प्रभु श्रीराम की धर्मपत्नी सीता मैया का मायका नेपाल स्थित जनकपुर है। जनकपुर नेपाल में एक तीर्थस्थान है। इसी को प्राचीन मिथिला नगरी कहते हैं। राजा जनक तत्वज्ञानी और परम् तपस्वी थे। उनकी पुत्री सीता जब विवाह योग्य हुर्इं तब राजा जनक ने सीता का स्वयंवर आयोजित किया। इस स्वयंवर की ‘शर्त’ यह थी कि वहां अत्यंत वजनदार शिव धनुष और दो बाण रखे गए थे। कहा गया था कि जो कोई इस शिव धनुष को उठाकर, प्रत्यंचा चढ़ाकर इस धनुष पर बाण का संधान करेगा, सीता उसी की पत्नी बनेंगी। रावण से लेकर बड़े-बड़े राजा धनुष से बाण संधान नहीं कर पाए। प्रभु श्रीराम ने इस स्वयंवर ‘शर्त’ को जीत लिया। राजा जनक ने सीता का विवाह प्रभु श्रीराम से करने की घोषणा की। तब ऋषि विश्वामित्र ने राजा जनक से कहा, ‘आप शीघ्रातिशीघ्र अपने दूतों को अयोध्या भेजें। राजा दशरथ और उनके परिवार को यह आनंददायी समाचार दें तथा राम और सीता के विवाह का निमंत्रण भी भेजें।’ राजा दशरथ अयोध्या से मिथिला नगरी पहुंचे और प्रभु श्रीराम व सीता का विवाह संपन्न हुआ। उसके पश्चात जनकपुर की राजकुमारी अयोध्या नगरी की रानी बनकर आर्इं। नेपाल और हिंदुस्थान के इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। ओली का रिश्ता चीनी ड्रैगन और बाबर से होने के कारण वे इस बात को भूल चुके हैं। अयोध्या में सरयू नदी बह रही है। इसका पुराणों में भी वर्णन है। नेपाल में कहीं सरयू नदी नहीं बहती। यही सरयू नदी राम मंदिर की लड़ाई में कारसेवकों के रक्त से लाल हो गई थी। लेकिन चीन के लाल बंदरों के गुलाम ओली महाशय को उससे क्या? आज उन्होंने अयोध्या और प्रभु श्रीराम के नेपाली होने का दावा किया। भविष्य में वे यह भी कह सकते हैं कि बाबर भी नेपाली था। प्रभु श्रीराम पूरे विश्व के थे लेकिन श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या केवल हिंदुस्थान की। इस पर किसी भी प्रकार के विवाद की आवश्यकता नहीं है।