" /> ड्रैगन का एक और दावा निकला फर्जी अब पुल बनाने की खुली पोल!

ड्रैगन का एक और दावा निकला फर्जी अब पुल बनाने की खुली पोल!

फर्जीवाड़ा में चीन वाकई दुनिया की महाशक्ति है। रोज एक दावा करता है। वह झूठा निकलता है तो बजाय उस पर शर्मिंदा होने के अगले दिन एक और फर्जीवाड़े के साथ सामने आ जाता है। अब उसने ४० मिनट में पुल बनाने का फर्जी दावा किया है पर इसकी भी पोल खुल गई।

पूर्वी लद्दाख में गतिरोध के बीच चीन अपनी प्रोपगेंडा मशीनरी को एक्टिव किए हुए है। सैटेलाइट तस्वीरों से चीनी सेना के ४० मिनट में पुल बिछाने के दावे की पोल खुल गई है। चीनी सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ओर से भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स की प्रतिक्रिया में वीडियो और क्लिप्स जारी किए जा रहे हैं। ये कुछ नहीं बल्कि माइंडस्पेस को भरने के लिए महज प्रोपगेंडा कवायद है। जब भारतीय मीडिया ने भारतीय सेना के इंजीनियरों की ओर से बनाए गए बेली ब्रिज की खबर को बताया तो लाल सेना की प्रोपगेंडा मशीनरी ७२ घंटे के अंदर ही अपने इंजीनियरों की ओर से ४० मिनट में १८० मीटर लंबे पुल बिछाने की कहानी के साथ सामने आ गई।

चीनी प्रोपगेंडा मशीनरी ने एक तीर से दो निशाने लगाने की कोशिश की। एक तो चीन के लोगों को भरोसा दिया जाए कि चीन का हाथ ऊपर है, दूसरा भारतीय लोगों को भ्रमित किया जाए। बहरहाल, जब सैटेलाइट इमेज में देखा गया तो चीनी सेना के दावे झूठे निकले। कल ही चीनी सेना का फाइटर्स वाले वीडियो क्लिप की कलई खुली थी। वो हॉलीवुड की फ़िल्म टॉपगन से चोरी की गई क्लिप थी।

जहां तक इस पुल बिछाने वाली यूनिट का सवाल है तो छानबीन में साफ तौर पर पता चला कि चीनी सेना की ८५वीं इंजीनियरिंग ब्रिगेड की १५ इंजीनियरिंग रेजिमेंट है। ये ब्रिगेड तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के तहत आती है। पिछले तीन महीनों की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि यह यूनिट ल्हासा के पास ब्रह्मपुत्र नदी के साथ अपने निर्धारित ट्रेनिंग एरिया में है। ये ल्हासा-शिगात्से सड़क के साथ है। ये यूनिट वहां कम से कम १९ अप्रैल, २०२० से आज तक मौजूद है।