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ड्रैगन को लगा मुंबई का झटका!, मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे से आउट

गुस्ताख ड्रैगन की अब खैर नहीं है। एक के बाद एक प्रोजेक्ट से उसका बिस्तर गुल होता जा रहा है। ताजा झटका मुंबई ने दिया है। मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे से दो चीनी कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन दोनों कंपनियों का हाईवे का ठेका वैंâसिल कर दिया गया है।
सीमा पर तनाव कम हो जाने के बाद भी सरकार का रुख चीन के प्रति सख्त बना हुआ है। अब मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से दो चीनी कंपनियों की बोली रद्द कर दी गई है। यह ठेका करीब ८०० करोड़ रुपए का है।
इन कं​पनियों को अधिकारियों ने लेटर ऑफ अवॉर्ड देने से इंकार कर दिया है और अब यह ठेका दूसरे सबसे कम रेट पर बिड करनेवाली कंपनी को दिया जाएगा। यह ठेका इस एक्सप्रेसवे के दो खंड के लिए था। दोनों कंपनियां चीन जिगांक्सी कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन की सब्सिडरी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग एवं सड़क परिवहन मंत्रालय ने करीब ८०० करोड़ रुपए के इन ठेकों को रद्द कर दिया है। दोनों कंपनियां बिड करने में सफल हुई थीं, इसके बावजूद उन्हें लेटर ऑफ अवॉर्ड नहीं दिया गया। यह ठेका अब दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को दिया जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि चीनी कंपनियों को राजमार्ग परियोजनाओं से बाहर कर दिया जाएगा। चीनी कंपनियों को संयुक्त उद्यम पार्टनर के रूप में भी काम नहीं करने दिया जाएगा। इसके पहले भारतीय रेलवे ने एक चीनी कंपनी को दिया गया ४७१ करोड़ रुपए के सिगनलिंग का ठेका रद्द कर दिया था। यह ठेका पहले बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट एंड टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क को दिया गया था। यह कंपनी कानपुर से दीनदयाल उपाध्याय नगर खंड के बीच ४१७ किमी लंबे खंड पर काम कर रही थी। कंपनी ने करीब २० फीसदी काम कर भी लिया था।
चीन को भगाना है
पिछले महीने भारत-चीन नियंत्रण रेखा पर हुई एक हिंसक झड़प में हमारे देश के २० वीर सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। पूरे देश में चीन के खिलाफ माहौल है और हर नागरिक के मन में है कि किसी भी तरह देश से चीन को भगाना है। चीन का आर्थिक झटका देने की कोशिश के तहत ही देश में चीनी माल के बहिष्कार का अ​भियान चल पड़ा और सरकार भी लगातार चीनी आयात पर अंकुश और चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों से बाहर करने के प्रयासों से चीन को झटका देने में लगी है।