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आउट ऑफ पैवेलियन….पोल पर खोल

हिंदुस्थानी टीम की पोल पर खोल डालने की कवायद है। दरअसल टीम में एक बड़ी समस्या है, जिसे ढंकने के लिए टीम प्रबंधन जुटी हुई है किंतु जब कोई पोल होती है तो वह खुल ही जाती है। यूं तो टेस्ट मैच शुरू होने जा रहा है और टीम के खिलाड़ियों को भी तय कर लिया गया है, मगर केएल राहुल का विकल्प खोज पाना कठिन है। अंजिक्य रहाणे की कप्तानी में हिंदुस्थानी टीम पहला टेस्ट खेलेगी। इसमें सीनियर बल्लेबाज केएल राहुल चोट के कारण सीरीज से बाहर हो गए हैं, उनकी जगह सूर्यकुमार यादव को शामिल किया गया है। कई सीनियर खिलाड़ियों को पहले ही सीरीज से आराम दिया गया है। ऐसे में अब मैनेजमेंट की चिंता बढ़ गई है। बल्लेबाजी की बात करें तो टीम में शामिल सिर्फ अंजिक्य रहाणे के अलावा बतौर बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा और मयंक अग्रवाल के ही पास १० से अधिक टेस्ट का अनुभव है। इसमें भी ऑस्ट्रेलियाई सीरीज में मयंक को खेलने का मौका नहीं मिला था, वहीं रहाणे की बात करें तो अंतिम १५ टेस्ट में उनका औसत २५ से कम है। इसके अलावा अंतिम २२ टेस्ट में सिर्फ २९ की औसत से रन बना सके हैं। इस दौरान वे एक भी शतक नहीं लगा सके हैं। ऐसे में कोच राहुल द्रविड़ के लिए इन चुनौतियों से निपटना आसान नहीं होगा।

पिच बने हैं पहेली

ये पहेली है जिसे सुलझा नहीं सका है न्यूजीलैंड। जी हां, हिंदुस्थानी पिच कीवियों के लिए हमेशा से अबूझ रहे हैं। इसका सबूत है कि न्यूजीलैंड की टीम हिंदुस्थान में १९८८ के बाद से टेस्ट मैच नहीं जीत सकी है। इस दौरान उसने १७ टेस्ट खेले। ९ में उसे हार मिली, जबकि ८ मुकाबले ड्रॉ रहे। न्यूजीलैंड की टीम कभी भी यहां टेस्ट सीरीज नहीं जीत सकी है। ३४ में से सिर्फ २ टेस्ट जीते हैं। अंतिम सातों टेस्ट में उसे हार मिली। २ टेस्ट टीम ने पारी से गंवाए हैं। न्यूजीलैंड ने हिंदुस्थान में पहला टेस्ट १९५५ में खेला था, यानी उसे ६६ साल से यहां टेस्ट सीरीज में जीत नहीं मिली है। मौजूदा सीरीज भी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा है। ऐसे में कोई भी टीम इसे हल्के में नहीं लेगी। हालांकि विराट कोहली और रोहित शर्मा सहित कई खिलाड़ी पहले टेस्ट में नहीं खेल रहे हैं और अंजिक्य रहाणे के नेतृत्व में ये टीम लगभग नई टीम है। केन विलियम्सन के दृष्टिकोण से कहा जा रहा है कि उनके लिए इस बार जीतने का मौका है। एक तो टेस्ट चैंपियन कप्तान हैं, दूसरे वो अपनी टीम के साथ बिल्कुल प्रâेश होकर उतर रहे हैं। लिहाजा वो इतिहास बनाने की मंशा रखते हैं।

मीट पर मचमच

ये मचमच मीट पर है वो भी हलाल मीट पर। दरअसल हिंदुस्थान की टीम के मेन्यू में हलाल मीट शामिल करने की सिफारिश हुई तो मचमच शुरू हो गई। ये विवादों में आ गया। फिलहाल इसे शामिल नहीं किया गया है, ऐसी खबर है। पर मीट ने हल्ला तो मचा ही दिया। हिंदुस्थानी क्रिकेटरों के लिए जो व्यंजन सूची (मेन्यू) तैयार की गई है, इसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि पोक (सूअर का मांस) और बीफ किसी भी रूप में भोजन का हिस्सा नहीं होने चाहिए। माना जा रहा है कि भोजन की यह सूची खिलाड़ियों के पोषण को ध्यान में रखते हुए सहयोगी स्टॉफ और चिकित्सा दल ने तैयार की है। अब जबकि ऐसा है तो इसकी सिफारिश ने हल्ला मचा दिया। फिलहाल व्यंजन सामग्री में दो तरह के मांस का जिक्र किया गया है। चिकन (मुर्गे का मांस) और भेड़ का मांस। सूचीबद्ध मांसाहारी भोजन में भुना हुआ चिकन, भेड़ का भुना हुआ मांस, काली मिर्च सॉस के साथ भेड़ के मांस के चॉप, मुर्ग यखनी, चिकन थाई करी, मसालेदार ग्रील्ड चिकन, गोवा मछली करी, टंगड़ी कबाब और लहसुन की चटनी के साथ तला हुआ चिकन शामिल हैं।

भज्जी के करीब अश्विन

भज्जी बोले तो हरभजन सिंह। टर्मिनेटर। टेस्ट विकेट में नंबर तीन हिंदुस्थानी गेंदबाज। अब उनके रिकॉर्ड के करीब खड़े हैं आर अश्विन। भज्जी की झोली में ४१७ विकेट दर्ज हैं और ४१३ पर अश्विन खड़े हैं, यानी चार विकेट दूर हैं अश्विन और इसके बाद वे अनिल कुंबले और कपिल देव के बाद तीसरे हिंदुस्थानी गेंदबाज बन जाएंगे, जिसने सबसे ज्यादा विकेट लिए हैं। क्या ऐसा होगा? अश्विन ने अब तक ७९ मैचों में ४१३ विकेट लिए हैं। अनिल कुंबले (६१९) और कपिल देव (४३४) हिंदुस्थानी टीम के लिए सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेनेवाले गेंदबाजों में शीर्ष दो स्थानों पर काबिज हैं। अश्विन इससे पहले भी टेस्ट मैचों में नई गेंद साझा कर चुके हैं। उन्होंने ३३ टेस्ट मैचों की ३९ पारियों में नई गेंद साझा की है। इनमें से १५ अवसरों पर उन्होंने पारी का पहला ओवर किया। इस साल के शुरू में इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट की दोनों पारियों में अश्विन ने नई गेंद साझा की थी, जबकि अमदाबाद में दूसरी पारी में अक्षर पटेल के साथ गेंदबाजी की शुरुआत की थी। अब दिलचस्प होगा देखना कि अश्विन कब इस रिकॉर्ड तक पहुंचते हैं?

(लेखक सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व दूरदर्शन धारावाहिक तथा डाक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियो बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।)