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आउट ऑफ पैवेलियन…ये हाथ किसी को मत देना ठाकुर

फिल्म शोले का डायलॉग भले ही हो कि ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर मगर यहां ये हाथ किसी को मत देना ठाकुर वाला मामला है। जी हां, चौथे टेस्ट मैच की शुरुआत में टीम इंडिया के बल्लेबाज जब अंग्रेज गेंदबाजों के आगे चारोंखाने चित हो गए थे तब एक ठाकुर ने बल्ला थामा और रिकॉर्ड बना दिया। ये ठाकुर था शार्दुल। और जब शार्दुल के बल्ले से चौके और छक्कों की बरसात हो रही थी तब कमेंटेटर बॉक्स में बैठे कमेंटेटर कह रहे थे, ये हाथ किसी को मत देना ठाकुर। आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शार्दुल ने सबसे तेज अर्द्धशतक जड़ दिया। शार्दुल ने ३१ गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी की। यह उनके टेस्ट करियर का दूसरा अर्द्धशतक है। शार्दुल इंग्लैंड में टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज अर्द्धशतक लगानेवाले खिलाड़ी बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने इयान बॉथम और कपिल देव जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने वीरेंद्र सहवाग के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया।

घायल हुई अरुणा

पैराओलंपिक में इस बार हिंदुस्थानी खिलाड़ी जहां धूम मचा रहे हैं, वहीं एक बुरी खबर भी आई है। देश की अरुणा तंवर को टोक्यो पैरालिंपिक की महिला ताइक्वांडो के ४४-४९ किग्रा स्पर्धा के रेपेशाज दौर से हटने के लिए बाध्य होना पड़ा, क्योंकि वह शुरुआती बाउट के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं पर इसके बावजूद क्वार्टर फाइनल में खेली थीं। ये चोटें उन्हें पैरालिंपिक के शुरुआती दौर के मैचों के दौरान लगी थीं। अरुणा का सामना शाम को रेपेचेज में अजरबेजान की १०वीं वरीय रोयाला फतालियेवा से होना था। क्वार्टर फाइनल में उन्हें पेरू की चौथी वरीय एस्पिनोजा कारांजा के खिलाफ एकतरफा मुकाबले में २१-८४ से हार झेलनी पड़ी थी। मुख्य ड्रॉ के क्वार्टर फाइनल में हारनेवाले सभी खिलाड़ी रेपेचेज दौर में जगह बनाते हैं। हिंदुस्थानी पैरालिंपिक समिति की अध्यक्ष दीपा मलिक ने कहा, संदेह है कि उसे ‘हेयरलाइन’ प्रâेक्चर हो गया है। उसने पहला मुकाबला बड़े अंतर से जीता था लेकिन दूसरे में वही ऊर्जा नहीं दिखी। सूजन बढ़ गई है और उसे चिकित्सीय सहायता की जरूरत है।

दहशत में अफगानी महिला फुटबॉल टीम

अफगानिस्तान लगभग खत्म होने के कगार पर है। तालिबानी राज और उसकी दहशत में लोग पलायन कर रहे हैं, ऐसे में महिलाओं की हालत बहुत दयनीय है। अफगानी महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ी दर-दर भटकने पर मजबूर हैं। वो तालिबानियों से बचने के लिए भाग रही हैं। जी हां, अफगानिस्तान में महिला फुटबाल टीम पर तालिबान का खतरा सिर पर लटकी तलवार की तरह मंडरा रहा है। वह तालिबान से बचने के लिए जगह-जगह छिपती फिर रही हैं, वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस का कहना है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में २४ हजार अफगानों को वहीं खतरे में छोड़ दिया है।अफगानिस्तान की राष्ट्रीय महिला फुटबाल टीम फंसी हुई है। इन्हें बचाने का अंतरराष्ट्रीय प्रयास किया गया था, जो पूरा नहीं हो सका क्योंकि काबुल एयरपोर्ट पर बम धमाके हो गए थे। इसलिए इस टीम समेत उसके परिवार के सदस्य और फुटबाल फेडरेशन का स्टाफ भी काबुल में ही छूट गया।