" /> पारेटिक्स…अब गोविंद नारायण का नाम

पारेटिक्स…अब गोविंद नारायण का नाम

अब गोविंद नारायण का नाम
मध्यप्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार के बाद अब कांग्रेस आलाकमान ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिसमें एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला अपनाया जा सकता है और कमलनाथ को नेता प्रतिपक्ष का पद खाली करना पड़ सकता है। इसकी सुगबुगाहट हालांकि पहले से ही महसूस की जा रही थी जब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता विजय लक्ष्मी साधो का नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए केंद्र को भेजा गया था और बताया ये गया की डबरा से इमरती देवी को हारने में साधो की भूमिका को देखते हुए उन्हें इस पद से नवाजा जा सकता है। दूसरी तरफ अब भिंड के कद्दावर कांग्रेसी नेता गोविंद नारायण सिंह का नाम इस पद के लिए जोरदार ढंग से सामने आया है वो इसलिए कि चंबल के इस ठाकुर नेता को सिंधिया परिवार का विरोधी माना जाता है और सिंधिया की तमाम कोशिशों के बावजूद गोविंद नारायण सिंह का वर्चस्व अभी तक कायम है। इसलिए नेता-प्रतिपक्ष पद के लिए सबसे सशक्त दावेदारी भी ग्वालियर-चंबल संभाग के ताकतवर नेता डॉक्टर गोविंद सिंह की है। उनकी दावेदारी की हवा निकलने की तैयारी भी शुरू हो गई है। डॉक्टर सिंह कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। सिंधिया के लगातार विरोध के बाद भी वे आठवीं बार विधायक बने हैं। यहां तक कि भाजपा के शासनकाल में भी जिला पंचायत से लेकर स्थानीय निकायों के चुनाव में भी उनका वर्चस्व बना रहा। कांग्रेस अंदर खाने की खबर तो ये है कि चंबल में चार शक्तिशाली ठाकुर परिवार हैं, जिनमें गोविंद नारायण सिंह का सिक्का सभी दलों में चलता है यदि गोविंद नारायण सिंह नेता प्रतिपक्ष बनते हैं तो गुटीय संतुलन की दृष्टि से दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच संघर्ष तेज हो सकता है।
सिर झुका दिया
मध्यप्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने अपनी एक हरकत से सरकार का सिर झुका दिया है। किस्सा कुछ यूं है कि इन दिनों प्रदेश के बालाघाट में शेरनी फिल्म की शूटिंग चल रही है। इसमें अभिनेत्री विद्या बालन मुख्य रोल में हैं। यह शूटिंग वन विभाग के इलाके में चल रही है। इसके लिए बाकायदा सरकार से अनुमति भी ली गई है। शूटिंग के बीच शाह ने विद्या से मिलने की इच्छा जाहिर की। इस मुलाकात के लिए ८ नवंबर को सुबह ११ से १२ बजे तक का समय तय हुआ। इसके बाद शाम चार बजे वन मंत्री को महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व जाना था। वहीं उन्हें रात रुकना था, लेकिन वे भरवेली खदान के रेस्ट हाउस में रुक गए। शाह के तय समय से पांच घंटे बाद पहुंचने के बाद भी उनकी मुलाकात शाम विद्या से कराई गई। इसी दौरान उनके द्वारा साथ में डिनर की इच्छा जताई गई। चूंकि विद्या बालन महाराष्ट्र के गोंदिया में रुकी हुई थीं, लिहाजा उन्होंने डिनर से इंकार कर दिया। इसके चलते दूसरे दिन जब फिल्म से जुड़े लोग रोज की तरह वहां पहुंचे तो बालाघाट साउथ के डीएफओ जीके बरकड़े ने प्रोडक्शन यूनिट की गाड़ियां शूटिंग स्थल पर जाने से रोक दीं। अचानक वन विभाग के इस रवैया की जानकारी बड़े अफसरों को दी गई तब कहीं जाकर वाहनों को जाने दिया गया। इसके बाद शूटिंग शुरू हो सकी।बताया जाता है कि जब इस मामले की जानकारी चीफ कंजर्वेटर
ऑफ फॉरेस्ट नरेंद्र कुमार सनोडिया को मिली तो उनके द्वारा डीएफओ को फोन कर कहना पड़ा कि प्रदेश में फिल्म की शूटिंग कम ही होती है। ऐसे काम रोकोगे तो प्रदेश की बदनामी होगी।
जलवा कायम है
मध्यप्रदेश में हुए उपचुनावों में कुछ मंत्री भले ही हार गए हों पर उनका सरकार और संगठन पर अभी दबाव है, जिसके चलते उनके बेहतर पुनर्वास कि उम्मीद जताई जा रही है। पंकज चतुर्वेदी और भांडेर से चुनाव जीती रक्षा सिरेनिया को संगठन में पद मिल सकता है। वहीं इमरती देवी को किसी निगम का अध्यक्ष बना कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा बरकरार रखा जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा हो सकता है जल्द ही अपनी कार्यकारिणी घोषित करें और इस बार बड़ी संख्या में उपाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री बनाए जा सकते हैं। भाजपा संगठन इस बार नए चेहरों को ज्यादा तरजीह देगा और इसी क्रम में तीस से भी ज्यादा जिलों के अध्यक्ष बदल दिए गए हैं। मंत्रिमंडल में इस बार फेरबदल के संकेत तो हैं लेकिन पंचायत चुनाव तक हो सकता है कि विस्तार या फेरबदल रोक दिया जाए। लेकिन एक बात जो सामने आ रही है वो ये कि इस बार सिंधिया समर्थकों में किसी को भी मंत्री शायद ही बनाया जाएगा। हां, संगठन में अवश्य ही कोई पद देने की पूरी उम्मीद की जा रही है।
मैं भी हूं!
उमा भारती प्रदेश में अपनी उपस्थिति का अहसास कराती रहती हैं। अभी हाल ही में अपनी एक धार्मिक यात्रा के दौरान उमा भारती ने कहा कि देश तो धर्मनिरपेक्ष है फिर धर्मांतरण पर कानून किसलिए? उनका ये बयान मायने रखता है और उस समय जब मध्यप्रदेश सरकार लव जिहाद पर कानून बनाने जा रही है। जानकार बताते हैं कि असल निशाना कुछ और है कानून तो बहाना भर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने भारती के इस बयान का हाथों हाथ स्वागत कर दिया और कहा कि राजनीति में बेबाकी व अदम्य साहस की पहचान आदरणीया उमा भारती जी ने राजनैतिक आधार पर बनाए जा रहे धर्मांतरण जैसे कानून की जरूरत नहीं होने की बात कह करके एक बार फिर सच्चाई उगल दी है, बधाई-आभार-धन्यवाद। भाजपा में भी इस बयान के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। बहरहाल उमा भारती जी का वर्तमान में उपचुनावों के बाद से राजनैतिक कद लगातार बढ़ रहा है और बात अब मामा के लिए भी उतनी हलवा नहीं रही जो पहले थी। इस बात का अहसास उमा भारती गाहे-बगाहे करवाती रहती हैं। एक नेता जी ने बताया कि तीर जहां लगाना चाहिए वहां बराबर जा कर लगता है और परिणाम भी फटाफट मिलते हैं।

(लेखक मध्यप्रदेश की राजनीतिक पत्रकारिता में गहरी पकड़ रखते हैं, मध्यप्रदेश के सामाजिक-आर्थिक विषयों पर लगातार काम करने के साथ कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेखन भी करते हैं।)