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भविष्य निधिकर्मियों के इलाज के लिए निधि नहीं

प्रधानमंत्री केयर फंड में ढाई करोड़ रुपए का चंदा देनेवाले भविष्य निधि कर्मचारियों को कोरोना इलाज के लिए फूटी कौड़ी की व्यवस्था न होने तथा समय पर उपचार न मिलने के कारण ठाणे कार्यालय में काम करनेवाले एक कर्मचारी की कोविड-19 से मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुंबई के बांद्रा सहित ठाणे कार्यालय में काम करनेवाले एक कमिश्नर सहित कुल पांच लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। कोरोना संक्रमण पर ठाणे कमिश्नर ने उस कार्यालय में काम करनेवाले सभी 87 कर्मचारियों को होम क्वारंटीन कर दिया लेकिन दूसरे दिन जोनल कमिश्नर ने उस आदेश को निरस्त कर 50 प्रतिशत कर्मचारियों को उपस्थित रहने का आदेश जारी कर दिया जबकि महाराष्ट्र की राज्य सरकार अपने 5 प्रतिशत कर्मचारियों से काम चला रही है। वर्क फ्रॉम होम यानी ज्यादातर काम ऑनलाइन किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र में बांद्रा, ठाणे, कांदिवली, पुणे, आकुर्डी, नागपुर, सोलापुर तथा औरंगाबाद में भविष्य निधि कार्यालय हैं, जहां पिछले दो महीनों में एक हजार करोड़ रुपए के भविष्य निधि के मामले हल किए गए।
भविष्य निधि कर्मचारी यूनियन के महासचिव राकेश आचार्य का कहना है कि महाराष्ट्र के अधिकतर कार्यालय रेड जोन में होने से कर्मचारियों के संक्रमित होने का खतरा है इसलिए प्रबंधन और केंद्र सरकार जल्द से जल्द अपने नजदीकी अस्पताल से अनुबंध करें, जहां कर्मचारियों का सुचारु रूप से इलाज हो सके और दूसरा जब सब काम कर्मचारी ऑनलाइन कर सकते हैं तो 50 प्रतिशत कर्मचारियों को क्यों बुलाया जाता है? इस मामले में शिवसेना सांसद एवं भविष्य निधि कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष अनिल देसाई ने केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार को एक पत्र भी लिखा है।