" /> `फूंक-फूंककर रखती हूं हर कदम!’-प्राची देसाई

`फूंक-फूंककर रखती हूं हर कदम!’-प्राची देसाई

छोटे पर्दे पर ‘कसम से’ और ‘कसौटी जिंदगी की’ शो से अपार सफलता पानेवाली प्राची देसाई ने फिल्मों में कदम रखा। ‘आई, मी और मैं’, ‘पुलिसगिरी’, ‘एक विलेन’, ‘अजहर’, ‘बोल बच्चन’, ‘तेरी मेरी कहानी’, ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई’ जैसी फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री के रूप में नजर आनेवाली प्राची देसाई दो-तीन वर्षों बाद ‘साइलेंस- वैâन यू हियर इट’ में दोबारा नजर आ रही हैं। पेश है प्राची देसाई से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 एक अर्से बाद फिल्म ‘साइलेंस- कैन यू हियर इट’ करने की क्या वजह रही?
मेरी पिछली फिल्म थी ‘कार्बन’। इस फिल्म को खास सफलता नहीं मिली। लेकिन जब मुझे ‘साइलेंस…’ का ऑफर मिला तब इसकी निर्देशक अबन देवहंस ने मुझे इसकी स्क्रिप्ट और किरदारों के बारे में समझाया। इस फिल्म में मैं एक तेज-तर्रार पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभा रही हूं। इस फिल्म को करने की एक वजह मनोज बाजपेयी भी हैं। उनके साथ फिल्म करने का मौका मैं गंवाना नहीं चाहती थी।
 इस भूमिका को निभाने के लिए क्या आपने कोई ट्रेनिंग ली?
पुलिस ऑफिसर चाहे मर्द हों या महिला, उनका शार्प और स्मार्ट होना निहायत जरूरी है। मेरा किरदार प्रभावशाली है, जिसे देखकर समाज की कई और भी युवतियां पुलिस अफसर बनना चाहेंगी। जब इस फिल्म की शूटिंग शुरू होनी थी उस समय देश में लॉकडाउन चल रहा था। मैं फिजिकल ट्रेनिंग किसी एक्सपर्ट से ले सकूं, ऐसे हालात नहीं थे। मैंने जो भी फिजिकल ट्रेनिंग ली वो ऑनलाइन ही ली। मैंने कुछ महिला पुलिस अफसरों से बात की और उनके वर्विंâग स्टाइल को समझा।
 महिला निर्देशक अबन के साथ काम करने का तजुर्बा वैâसा रहा?
अबन की सूझबूझ कमाल की है। अभिनेत्री के तौर पर पूरी छूट देने के साथ ही उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। ये मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। अब तक के अपने करियर में मैंने शायद ही कोई रफ एंड टफ किरदार किए हैं।
 खुद के व्यक्तिगत जीवन में क्या किसी महिला का आप पर प्रभाव पड़ा है?
बचपन से मैं अपने परिवार में मां, दादी और नानी को देखकर बड़ी हुई हूं। इन सभी पारिवारिक महिलाओं के कई गुण मैंने महसूस किए और उनके गुणों को आत्मसात करने का प्रयत्न किया। लेकिन पुलिस डिपार्टमेंट की महिलाओं के कारण समाज की वो लड़कियां सुरक्षित रहती हैं जिन्हें चाइल्ड ट्रैफिकिंग या गर्ल्स ट्रैफिकिंग के लिए भगाया जाता है। महिला पुलिसकर्मियों का काम चंद शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। मैं महिला पुलिसकर्मियों को सैल्यूट करती हूं।
 आपके लिए लॉकडाउन का समय  कैसा रहा?
लॉकडाउन करना एक तरह से मजबूरी थी। कोरोना केस थमने का नाम नहीं ले रहा था। लॉकडाउन की घटना को एक वर्ष हो गया परंतु फिर वही आलम नजर आने लगा है। लॉकडाउन ने धैर्य और रिश्तों की अहमियत को समझाया। अप्रत्यक्ष तरीके से लोगों को समझाया कि जीवन में ब्रेक लेना भी जरूरी होता है।
 टीवी से फिल्मों तक का आपका सफर कैसा रहा?
बहुत कम उम्र में मैंने टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा और सभी जानते हैं कि मुझे अभिनय में लानेवाली एकता कपूर हैं। अभिनय की चाहत मुझमें शुरू से ही थी। ‘जी’ टीवी पर प्रसारित शो ‘कसम से’ की लोकप्रियता ने मुझे स्टार स्टेटस दिया। फिर ‘कसौटी जिंदगी की’ शो ने मेरे अभिनय की काबिलियत पर चार चांद लगा दिए। फिर अभिनय का सफर फिल्मों में शुरू हुआ। फिल्मों के सफर में मेरा ब्रेक लेना जरूरी था, ताकि मैं खुद को री-इवेन्ट कर सकूं। हर कदम मैं फूंक-फूंककर रखती हूं, ताकि मेरा नाम अच्छी और बेहतरीन फिल्मों के साथ जुड़ सके।
 क्या अब आप टीवी धारावाहिकों से दूर रहेंगी?
टीवी, फिल्म और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काम करने में अब कोई खास फर्क नहीं रहा। मेरा फोकस फिल्म पर है लेकिन कल क्या होगा, किसको पता?