" /> प्रणव दादा बड़े दिल वाले नेता! -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

प्रणव दादा बड़े दिल वाले नेता! -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

हमेशा राष्ट्रहित का प्रचार करनेवाले प्रणव दादा द्वारा केंद्रीय वित्तमंत्री के रूप में किए गए कार्य देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके कार्य का प्रभाव हमेशा रहेगा। भाषणबाजी की बजाय उन्होंने हमेशा अपने काम को महत्व दिया। इसलिए उन्होंने उस दौर की सरकार को कई बार बचाया। वे संकट मोचक थे। इन शब्दों में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कल मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा में शोक प्रस्ताव रखते हुए पूर्व राष्ट्रपति व भारत रत्न प्रणव मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ था, उस समय बालासाहेब ठाकरे ने प्रणव दादा का खुलकर समर्थन किया था। इसके चलते ही उनका चुनाव जीत पाना संभव हुआ था। उस समय प्रणव दादा, शरद पवार के साथ ‘मातोश्री’ आए थे। मेरी पहली मुलाकात उनसे उस समय हुई थी। सामनेवाले व्यक्ति से बोलना और सुनना उनके स्वभाव में देखने को मिला, ऐसा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा।
रात गई बात गई, ऐसे वे भूलनेवालों में से नहीं थे
राष्ट्रपति होते हुए मुंबई में जब वे आए, तब मुझे विशेष रूप से राज भवन पर बुलाया। मनपा चुनाव में हुई जीत के लिए उन्होंने मेरा अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगा था कि मैं राष्ट्रपति बनूंगा। शिवसेनाप्रमुख के चलते मैं राष्ट्रपति बना। यह ऋण व्यक्त करने के लिए मैं आपसे मिल रहा हूं, ऐसा उन्होंने कहा। यह उनका बड़प्पन था। नहीं तो कुछ लोग सत्ता पाने के बाद ‘रात गई बात गई’, कुर्सी दिखने के बाद पहले का भूल जाते हैं। कौन तुम और कौन हम, ऐसा उन्होंने कभी नहीं किया, ऐसा कटाक्ष भी मुख्यमंत्री ने इस दौरान विपक्ष पर किया।
महाराष्ट्र का उपकार न भूलनेवाले नेता
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पूर्व विधायक अनिल राठोड को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। अनिल राठोड महाराष्ट्र में आए और महाराष्ट्र के हो गए। महाराष्ट्र का उपकार माननेवाले इस नेता ने लोगों की समस्याएं सुलझाने के लिए सड़क पर उतरकर कई बार आंदोलन भी किया। नगर जिला से २५ बार विधायक के रूप में चुनकर आने के बाद भी उनकी पहचान एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में थी। अनिल भैया के जाने से उनसे प्यार करनेवाली जनता का बड़ा नुकसान हुआ है, इन शब्दों में मुख्यमंत्री ने अनिल भैया राठोड को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवाजीराव पाटील निलंगेकर, सुधाकर परिचारक, हरिभाऊ जावले, सदाशिवराव ठाकरे, रामकृष्ण पाटील, शीतल दास हरचंदानी और सुनील शिंदे शामराव पाटील, अण्णासाहेब उढाण, सुरेश पाटील, रतन बापू राऊत, मधुकर कांबले और श्रीमती चंद्रकांता गोयल के निधन पर शोक प्रस्ताव रखा व उक्त लोगों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। इस शोक प्रस्ताव को विपक्षी नेता देवेंद्र फडणीस, नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे, जल संसाधन मंत्री जयंत पाटील आदि ने समर्थन दिया और दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।