दालें देगी दगा! कीमतें १०० के पार

दालें इस साल फिर दगा दे सकती हैं। इस साल जहां दलहन का आयात घटा है वहीं अब तक हुई बुआई के लिहाज से दालहन की खेती का रकबा घटा है। दूसरी ओर हिंदुस्थान द्वारा दाल की मांग में आई कमी के चलते विदेशी किसानों ने भी दाल का उत्पादन घटाया है। इन कारकों को देखते हुए देश की करीब २.४ लाख टन की मांग को पूरा करने के लिए दालों की किल्लत हो सकती है। जिसके कारण अब तक बाजार में रु.१०० के पार पहुंची दाल की कीमत फिर से आसमान छूने लगे तो हैरानी नहीं होगी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने खाद्य सचिवों से राज्यवार अरहर की दाल की मांग रिपोर्ट लेने का आदेश दिया है।
देश में दाल की खपत लगभग २.४-२.५ करोड़ टन होती है और बुआई का रुख देखते हुए साल १८-१९ में देश की दलहन फसल २.३२२ करोड़ टन रहने का अनुमान है जो पिछले साल की तुलना में २२.२ लाख कम है। ज्यादातर किस्मों का भाव अब भी उनके एमएसपी से नीचे रहने की वजह से फसल में और गिरावट आ सकती है। इस सीजन में अब तक खरीफ की दलहन बुआई केवल ७.९४ लाख हेक्टेयर हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक २७.९ लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। इस बीच हिंदुस्थान द्वारा दालहन के आयात में गिरावट के बाद विदेशी किसानों ने भी अरहर की खेती में कमी की है। इसलिए इस साल वैश्विक बाजार में अरहर की उपलब्धता में कमी आई है। मुंबई के कारोबारियों के अनुसार दलहन की अन्य किस्मों को अब भी एमएसपी नहीं मिल रहा है, जबकि किसान खरीफ की नई फसल की बुआई करने में व्यस्त हैं। स्थिति पूरी तरह संतुलित होने के बाद दलहन किसानों को बाजार से सुनिश्चित एमएसपी मिलना शुरू हो जाएगा। बफर के लिए सरकार के पास बचे हुए कुछ स्टॉक और मूल्य स्थिरीकरण का असर बाजार पर पड़ेगा। इससे कम से कम उन किस्मों की कीमतों में तीव्र वृद्धि नहीं होगी जो एमएसपी से नीचे चल रही हैं। पिछले कुछ महीनों से अरहर की कीमतें १०० रुपये से ऊपर चल रही हैं और मुंबई के खुदरा बाजार में यह ११५-१२० रुपये प्रति किलोग्राम पर भी बेची गई थी।