" /> पुरोहित परेशान!, पूजा पाठ कम किससे कहें अपना गम?

पुरोहित परेशान!, पूजा पाठ कम किससे कहें अपना गम?

मंदिर व घरों में शादी-ब्याह और पूजा-पाठ कराकर दक्षिणा से घर-परिवार चलानेवाले पुरोहित इन दिनों परेशान हो गए हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोग पुरोहितों को अपने घर बुलाकर भी पूजा-पाठ और अनुष्ठान नहीं करा रहे हैं। पूजा-पाठ कम हो जाने से परेशान इन पुरोहितों के सामने समस्या है कि अपना ये गम अब वे किसको बताएं? गणेशोत्सव आ रहा है। परसों बप्पा विराजने जा रहे हैं। अब इन पुरोहितों में उम्मीद जागी है कि बप्पा उनका विघ्न अवश्य हरेंगे। मुंबई व महाराष्ट्र में गणेशोत्सव काफी उत्साह से मनाया जाता है और इन पुरोहितों को उम्मीद है कि लोग उन्हें अवश्य बुलाकर बप्पा की पूजा करवाएंगे और उनकी परेशानी खत्म होगी।

भगवान गणपति मुंबई व महाराष्ट्र के अराध्य देव हैं। गणेशोत्सव से लाखों लोगों के साथ ही पुरोहितों की भी आजीविका जुड़ी हुई है। इस बात का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि गणेशोत्सव में पूजा कराने के लिए जल्दी पुरोहित नहीं मिलते। सभी पुरोहित जजमानों के पास बुक रहते हैं। एक-एक पुरोहित हर दिन १० से १५ पूजा तक करवाते हैं। इसलिए उनकी उम्मीदें बप्पा पर ही टिकी हुई हैं।

पालघर जिले में करीब १५ हजार से अधिक पंडित-पुरोहित कोरोना की मार झेल रहे हैं। अप्रैल से अगस्त के महीने में बड़ी संख्या में शादियां होती हैं। इस दौरान घरों में मांगलिक कार्य भी कराए जाते हैं। कोई भी काम शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है। अक्षय तृतीया एक ऐसा ही शुभ दिन माना जाता है। इस दिन लाखों जोड़े शादी के बंधन में बंधते हैं। लेकिन इस साल देशव्यापी लॉकडाउन के चलते अधिकांश शादियां टल गयीं हैं। इसके साथ ही शादी से जुड़े काम-धंधों से कमाई कर अपना परिवार चलानवाले हजारों पंडितों के सामने अभूतपूर्व आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
पंडित अरविंद कुमार मिश्रा नालासोपारा में अपने पत्नी व दो बच्चों के साथ रहते हैं। पालघर जिले में सैकड़ों परिवारों के धार्मिक आयोजनों और अनुष्ठानों को पूर्ण कराने में हमेशा व्यस्त रहते हैं। इन दिनों अपने रोजमर्रा के कामकाज से दूर एकांत में शास्त्रों के अध्ययन में लीन रहते हैं। वर्षों बाद उनके जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस साल अप्रैल के महीने में उन्होंने कोई शादी नहीं कराई। इस महीने १५ शादियों की बुकिंग थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से सभी स्थगित हो गर्इं। नालासोपारा के रहनेवाले पंडित सुरेशमणी त्रिपाठी पिछले २५ वर्षों से हर साल कई शादियां और मांगलिक कार्य करवाते हैं। पिछले चार महीने में कई शादियां और उतने ही मांगलिक कार्य वैंâसिल हो गए। अक्षय तृतीया के दिन जिले में हजारों शादियां संपन्न होती हैं। अप्रैल ही नहीं बल्कि मई और ठंडी के महीने में तय शादियां भी अब टलने लगी हैं। अक्षय तृतीया के बाद विवाह का मुहूर्त शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार मुहूर्त के बाद भी कोरोना के चलते विवाह टल रहे हैं। मई महीने में ही विवाह के १६ मुहूर्त थे। पंडित राजेंद्र प्रसाद दुबे ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से पंडितों को भी आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। पूजा -पाठ और शादियों के स्थगित होने से उन्हें २५ से ३० हजार रुपए का नुकसान हुआ है। कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस बार लोग पंडितों को अपने घर बुलाकर भी पूजा-पाठ और अनुष्ठान नहीं करा रहे हैं।