" /> पटना में पहेली बना कोरोना! डॉक्टरों को समझ नहीं आ रहा वायरस का असर

पटना में पहेली बना कोरोना! डॉक्टरों को समझ नहीं आ रहा वायरस का असर

पटना में कोरोना वायरस के असर ने डॉक्टरों को हैरान कर रखा है। एक संक्रमित मां की गोद में हमेशा रहने वाली दुधमुंही बच्ची की निगेटिव रिपोर्ट जैसे मामले हर दिन चौंका रहे हैं। कोरोना अस्पताल (एनएमसीएच) में एक, दो नहीं,कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जो डॉक्टरों को अचंभित कर रहे हैं। वायरस की ऐसी ही प्रकृति को लेकर आरएमआरआई के साथ पटना मेडिकल कॉलेज शोध की तैयारी कर रहा है। वायरस का बदला रूप तो शोध में ही सामने आएगा लेकिन माइक्रो वायरोलॉजी के विशेषज्ञों का कहना है कि मलेरियल जोन भी वायरस को पहेली बना रहा है।

बिहार और झारखंड मलेरियल जोन में हैं और यह उसके प्रकृति बदलने का बड़ा कारण हो सकता है। ऐसे केस को विशेष निगरानी में रखा जा रहा है, जो शोध करने लायक हैं। वायरस की प्रकृति को लेकर विशेषज्ञ बताते हैं कि यह भविष्य में और प्रभावी हो सकता है या फिर तापमान के साथ मलेरियल जोन में प्रभावहीन हो सकता है। बाहर की टीम शोध करने भी आ सकती है। प्रकृति, प्रतिरोधक क्षमता, मलेरियल जोन, तापमान में से किसी भी वायरस का नेचर बदल सकता है। उच्च जोखिम पर वही गए हैं जो बीमार या अधिक उम्र के हैं। कोरोना अस्पताल के डॉक्टर बताते हैं कि सीवान के चार संक्रमितों ने सोचने पर मजबूर कर दिया था। चारों की रिपोर्ट आईजीआईएमएस में एक साथ पॉजिटिव आई। दो दिन बाद आरएमआरआई ने चारों की एक साथ रिपोर्ट निगेटिव दी।

जांच पर सवाल तो नहीं खड़े किए जा सकते। चारों का एक साथ बीमार होना और 48 घंटे बाद चारों का एक साथ स्वस्थ होना वाकई में चौंकाने वाला है। कोरोना अस्पताल (एनएमसीएच) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय का कहना है कि कई ऐसे मामले आए हैं जिससे वायरोलॉजी की टीम अचंभित हैं। दो-दो महिलाएं संक्रमित हों और हमेशा उनके साथ रहने वाली बेटियां निगेटिव पाई जाएं, ऐसे मामले शोध का विषय हैं। हालांकि अनुमान है कि बिहार और झारखंड मलेरियल जोन में है। यहां वायरस की प्रकृति ही कुछ अलग दिख रही है। मलेरियल जोन भी वायरस का नेचर प्रभावित कर सकता है। वायरस का रिसेप्टर और मलेरिया का रिसेप्टर मिलता जुलता है। यह भी एक कारण हो सकता है। पटना के सिविल सर्जन डॉ. राज किशोर चौधरी का कहना है कि कोरोना वायरस किसी पर बहुत कम असर दिखा रहा है तो किसी से कई लोगों में फैल रहा है। वायरस की प्रकृति ही पहेली है। कई मामले ऐसे भी आए जिसमें संक्रमण फैलाने वाला ही निगेटिव हो जाता है।