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ऊपर केबल ब्रिज नीचे दौड़ेगी रेल!

रेल लाइन के ऊपर से गुजरनेवाले जर्जर ब्रिजों की जगह पर मुंबई में केबल स्टे ब्रिज निर्माण की शुरुआत जल्द ही होगी। ऐसे १० ब्रिजों का निर्माण किया जाएगा, जो रेल लाइन के ऊपर से होकर गुजरेंगे। इन पुलों के निर्माण से पहले ड्रोन सर्वे,
जियोलॉजिकल सर्वे और ब्रिज डिजाइन का काम होगा था, जिसे महाराष्ट्र रेल इंप्रâास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमआरआईडीसी) ने पूरा कर लिया है। १० केबल स्टे ब्रिजों में से पहला केबल स्टे ब्रिज भायखला में बनाया जाएगा। रेल लाइन के ऊपर से गुजरनेवाला यह मुंबई का पहला केबल स्टे ब्रिज होगा।

५०० मीटर लंबा होगा ब्रिज
एमआरआईडीसी ने सबसे पहले भायखला में केबल स्टे ब्रिज निर्माण करने का निर्णय लिया है। इस केबल स्टे ब्रिज की लंबाई करीब ५०० मीटर होगी, जो भायखला और सैंड्हर्स्ट रोड स्टेशन के बीच होगी। ये ब्रिज ब्रिटिशकालीन ब्रिज है, जिसका निर्माण १९२२ में किया गया था, जो कि ९८ साल पुराना है। प्रत्येक ब्रिज के निर्माण की अनुमानित लागत करीब २०० करोड़ रुपए होगी।

मनपा-एमआरआईडीसी समझौता
मुंबई में एमआरआईडीसी को पुराने ब्रिजों की जगह पर नए ब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एमआरआईडीसी ने मुंबई और उपनगरीय क्षेत्र में ११ रोड ओवर ब्रिज और एक रोड अंडर ब्रिज निर्माण के लिए १४ जुलाई, २०२० को मनपा के साथ समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।

जियोलॉजिकल सर्वे हुआ पूरा
एमआरआईडीसी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार जायसवाल ने बताया कि एमआरआईडीसी ने ब्रिज निर्माण के लिए जमीनी स्तर से ५ मीटर नीचे जियोलॉजिकल सर्वे सहित ब्रिज निर्माण से जुड़े अन्य जरूरी कामों को कर लिया है।

८ लेन का होगा ब्रिज
भायखला में मौजूदा ब्रिज ६ लेन वाला है। इसकी जगह पर नया ब्रिज ८ लेन वाला होगा। दोनों तरफ आवागमन के लिए ४ लेन होगा। योजना के मुताबिक आरओबी के वर्तमान वायाडक को नए ढांचे के साथ जोड़ दिया जाएगा। फिलहाल एमआरआईडीसी ने नए आरओबी को पूरा करने और नए प्रस्तावित केबल स्टे ब्रिज के लिए ट्रैफिक डाइवर्ट को लेकर योजना बनाई है।

भायखला ब्रिज की खासियत
भायखला रोड ओवर ब्रिज सीएसएमटी और दादर को जोड़नेवाला मुख्य ब्रिज है। ऐसे में एमआरआईडीसी ब्रिज निर्माण के दौरान ट्रैफिक की समस्या न उत्पन्न हो इसलिए मौजूदा ब्रिज के ऊपर केबल स्टे ब्रिज का निर्माण करेगी। उसके बाद पुराने ब्रिज को ध्वस्त करेगी। १० ब्रिजों में से ६ ब्रिज ऐसे ही बनाए जाएंगे।

सीमा विवाद से छुटकारा
रेलवे ट्रैक के ऊपर पुल निर्माण को लेकर हमेशा रेलवे और मनपा के बीच सीमा विवाद का मामला सामने आता रहा है। इसे टालने के लिए साल २०१७ में महाराष्ट्र रेल इन्प्रâास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरशन लिमिटेड (एमआरआईडीसी) की स्थापना की गई थी। राज्य सरकार और रेलवे ब्रिज निर्माण के लिए ५०:५० राशि देती है। इन संस्थाओं को बाजार से कर्ज लेने की जिम्मेदारी देने के साथ ही अब रेलवे लाइन डालने जैसी बड़ी परियोजना की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यहां बनेंगे केबल स्टे ब्रिज
मुंबई उपनगरीय रेल मार्ग के ऊपर १० ब्रिजों को तैयार किया जाएगा। सबसे पहले भायखला स्थित ओलिवेंट ब्रिज का काम शुरू किया जाएगा। उसके बाद महालक्ष्मी, आर्थर रोड ब्रिज, घाटकोपर, लोअर परेल, बेलासिस, गार्डन ब्रिज, तिलक ब्रिज, रे रोड, करी रोड आदि ब्रिजों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसके अलावा माटुंगा लेबर कैंप स्थित सबवे निर्माण कार्य की भी योजना एमआरआईडीसी की है।

दो साल में बनेगा पुल
एमआरआईडीसी की योजना नया पुल निर्माण कर लेने के बाद पुराने पुल को राहगीरों के आने-जाने के लिए रखा जाएगा। साथ ही वहां पर बगीचा तैयार करने की भी योजना है। मनपा की ओर से जमीन अधिग्रहण और निधि उपलब्ध होते ही दो साल में ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा। एमआरआईडीसी की योजना राज्य में कुल ६९ ब्रिज निर्माण करने की है।

समय पर काम तो बोनस
ब्रिज समय पर तैयार होने पर २ फीसदी बोनस बांटा जाएगा। साथ ही ब्रिज निर्माण में देरी होने पर ९ से ११ फीसदी जुर्माना भी लगाया जाएगा।