ये प्यास कैसे बुझेगी?

-५५ दिनों का पानी
बह गया गटर में
-वॉटर हार्वेस्टिंग ही बचा सकता है पानी
-रोज होती है ६,००० एमएडी की जलापूर्ति 
– हर वर्ष बारिश में १०-२५ मिमी की कमी
मुंबई सही एमएमआर क्षेत्र में पिछले दो दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही है। इस झमाझम बारिश से जो लोग ३ दिनों से खुश दिखाई दे रहे हैं वही आज से चार दिन पहले इस टेंशन में थे कि कहीं बारिश और लेट हुई तो पानी की किल्लत न हो जाए। मुंबई, ठाणे, कल्याण, बदलापुर, रायगढ़, पालघर, नई मुंबई आदि को पानी पहुंचनेवाले तालाबों में पानी का स्तर इतना नीचे चला गया था कि थोड़ा और विलंब होता तो हाहाकार मच जाता। इस विकट संकट की आंच लोगों तक आ गई थी इसके बावजूद सरकार, प्रशासन व लोग सीख नहीं ले रहे हैं। एमएमआर क्षेत्र (महामुंबई) में विगत तीन दिनों में सैकड़ों मिलीमीटर बारिश गिर चुकी है, इसमें से अधिकांश पानी सड़कों से होते हुए गटरों में बह गया। मनपा के अधिकारियों व जानकारों की मानें तो अगर इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को कड़ाई से लागू किया जाता तो क्षेत्र में लगभग ५५ दिनों तक की जलापूर्ति की जा सकती थी।
बता दें कि शुक्रवार से ही मुंबई समेत एमएमआर क्षेत्र में झमाझम बारिश देखने को मिली है। शुक्रवार सुबह ८ बजे से रविवार शाम ६ बजे तक मुंबई में लगभग २६० एमएम बारिश हुई है। गौरतलब है कि मुंबईकरों की प्यास बुझाने के लिए मनपा प्रतिदिन ३,८५० मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति करती है। मनपा के जल विभाग के प्रमुख अभियंता अशोक कुमार तावड़िया का कहना है कि यदि मुंबई में २,४०० से २,६०० मिमी के बीच मॉनसून के चार महीनों में बारिश हो जाए, तो बिना कटौती के सालभर जलापूर्ति हो सकती है। इस हिसाब से देखा जाए तो ६.८५ मिमी की बारिश मुंबईकरों की एक दिन की प्यास बुझा सकती है। यदि तीन दिन में २६० मिमी बारिश के पानी को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए एकत्रित किया गया होता तो मुंबईकरों की ३८ दिनों तक की प्यास बुझाई जा सकती थी। ठाणे के जल विभाग के अभियंता ने बताया कि रोजाना ठाणेकरों को ४८० एमएलडी पानी की जरूरत होती है। ठाणे, कल्याण, भिवंडी व अन्य नगर पालिकाओं में विगत तीन दिनों में हुई बरसात के पानी को जमा किया जाता तो लगभग ८० से ९० दिनों तक का पानी लोगों के आपूर्ति के लिए हो जाता। नई मुंबई, रायगढ़ आसपास के क्षेत्र में तीन दिनों में २३५ मिमी से ज्यादा बारिश हुई हैं। संबंधित विभाग के अधिकारी की मानें तो ६ मिमी की बारिश नई मुंबईकरों के एक दिन की प्यास बुझा सकती है। इस हिसाब से यदि वहां हुई बरसात के पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए बचाया गया होता तो लगभग ४० से ४५ दिन के पानी बचत हो सकती थी। मनपा के अधिकारियों की मानें तो बड़ी सोसायटी में वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया है लेकिन अभी भी एमएमआर क्षेत्र में वॉटर हार्वेस्टिंग केवल पेपरों पर है। ग्लोबल वार्मिंग का संकट गहराता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा दुष्परिणाम मौसम पर पड़ रहा है। मॉनसून के दिन कम हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई सहित पूरे देश में २००२ से २०१६ तक लगभग १० से २५ मिमी बारिश कम हुई है। २०२० तक २१ शहरों से जमीन के नीचे का पानी खत्म हो जाएगा। ऐसे में यदि अब भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए पानी को जमा नहीं किया गया तो वो दिन दूर नहीं जब पानी का संकट क्षेत्र में मंडराएगा।