" /> बरसात का ‘कमबैक’

बरसात का ‘कमबैक’

मुंबई सहित ठाणे, पालघर, रायगड और कोकण में फिलहाल मूसलाधार बारिश शुरू है। कोल्हापुर और सांगली जिलों में बाढ़ की चेतावनी दे दी गई है। मौसम विभाग ने आगामी २४ घंटों में मुंबई सहित मध्य महाराष्ट्र, गोवा, कोकण, गुजरात और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में अतिवृष्टि होने का अनुमान लगाया है। मुंबई में तो मंगलवार और बुधवार को लगातार बारिश हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। हालांकि मुंबई, ठाणे, पालघर और कोकण में अच्छी बरसात की आवश्यकता तो थी ही, क्योंकि जुलाई महीने की शुरुआत में दमदार हाजिरी के पश्चात बरसात ने मानो मुंबई, ठाणे को अनदेखा ही कर दिया था। गत वर्ष जुलाई महीने में मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगड, नासिक आदि जिलों में खूब बरसात हुई थी। इस वर्ष भी मौसम विभाग ने जुलाई और अगस्त में औसत से अधिक बरसात होने का अनुमान लगाया था। हालांकि मुंबई, ठाणे को छोड़कर जून-जुलाई में राज्य में बरसात संतोषजनक रही। जो कभी नहीं हुआ वो इस बार मुंबई में हुआ यानी जुलाई महीने में जलापूर्ति में कटौती की गई। प्रशासन पर २० प्रतिशत पानी कटौती की नौबत आन पड़ी। अगस्त शुरू होते ही मंगलवार और बुधवार को मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगड सहित कोकण में बारिश ने धुआंधार बैटिंग की। मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण यह बारिश हो रही है। कारण भले जो हो कोकण, रायगड, ठाणे, पालघर और मुंबई में आवश्यकतानुसार मूसलाधार बारिश होनी महत्वपूर्ण है। कोकण में कई नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। महाड और अन्य गांवों में बाढ़ का पानी निचले इलाकों में पहुंच गया है। राजापुर तालुका में भी यही स्थिति है। खेड स्थित जगबुडी और नारंगी नदी में बाढ़ आ गई है। सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिले में भी बरसात कहर बरपा रही है। कणकवली, खारेपाटन, बांदा और कुडाल सहित रत्नागिरी में बाढ़ का पानी बाजारों और रिहायशी इलाकों में घुस गया है। पालघर जिले के डहाणू, जव्हार और विक्रमगड़ तालुकाओं में भी मूसलाधार बारिश के कारण ‘एनडीआरएफ’ की टीम को बुलाने की तैयारी है। ठाणे जिले में ऐसी बरसात की आवश्यकता थी ही। मुंबई में कुछ स्थानों पर पानी भर जाने पर हमेशा चिल्लाने वालों ने चिल्लाना शुरू किया। उन्हें भरा हुआ पानी दिखता है। लेकिन उसके भरने के पीछे के मुंबई की भौगोलिक स्थिति और अन्य कारण नहीं दिखते। लगातार परिस्थिति को संभालते हुए सबकुछ ठीक करने के लिए सतत प्रयासरत मनपा प्रशासन की मेहनत उन्हें नहीं दिखती। ऐसी बरसात के दौरान मुंबई का जनजीवन थोड़ी देर के लिए अस्त-व्यस्त होता है। लेकिन ये भी सच है कि मुंबई और ठाणे जिले में जलापूर्ति करने वाले जलाशय जब तक ओवरफ्लो होकर नहीं बहते, तब तक मुंबई, ठाणे, कल्याण, डोंबिवली, अंबरनाथ आदि महानगरों का जल संकट दूर नहीं होता। इस बार राज्य में मॉनसून का आगमन समय से हुआ। शेष महाराष्ट्र में इस साल जून से संतोषजनक बारिश हुई। सालों से अकाल और जल संकट से जूझने वाले मराठवाड़ा में भी अच्छी बरसात हुई। वहां की झीलें पूरी तरह से भले भरी ना हों, लेकिन खरीफ की फसल अच्छी हो गई है। विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र में भी अच्छी बारिश हो रही है। चिंता मुंबई, ठाणे, रायगड और पालघर जैसे क्षेत्रों की थी, जहां बरसात को लेकर कभी चिंता नहीं करनी पड़ी थी। लेकिन फिलहाल जारी बरसात ने इस चिंता को कुछ हद तक दूर कर दिया है, ऐसा कहा जा सकता है। कोकण और मुंबई में बरसात की प्रतीक्षा कभी-कभार ही करनी पड़ती है। अब बरसात ने दमदार ‘कमबैक’ किया है। यह ‘कमबैक’ जुलाई जैसा साबित ना हो बस। जुलाई की कसर वरुण देव अगस्त महीने में पूरी कर लें। बरसात के दमदार ‘कमबैक’ से कुछ भागों में बाढ़ जैसी स्थिति भले बन गई हो लेकिन उस संदर्भ में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन सतर्क व मुस्तैद है। यह बरसात पीने के पानी के साथ-साथ खेती के लिए आवश्यक पानी की समस्या को दूर करेगी, ऐसी अपेक्षा है।