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यूपी परिवहन विभाग में बाबुओं का ‘राज’!

♦ रिटायरमेंट के करीब पहुंचे कर्मियों का जबरन काटा वेतन
♦  हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, तत्काल काटी गई रकम वापसी के आदेश
♦  पौने सात साल से हक की लड़ाई लड़ रहे थे सेवानिवृत्त परिवहनकर्मी

यूपी के संवेदनहीन भ्रष्टतंत्र व सरकारी कार्यालयों में व्याप्त ‘लिपिक राज’ को एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आईना दिखा दिया है। सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचनेवाले यूपी रोडवेज के कर्मचारियों के वेतन की तमाम ‘भुगतान’ राशि में बगैर नियम-कानून की जा रही लाखों रुपए की कटौती करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है और दो माह के भीतर तत्काल समस्त देय धनराशि सभी कर्मचारियों को लौटाने का आदेश सुनाया है।
प्रकरण मूलत: अयोध्या मंडल के सुल्तानपुर डिपो से संबंधित है। इस डिपो के तकरीबन आधा दर्जन कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बाद भी पांच साल से बगैर नियम-कानून दो साल तक काटी जाती रही अपनी भविष्यनिधि में जमा होनेवाली राशि को लेकर लड़ाई लड़ रहे थे। मामला ये है कि डिपो में तैनात हरिराम पांडेय, सरवर, शिव बख्श उपाध्याय, हिमायत अली व इम्तियाज आदि सन् २०१५ में जब ५८ साल के हो गए तो बगैर किसी नियम-कानून उनके अनेक देयकों को भविष्यनिधि में संकलित करने की बजाय महकमे के बाबू (अजय सिंह) ने प्रतिमाह काटना शुरू कर दिया। शिकायत हुई तो अफसरों ने इसे ‘असंगत’ स्वीकार तो किया लेकिन वेतन में से हो रही कटौती नहीं रुकी। अफसरों के आगे हक के लिए गिड़गिड़ाते-गिड़गिड़ाते संबंधित कर्मचारी अंतत: रिटायर भी हो गए, पर नतीजा सिफर रहा। मजबूरन पीड़ितों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में आखिरकार सेवानिवृत्त परिवहन कर्मियों को न्याय मिला। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल बेंच ने सात साल से लड़ाई लड़ रहे इन कर्मियों की मांग को जायज ठहराया। अधिवक्ता एसएन शुक्ल की ओर से दायर याचिका ‘हरिराम पांडेय व अन्य बनाम यूपी स्टेट’ मुकदमे में प्रमुख सचिव रोडवेज को भी तलब किया और दो महीने के भीतर ५८ वर्ष की अधिवर्षता आयु पूर्ण होने के बाद रिटायरमेंट तक कर्मचारी भविष्य निधि में जमा करने की बजाय कटौती की जानेवाली संपूर्ण राशि दो माह के अंदर याचिकाकर्ताओं को वापस करने का आदेश दिया है।