" /> मकर संक्रांति पर दुर्लभ संयोग… बन रहा है गजकेसरी बुधादित्य व ध्वज योग

मकर संक्रांति पर दुर्लभ संयोग… बन रहा है गजकेसरी बुधादित्य व ध्वज योग

पौष मास में जब मकर राशि में सूर्य प्रवेश करता है तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने आते हैं। वहीं, कुछ मान्यताएं ऐसी भी हैं कि इसी दिन शुक्र का उदय होता है और इसी दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस साल मकर संक्रांति की तिथि को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं है। आज यानी १४ जनवरी को मकर संक्रांति देश भर में धूमधाम से मनाई जाएगी। मकर संक्रांति के पर्व के अवसर पर ५ ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन मकर राशि में सूर्य के साथ, शनि, गुरु, बुध और चंद्रमा एक साथ विराजमान रहेंगे। इस बार सुबह ८.१४ बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। उस समय ध्वज योग बनेगा, जिसके बाद से सभी राशियों के जातकों की किस्मत में बदलाव शुरू होगा। कोरोना संक्रमण के चलते जहां वर्ष २०२० किसी के लिए कुछ खास नहीं रहा, वहीं १४ जनवरी को मकर संक्रांति के बाद सभी राशियों में शुभ संकेत दिखाई दे रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, श्रवण नक्षत्र में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से ध्वज योग बना है। यह एक शुभ योग है और कई राशियों के लिए फलदायी भी रहेगा। इस समय श्रवण नक्षत्र उदित रहेगा और पूरे दिन इसका प्रभाव बना रहेगा। इस दिन मकर राशि में सूर्य के आगमन से ५ ग्रहों का शुभ संयोग बनेगा। इसमें सूर्य, बुध, गुरु, चंद्रमा और शनि शामिल होंगे। ऐसे में मकर संक्रांति के अवसर पर एक साथ तीन शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें बुधादित्य, गजकेसरी और ध्वज योग शामिल हैं।
मकर संक्रांति का पुण्य काल:
१४ जनवरी को मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह ०८ बजकर ३० मिनट से शाम को ०५ बजकर ४६ मिनट तक है। वहीं, मकर संक्रांति का महा पुण्य काल ०१ घंटा ४५ मिनट का है, जो सुबह ०८ बजकर ३० मिनट से दिन में १० बजकर १५ मिनट तक है।
मकर संक्रांति पर ऐसे करें पूजा:
इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए। फिर नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। नहाने के पानी में तिल मिलों और उसी से नहाएं। इस दिन साफ नए कपड़े पहनें। फिर दाहिने हाथ में जल ले और पूरे दिन बिना नमक खाए व्रत करने का संकल्प लें।
इस दिन आपको अपने सामर्थ्यनुसार दान करने का संकल्प लेना चाहिए।
इसके बाद सूर्यदेव को तांब के लोटे में जल लेकर शुद्ध जल अर्पित करें। इस जल में लाल फूल, लाल चंदन, तिल और थोड़ा-सा गुड़ मिला लें।
जो जल आप सूर्य को चढ़ा रहे हैं उसे तांब के बर्तन में ही गिरों। जो जल इस बर्तन में इक्ट्ठा हो उसे जल मदार के पौधे में डाल दें।
सूर्य को जल चढ़ाते हुए बोलें ये मंत्र:
सूर्य को जल चढ़ाते हुए इस मंत्र का करें जाप। मंत्र: ऊं घृणि सूर्यआदित्याय नम:
सूर्यदेव की पूजा करते समय
इन मंत्रों का भी करें जाप:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐसप्तार्चिषे नम:
ॐ सवित्रे नम:,
ॐ मार्तण्डाय नम:,
ॐ विष्णवे नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ मरिचये नम:
स्नान-दान से खत्म होता कालसर्प-पितृ दोष
मकर संक्रांति पर पवित्र नदी में स्नान को महत्वपूर्ण माना गया है। कुंभ का पहला पर्व स्नान १४ जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर हो रहा है। कुंभ का आयोजन इस बार हरिद्वार में किया जा रहा है। कुंभ स्नान करने से कालसर्प और पितृदोष का प्रभाव कम होता है। राहु-केतु के कारण कालसर्प और पितृ दोष बनता है, जिन लोगों की जन्म कुंडली में ये दोष मौजूद रहते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन बननेवाले शुभ योग में पूजा, स्नान और दान करने से कई प्रकार की मुसीबतों से छुटकारा मिलता है वहीं जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। साथ ही मकर संक्रांति का पर्व कई दोषों को भी दूर करता है। हर कार्य में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। व्यवसाय में सफलता नहीं मिलती है। जीवन में धन की कमी पेश आती है। जमा-पूंजी नष्ट हो जाती है। रोग आदि भी घेर लेते हैं।