पुल हल्का करो! डांबर दे रहा दिक्कत

मुंबई में फिर से एक बार पुलों (रोड ओवर ब्रिजों) के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। रेलवे के अधिकारियों की मानें तो मॉनसून के दौरान मुंबई के ४ पुल मुंबईकरों के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। इन पुलों का वजन काफी बढ़ गया है और इन्हें हल्का किए जाने की जरूरत है। नहीं तो आनेवाले दिनों खासकर मॉनसून में खतरा बढ़ सकता है। इनमें से मध्य रेलवे में कई पुल ज्यादा खतरनाक हैं।
पिछले साल मॉनसून के समय अंधेरी स्थित गोखले पुल हादसे की घटना से सबक लेते हुए रेलवे ने अभी से एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। गोखले पुल हादसे की वजह पुल पर तय मानक से अधिक भार का होना बताया गया था। ऐसे में इस बार रेलवे मॉनसून के समय कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मध्य रेलवे ने मनपा को उन पुलों को हल्का करने को कहा है, जिन पुलों पर तय मानक और क्षमता से अधिक भार है। रेलवे का मानना है कि इन पुलों पर सीमित मात्रा से अधिक डांबर की परत मौजूद है जो बारिश के दौरान दिक्कत दे सकती है। दरअसल, इन पुलों पर मरम्मत कार्य के दौरान डांबर की परत बिछाई जाती है। साल दर साल यह सिलसिला चलता रहता है। इससे पुलों पर डांबर की परत मोटी होती जाती है और उनका वजन बढ़ता जाता है। इसका असर पुल के स्लैब और खंभों पर पड़ता है।
रेलवे के ४ पुल खतरनाक
मध्य रेलवे के ट्रैक के ऊपर से गुजरनेवाले ४ पुल ऐसे हैं, जिन पर सालों से डांबरीकरण होने के कारण डांबर की ३० से ४० सेमी अतिरिक्त मोटी परत जम गई है। इन पुलों पर तय क्षमता से अधिक भार होने के चलते ये पुल मॉनसून के समय हादसे का कारण बन सकते हैं। इनमें मध्य रेल के ४ पुल काफी खतरनाक हैं। ये हैं करी रोड, भायखला, चिंचपोकली और घाटकोपर के पुल। रेलवे ने इन पुलों से डांबर की अतिरिक्त परतों को निकालने के लिए मनपा को खत लिखा है। इस बारे में एक रेल अधिकारी का कहना है कि सालों से इन पुलों पर लगातार डांबर की परत बिछाए जाने से पुल की ऊंचाई तो बढ़ी ही है, साथ ही इन पुलों पर क्षमता से अधिक डांबर की परतों का भार भी बढ़ा है।
इन वजनी पुलों के बारे में रेल अधिकारी का कहना है कि पुल हादसे के बाद मुंबई के पुलों पर मौजूद केबल वायर निकाल दिए गए और उन्हें दूसरी जगह पर शिफ्ट किया गया है लेकिन पुलों पर मौजूद अतिरिक्त डांबर के भार को कम करने पर कोई विचार नहीं किया गया था। अधिकारी के मुताबिक करी रोड पुल का फुटपाथ काफी बुरी स्थिति में है, जिसे आनेवाले दिनों में आवाजाही के लिए बंद किया जा सकता है। वहीं मनपा इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हम रेलवे के साथ पुलों की संयुक्त जांच करेंगे और सर्वे के दौरान जांच कर ये निर्णय लेंगे की किस पुल से कितनी डांबर की परत निकालनी है। जिस समय डांबर की परत निकाली जाएगी उस समय ट्रैफिक की समस्या बढ़ जाएगी। अधिकारी ने बताया कि जल्द ही पुलों का सर्वे किया जाएगा और इस काम में काफी समय लगेगा। ऐसे में मई में काम शुरू हो पाना संभव नहीं है। मॉनसून के दौरान ही समय सारिणी बनाकर काम किया जाएगा। अधिकारी का कहना है कि हम मौसम विभाग से डाटा निकाल रहे हैं कि मॉनसून के समय कब अधिक बारिश होगी। उसी के आधार पर समय सारणी बनाई जाएगी, ताकि जिस दिन बारिश कम या फिर न होने की गुंजाइश रहे, उस दिन काम किया जा सके। अधिकारी का यह भी कहना है कि यदि मॉनसून के समय काम शुरू होता है तो करी रोड, भयखला, चिंचपोकली, घाटकोपर से गुजरनेवाले वाहनचालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही ट्रैफिक की समस्या भी बढ़ जाएगी।