रंग में आए योगी,  भ्रष्टाचार पर लगाम और विकास का नया आयाम छेड़ा

लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फिर से रंग में आ गए हैं। लोकसभा चुनाव में गठबंधन को करारी शिकस्त देने के बाद योगी को यूपी में फ्री हैंड कर दिया गया है। जिसका असर चंद दिनों में ही दिखने लगा है। इस बार मुख्यमंत्री सबसे पहले भ्रष्टाचार पर हमलावर हुए। एक आईएस केदारनाथ सिंह, तीन पीसीएस अधिकारियों अंजूलता कटियार, सुरेश यादव और सुनील कुमार चौधरी को भ्रष्टाचार के विभिन मामलों में निलंबित किया। जिसको लेकर राज्य पीसीएस संघ की त्योरी चढ़ी हुई है लेकिन योगी अपने निर्णयों को लेकर जरा भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने यूपी में विकास का नया आयाम छेड़ दिया है। लोकसेवा आयोग में एलटी ग्रेड के पेपर लीक होने के मामले की आई जांच रिपोर्ट के बाद परीक्षा नियंत्रक अंजूलता कटियार को जेल भेज दिया। उसके पहले आउट सोर्सिंग के जरिए हुई भर्तियों में हुई गड़बड़ी के लिए राजस्व परिषद में तैनात रहे पीसीएस अधिकारी सुनील कुमार चौधरी और यूपी लघु उद्योग निगम के एमडी केदारनाथ सिंह (आईएस) को निलंबित किया। सपा सरकार में पशुपालन विभाग के भर्ती घोटाले में पशुपालन विभाग के डायरेक्टर चरण सिंह यादव सहित आधा दर्जन बड़े अफसरों को निलंबित कर दिया गया है। उधर मुख्यमंत्री के आदेश पर जांच कर रही एसआईटी ने भर्ती घोटाले के खेल को उजागर किया तो तत्काल योगी ने पशुपालन विभाग में भर्ती घोटाले में की गई गड़बड़ी के लिए अपर निदेशक अशोक कुमार सिंह, बस्ती के अपर निदेशक जीसी द्विवेदी, लखनऊ मंडल के अपर निदेशक डॉक्टर हरिपाल और बरेली मंडल के अपर निदेशक एपी सिंह, अयोध्या अपर निदेशक अनूप श्रीवास्तव निलंबित कर दिया। मुख्य सचिव अनूपचंद पांडेय और यूपीडा के एमडी अवनीश अवस्थी को भेजकर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण की तैयारी के पूर्व न सिर्फ निरीक्षण करवाया बल्कि उसी दिन दोनों अधिकारियों से यह भी घोषणा करवा दिए कि अगस्त २०२० में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे तैयार हो जाएगा। चुनाव बाद से पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों, संगठन के पदाधिकारियों से मिलने के बाद गुरुवार को पार्टी के विधायकों के साथ लंबी बैठक की। सूत्रों की मानें तो इसके बाद आईएस,आईपीएस और पीसीएस अफसरों से औपचारिक भेंट करने के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमें की वोवरहालिंग करेंगे। योगी ने भ्रष्टाचार पर प्रहार के साथ ही विकास पर भी सजग हुए। उन्होंने विभागों और मंत्रियों के काम-काज की समीक्षा भी प्रारंभ कर दी है। समझा जाता है इसके बाद यूपी मंत्रिमंडल का जो गठन होगा वह प्रधानमंत्री के २०२२ संकल्पों को पूरा करने के लिए जुट जाएगा।
यही नहीं योगी कभी सत्ता की कथित सेकुलर विवशताओं से संधि नहीं किये। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर का अयोध्या में दीपावली का भव्य आयोजन किया। वहाँ के संतों के लगातार संपर्क में रहे। अकबर के कार्यकाल से छीना प्रयागराज को पुनः वह नाम दिला कर गौरवान्वित किया। महाकुंभ का भव्य आयोजन कराया जिसकी सार्वजनिक प्रसंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किया।
शुक्रवार को अयोध्या में मुख्यमंत्री भगवान श्रीराम की प्रतिमा का अनावरण करंगे। ये प्रतिमा कर्नाटक से लाकर अयोध्या में स्थापित की जा रही है। उसके बाद श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव में शामिल होंगे।