" /> यूरोप से अच्छे हैं हिंदुस्थान के नतीजे …पावरफुल है प्रतिरोध!… वायरस की मारक क्षमता हो जाती है कम

यूरोप से अच्छे हैं हिंदुस्थान के नतीजे …पावरफुल है प्रतिरोध!… वायरस की मारक क्षमता हो जाती है कम

गंदगी किसे पसंद है? कोई भी नहीं चाहता कि उसके आसपास गंदगी हो। मगर यूरोप व अमेरिका की तुलना में हिंदुस्थान के शहरों में गंदगी का अंबार दिख जाएगा। मगर कोरोना काल में एक स्टडी को देखें तो नतीजे यही बताते हैं कि ‘गंदगी अच्छी है!’
असल में गंदगी और कम गुणवत्ता वाले पानी की वजह से जिन देशों में हाइजीन का लेवल खराब है, वहां कोविड-१९ से मौत का खतरा भी साफ-सुथरे देशों की तुलना में कम है। ‘सीएसआईआर’ (सेंटर फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) ने अपनी एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार हिंदुस्थान को गंदगी से जोड़कर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। ट्रंप के उस बयान को अगर इस हालिया रिपोर्ट के संदर्भ में देखा जाए तो हिंदुस्थान कोविड-१९ के खिलाफ ज्यादा मजबूती से जंग कर सकता है। ‘सीएसआईआर’ की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ‘लो और लो-मिडिल इनकम’ वाले देशों पर हाई पैरासाइट और बैक्टीरिया से पैâलने वाली बीमारियों का बोझ ज्यादा होता है। इसीलिए लोगों के बीच पैâलने वाले रोगों का अनुभव उनकी इम्यून ट्रेनिंग का हिस्सा बन जाता है। ऑटोइम्यून डिसॉर्डर की समस्या हाई जीडीपी वाले देशों यानी विकसित देशों में ज्यादा देखने को मिली है। इन देशों में मृत्यु दर की उछाल का ये एक बड़ा कारण है सकता है। जबकि हिंदुस्थान में इसके विपरीत परिणाम देखने को मिले हैं। हिंदुस्थान के जिन राज्यों या शहरों का इतिहास किसी इंफेक्शन से जुड़ा रहा है, वहां कोविड-१९ से कम मौतें हुई हैं ‘सीएसआईआर’ के डायरेक्टर जनरल और इस स्टडी के प्रमुख लेखक शेखर मांडे ने कहा, ‘हमने २५ मापदंडों का विश्लेषण किया है। ये बड़ा विरोधाभासी है कि हाई जीडीपी वाले देशों में कोविड-१९ से लोग ज्यादा मर रहे हैं। उनके पास नॉन-कॉम्यूनिकेबल डिसीज ज्यादा हैं, जो कि कोविड-१९ से मौतों का बड़ा कारक है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमने सैनिटाइजेशन के लेवल की भी जांच की है। हिंदुस्थान में हाइजीन हाइपोथिसिस है। यानी अगर आपके शरीर को बचपन से ही रोगजनक वायरस से लड़ने की आदत है तो आप इस बीमारी को अच्छे से डील कर पाएंगे। कम हाइजीन का मतलब ज्यादा इंफेक्शन का खतरा और इससे लड़ने के लिए आपकी इम्यून सिस्टम बेहतर ट्रेंड होता है। अगर इम्यून इससे लड़ने में सक्षम नहीं है तो वायरस का अटैक इंसान को गंभीर स्थिति में ले जाएगा।’ उदाहरण के तौर पर, बिहार सोशियो-इकोनॉमी के पैमाने पर हिंदुस्थान का एक गरीब राज्य है। लेकिन कोविड-१९ से यहां मौत का खतरा सिर्फ ०.५ प्रतिशत है जो कि देश की मृत्यु दर से बहुत कम है। बिहार के अलावा, केरल और असम (०.४), तेलंगाना (०.५), झारखंड और छत्तीसगढ़ (०.९) में भी कोविड-१९ का डेथ रेट कम देखा गया है।