" /> आराम अब हराम है!- नुसरत भरूचा

आराम अब हराम है!- नुसरत भरूचा

सन २००६ में फिल्म ‘जय संतोषी मां’ से डेब्यू करनेवाली नुसरत भरूचा की दूसरी फिल्म थी ‘कल किसने देखा’। इन दोनों ही फिल्मों को असफलता का मुंह देखना पड़ा। इन फिल्मों के फ्लॉप होने से लगने लगा था कि कहीं नुसरत के करियर को फुल स्टॉप न लग जाए। लेकिन ये आशंका गलत साबित हुई और फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ की तीनों प्रâेंचाइजी सफल रही। फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने नुसरत को जहां स्टारडम दिलाया, वहीं १३ नवंबर को रिलीज हुई नुसरत और राजकुमार राव अभिनीत फिल्म ‘छलांग’ दर्शकों को लुभा रही है। पेश है, नुसरत भरूचा से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

फिल्म ‘छलांग’ को स्वीकारने की कोई खास वजह?
फिल्म ‘छलांग’ के ३ निर्माता हैं और ये एक बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्म है। इस फिल्म को हंसल मेहता ने निर्देशित किया है। सबसे अहम बात फिल्म की कहानी और मेरा डिफरेंट किरदार है। इन सभी कारणों से मैंने फिल्म ‘छलांग’ के लिए छलांग लगा दी।
स्कूल के पीटी टीचर की कहानी में आपके लिए क्या स्कोप होगा?
मुझे हंसल जी ने जब कहानी का नैरेशन दिया तो लगा गुदगुदानेवाली कहानी है, जिसमें अंडर करंट मैसेज है कि हमारे देश के स्कूलों में पीटी विषय को इग्नोर किया जाता है। खेलकूद और फिटनेस को कोई तवज्जो न देने की भारतीय मानसिकता बहुत पहले से रही है, जिसका खामियाजा हम भुगत रहे हैं। खैर, स्पोर्ट्स को कभी भी कम आंकने की जरूरत नहीं। पीटी टीचर (राजकुमार राव) और उसकी प्रेमिका (नुसरत-नीलिमा) की रोमांचक कहानी तथा मेरा किरदार मेरी जिंदगी बदल देगा, ऐसा हंसल सर ने मुझे बताया।
क्या आपको ‘छलांग’ के लिए हरियाणवी भाषा सीखनी पड़ी?
फिल्म ‘छलांग’ कई मायनों में मेरे लिए बहुत अलग है। फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ से मुझे कामयाबी मिली और मैंने स्टारडम की सीढियां पहली बार चढ़ी। इस फिल्म में मेरा किरदार नेगेटिव था लेकिन ‘छलांग’ में मेरा किरदार पॉजिटिव है। ‘छलांग’ में मेरा किरदार कम्प्यूटर टीचर नीलिमा का है। अब जब फिल्म में किरदार हरियाणवी है तो मैंने इस हरियाणवी किरदार को निभाने के लिए एक टीचर से बाकायदा हरियाणवी भाषा सीखी।
राजकुमार राव के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
राजकुमार राव और मैंने अपना अपना करियर लगभग एक साथ यानी आज से १० वर्ष पूर्व शुरू किया था। दिबाकर बैनर्जी निर्देशित फिल्म ‘लव सेक्स धोखा’ हमने साथ की थी। फिल्म ‘छलांग’ हमारी री-यूनियन फिल्म है। राजकुमार इतने संजीदा एक्टर हैं कि जिस निर्देशक के साथ वे काम करते हैं, उसके चहेता बन जाते हैं। राजकुमार की मैं क्या प्रशंसा करूं? वो बहुत ही नेचुरल एक्टर हैं बिल्कुल पानी की तरह, जिसमें मिला दो लगे उस जैसा।
क्या स्कूली दिनों में आपको खेलकूद और पीटी का पीरियड अच्छा लगता था?
खेलकूद अच्छा नहीं, बहुत अच्छा लगता था। पीटी इसीलिए अच्छा लगता था क्योंकि ४५ मिनट पढ़ाई करने से मुक्ति मिलती थी और ये सबसे बड़ा फायदा था।
स्कूली दिनों में आपके पसंदीदा टीचर कौन थे?
मेरी नानी बहुत प्रोग्रेसिव थीं। सबसे पहले मैंने अपनी जिंदगी के पाठ अपनी नानी से पढ़े। मेरी नानी १९४५-५० में जब हनीमून के लिए वर्ल्ड टूर पर गई थीं तब उन्होंने वहां फॉरेनर्स को साड़ी कैसे पहनी जाती है सिखाया। बोहरा मुस्लिम होने के बावजूद मेरी बुआ हमारे परिवार की पहली ऐसी लड़की थीं, जिन्होंने एक हिंदू लड़के से शादी कर एक सुखी पारिवारिक जीवन बिताया। मेरी बुआ और फूफा की प्रेम कहानी भी बेहद दिलचस्प है। मेरे परिवार की ये दोनों महिलाएं मेरी टीचर और मार्गदर्शक हैं। सबसे पहले इन्हीं दोनों से मैंने जिंदगी हंसी और खुशी से कैसे बिताई जाती है, ये सीखा। मेरे मॉम और डैड तो मेरे पथ-प्रदर्शक हैं ही। हां, स्कूल टीचर इनके बाद मेरे आदर्श बने।
क्या आपने नया घर खरीदा है?
मेरे पैरेंट्स का घर जुहू में है और वहां से ५ मिनट की दूरी पर मैंने अपना खुद का नया फ्लैट खरीदा। खुद के कमाए पैसों से अपना घर लेने की खुशियां बेशुमार होती हैं, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इस साल की मेरी ये दिवाली बहुत स्पेशल होगी। अपने ३ बेडरूम वाले फ्लैट में इस साल हम सब दिवाली मनाएंगे।
लॉकडाउन के दिनों में आपने अपना वक्त कैसे गुजारा?
लॉकडाउन में मैंने बहुत आराम किया और नींद का कोटा पूरा किया। अब दिवाली में मैं अपनी अगली फिल्म ‘हुड़दंग’ की शूटिंग करूंगी और निर्देशक राज शांडिल्य की अगली फिल्म शुरू कर दूंगी। आराम अब हराम है मेरे लिए।