दो रुपए बढ़ सकता है ऑटो-टैक्सी का किराया

काली-पीली टैक्सी या फिर ऑटोरिक्शा में यदि आप रोजाना सफर करते हैं तो आप की जेब ढीली हो सकती है। जुलाई महीना आपके किराए का खर्च बढ़ा सकता है। दरअसल, काफी समय से ऑटो और टैक्सी युनियनों की किराया वृद्धि की डिमांड को देखते हुए सरकार ऑटो और टैक्सी के किराए में कम-से-कम दो रुपए की वृद्धि कर सकती है। किराया वृद्धि पर राज्य यातायात विभाग अपना अंतिम निर्णय लेगा।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक सरकार ऑटो और टैक्सी के किराए में कुछ शर्तों के साथ वृद्धि करने की योजना बना रही है। किराया वृद्धि पर एमएमआरडीए अपना अंतिम निर्णय लेगा। ऑटोरिक्शा का न्यूनतम किराया १८ रुपए से बढ़कर २० रुपए और टैक्सी का न्यूनतम किराया २२ रुपए से बढ़कर २४ रुपए हो सकता है, ऐसी जानकारी सूत्रों से मिली है। जबकि ऑटो यूनियन ६ रुपए किराया और टैक्सी युनियन ३ रुपए किराया वृद्धि की मांग कर रही है। वहीं किराया वृद्धि पर ‘मुंबई ग्राहक पंचायत’ के श्रीश देशपांडे का कहना है कि जनता किराया वृद्धि के विरोध में है। किराया वृद्धि हुई तो यात्री बस से सफर करना उचित समझेंगे। भले ही उन्हें बस का इंतजार ही क्यों न करना पड़े।
ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार किराए पर एक नई संकल्पना लेकर आ रही है। सरकार टेलीस्कोपी किराया सिस्टम ऑटो और टैक्सी के लिए लाने जा रही है। इसमें ऐसा होगा कि लंबी दूरी का सफर तय करने पर किराया कम लगेगा। देशपांडे का कहना है कि खटुआ कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में टेलीस्कोपी किराया सिस्टम का जो सुझाव रखा था वो आइडिया काबिलेतारीफ है। इससे लंबी दूरी का सफर करनेवाले यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई यात्री ८ से १२ किमी लंबा सफर तय करता है तो उसके कुल किराए में १५ प्रतिशत किराया कम लगेगा, वहीं १२ किमी से अधिक की दूरी तय करने पर २० प्रतिशत किराए में छूट मिलेगी। सरकार की योजना ‘हैप्पी ऑवर्स’ सिस्टम भी शुरू करने की है। इस योजना के अंतर्गत दोपहर १२ बजे से ४ बजे तक सफर करनेवाले यात्रियों को १५ प्रतिशत तक किराए में छूट मिलेगी। हालांकि ‘मुंबई टैक्सीमेंस यूनियन’ सरकार की इस योजना का विरोध कर रही है। ‘टैक्सीमेंस यूनियन’ के अध्यक्ष ए.एल. क्वाड्रोस का कहना है कि १५ हजार टैक्सी चालक वरिष्ठ नागरिक हैं, जो अपनी टैक्सी परमिट दूसरे को देकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। यदि ये नियम लागू हो जाएगा तो कोई टैक्सी परमिट नहीं लेगा, ऐसे में भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।