रॉकेट उड़ेगा चंद्रमा के पानी से!

पिछले कुछ दशकों की सबसे बड़ी खोजों में से एक है चंद्रमा पर पानी की खोज। चंद्रमा का पानी ग्रेनाइट से भी सख्त है। यह दरअसल जमा हुआ ठोस बर्फ है। ऐसे में चंद्रमा पर पानी निकालना वैसा ही है, जैसे खदान से पत्थर खोदना। हनी बी रोबोटिक्स जैसी कंपनियां हैं, जिन्होंने ड्रिल्स तैयार किए हैं क्योंकि चंद्रमा पर मौजूद पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विघटित करके रॉकेट फ्यूल तैयार किया जा सकता है।
अंतरिक्ष युग की शुरुआत से अब तक केवल तीन देशों ने चांद पर अपना अंतरिक्ष यान उतारा है- अमेरिका, सोवियत संघ और चीन। अब २०१९ में पहली बार एक निजी टेक्नोलॉजी कंपनी ने इस सूची में शामिल होने का प्रयास किया है। सोमवार २२ अप्रैल की रात १० बजे शुरू हो रहा है, एक घंटे का डिस्कवरी एक्सक्लूसिव स्पेशल शो ‘रिटर्न टू द मून, सेकेंड्स टू अराइवल’, जिसमें डिस्कवरी चैनल, स्पेस-आईएल के एक मिशन में शामिल पुरुष और महिलाओं की यात्रा दिखाएगा, जिसमें वे चांद की सतह पर पहली बार निजी वित्तीय सहायता प्राप्त अंतरिक्ष यान उतारेंगे। डिस्कवरी चैनल के अलावा इस शो का प्रसारण एक ही समय पर डिस्कवरी एचडी वर्ल्ड, डिस्कवरी साइंस और डिस्कवरी तमिल चैनल पर किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक स्पेस-आईएल तीन युवा इजराइली इंजीनियरों ने शुरू किया था जिनके नाम है- यारिव बैश, केफिर दमारी और योनाटैन वाइनट्रॉब। यह इंटरनेशनल गूगल लूनार एक्स-प्राइज में शामिल होनेवाली संस्थाओं में से एक है, जिसने वैज्ञानिकों को चुनौती दी थी कि वे चांद पर भेजने के लिए एक मानवरहित अंतरिक्ष यान बनाएं, इसे लॉन्च करें और इसे चांद की सतह पर उतारें। २०१७ में इजराइल की एकमात्र प्रतिनिधि कंपनी स्पेस-आईएल, पहले ५ फाइनलिस्ट में शामिल हो गया लेकिन २०१८ में गूगल ने विजेता के नाम की घोषणा किए बिना ही यह कॉन्टेस्ट बंद कर दिया था। हालांकि इस घटना से हौसला न हारते हुए स्पेस आईएल, लोगों की मदद और निजी वित्तीय सहायता के जरिए संघर्ष करती रही।
चंद्रमा पर उतरने का उनका प्रयास दरअसल स्पेस आईएल और इजराइल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के ८ साल के संयुक्त प्रयास का परिणाम था। यह यान चांद पर उतरनेवाला सबसे छोटा अंतरिक्ष यान बन सकता था। इस यान को स्पेस-एक्स फाल्कन ९ रॉकेट के सेकेंडरी पेलोड के रूप में २ महीने के अभियान पर केप कैनेवरल, फ्लोरिडा से लॉन्च किया गया था।