" /> तंबू से बाहर निकले रामलला! अयोध्या में फिर अवतार लेंगे कुबेर

तंबू से बाहर निकले रामलला! अयोध्या में फिर अवतार लेंगे कुबेर

अयोध्या में श्री रामलला के नाम से अब बैंक में खाता खुलेगा। दानदाता उसमें खुलेहाथों से पैसा जमा करेंगे। २४ तारीख को तंबू से रामलला का स्थलांतर दूसरी जगह पर होगा। परिसर में इतने वर्षों तक अंधेरे में रहे ईश्वर का भी स्थलांतर होगा। इससे सभी का वनवास खत्म होगा। उद्धव ठाकरे ने प्रारंभ में ही एक करोड़ रुपए दिए। कुबेर फिर अयोध्या में अवतार लेंगे, ऐसा दृश्य दिखाई दे रहा है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अयोध्या गए। वहां उन्होंने तंबू में विराजमान श्रीराम के दर्शन किए। दर्शन करते समय उद्धव ठाकरे बोले, ‘यहां बार-बार आया जाए, ऐसा लगता है। यहां आने से एक अलग तरह की ऊर्जा मिलती है।’ यह मेरा मत है। अयोध्या में जब-जब शिवसेना ने कदम रखा तब-तब शिवसेना आगे ही बढ़ी। इस सत्य को नकारा नहीं जा सकता है। श्री ठाकरे इससे पहले दो बार किसी पद के बगैर वहां गए। अब मुख्यमंत्री बनकर अयोध्या पहुंचे, तब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें प्रभु श्रीराम की धरती पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इस ऐतिहासिक क्षण के अनुभव का मौका मिला और खुद उद्धव ठाकरे भाव-विभोर हो गए, मैंने देखा। बालासाहेब ठाकरे ने अयोध्या आंदोलन का नेतृत्व किया। बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी बनकर वे लखनऊ की सीबीआई अदालत गए, वो एक देवदुर्लभ समारोह था। पूरा लखनऊ शहर मानो उनके स्वागत के लिए सड़क पर उतर गया। उन्हीं शिवसेनाप्रमुख के सुपुत्र को उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या की धरती पर मानवंदना दी।
मंदिर बन रहा है!
अयोध्या में अब राम मंदिर बन रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा आदेश दिया है। न्यायालय के निर्देशानुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना हो गई है और रामलला के मंदिर के लिए एक बैंक खाता अब अयोध्या के स्टेट बैंक में खुल गया है। श्री उद्धव ठाकरे ने वहां दो प्रमुख घोषणाएं की। राम मंदिर के लिए एक करोड़ रुपए उन्होंने घोषित किए। ये रकम सरकारी तिजोरी से नहीं दी जाएगी, ये व्यक्तिगत स्वरूप में होगी। दूसरी घोषणा मतलब अयोध्या में महाराष्ट्र निवास का निर्माण करने की। महाराष्ट्र से सैकड़ों लोग अयोध्या आते-जाते रहते हैं। इस माध्यम से उनको सुविधा मिलेगी। महाराष्ट्र निवास के लिए ‘ठाकरे सरकार’ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से नियमानुसार एक भूखंड की मांग करेगी और वहां महाराष्ट्र की इमारत खड़ी होगी। दोनों घोषणाएं इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। अयोध्या पर महाराष्ट्र की छाप इस दौरे के माध्यम से फिर पड़ी। श्रीराम वनवास में रहते हुए नासिक आए, वहां पंचवटी खड़ी हुई। विदर्भ स्थित ‘रामटेक’ राम का ही स्थान है। महाराष्ट्र का एक नाता अयोध्या से हमेशा रहा। पहले बालासाहेब ठाकरे और अब उद्धव ठाकरे ने इसे अधिक मजबूत किया।
वनवासी भगवान
अयोध्या में राम मंदिर के रूप में जो भाग फिलहाल है वो एक कपड़े का तंबू है। फिलहाल इसी तंबू में श्री रामलला विराजित हैं और १०० फुट की दूरी से उनका दर्शन करना पड़ता है। संपूर्ण परिसर की अवस्था मानो तिहाड़ जेल जैसी हो गई है। कई अवरोधों को पार करके तंबू में विराजित राम के दर्शन के लिए पहुंचना पड़ता है। ये संपूर्ण हालात आगामी २४ मार्च के बाद बदल जाएंगे। मंदिर बनाने की प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है। चैत्र नवरात्रि से एक दिन पहले २४ मार्च को तंबू से रामलला को बाहर निकाला जाएगा और नई जगह पर विराजित किया जाएगा। इसके लिए एक फाइबर के मंदिर का निर्माण किया गया है। लगभग ३० वर्षों बाद भगवान राम तंबू से बाहर निकलेंगे। इससे पहले वे मस्जिद के गर्भगृह में थे। राम मंदिर के आसपास असंख्य मंदिर, पुरानी गिरी हुई दीवारें अपने-अपने देवी-देवताओं को संजोए खड़ी हैं। अंदर निश्चिततौर पर कौन से भगवान हैं, ये बहुधा अयोध्यावासियों को भी पता नहीं होगा। इन बंद मंदिरों के देवताओं की प्रतिमाओं का भी अब स्थलांतर होगा और उनकी अलग से प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस तरह बंद मंदिरों में विराजित मूर्तियों का वनवास खत्म होगा। अयोध्या स्थित ज्यादातर मंदिर और मठ जर्जर हो चुके हैं। गढ़ और महलों की रौनक चली गई है इसलिए सिर्फ राम मंदिर का ही नहीं बल्कि संपूर्ण अयोध्या का जीर्णोद्धार इस माध्यम से होना चाहिए। मानस भवन, शेषावतार, साक्षी गोपाल, सीता रसोई, आनंद भवन, राम खजाना तथा विश्वामित्र आश्रम ऐसे कई मंदिरों की दशा खराब है।
नया राम दरबार
२४ तारीख को तंबू से श्रीराम विधिवत बाहर निकलेंगे। राम मंदिर का काम उसके बाद शुरू होगा। राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने संभावित दो मंजिला मंदिर का भव्य नक्शा सामने लाया है, जो कि नयनाभिरम्य है। तल मंजिल पर प्रत्यक्ष रामलला विराजमान होंगे तो पहली मंजिल पर ‘राम दरबार’ का दर्शन होगा। काम की शुरुआत होने से राम मंदिर ढाई वर्षों में तैयार किया जाएगा। मंदिर की शिला तैयार करने का कार्य वर्ष १९५१ से ही अयोध्या के रामघाट पर शुरू है। वहां कार्यशाला में एक लाख घनफुट पत्थरों को ‘तराशने’ का कार्य पूरा हो चुका है। दो मंजिला मंदिर के लिए अभी भी ७५ हजार घनफुट ‘पत्थर’ तराशे जाने हैं। राम मंदिर भूमि पर प्रस्तावित मंदिर २६८ फुट लंबा, १४० फुट चौड़ा और १२८ फुट ऊंचा होगा। मंदिर का पहला चबूतरा ८ फुट ऊंचा होगा। वहां तक उन्नत सीढ़ियों से पहुंचा जा सकेगा। उस पर मंदिर का १० फुट लंबा परिक्रमा मार्ग होगा। अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्य मंडप, रंग मंडप और गर्भगृह के रूप में मंदिर के प्रमुख पांच भाग होंगे। मंदिर में २१२ खंभे होंगे। खंभे १६ फुट के होंगे। जिस कक्ष में रामलला विराजमान होंगे उस पर १६ फुट ५ इंच का दूसरा गर्भगृह होगा। उसमें भगवान श्रीराम राजा के स्वरूप में चार भाई, सीता माता और हनुमान जी के साथ विराजमान होंगे। इस भव्य मंदिर का निर्माण कार्य निश्चिततौर पर कौन करेगा? कई बड़ी कंपनियां अपना तकनीकी ज्ञान लेकर आगे आई हैं, उनमें लार्सन एंड टुब्रो कंपनी सबसे आगे है। कंपनी राम मंदिर निर्माण के ठेकेदार की हैसियत से काम नहीं करेगी, बल्कि सेवाभाव के रूप में मंदिर का काम करेगी। ये सब अब अयोध्या में शुरू हो गया है। २४ मार्च को प्रभु श्रीराम नई जगह पर जाएंगे। नए मंदिर का काम इसके बाद शुरू होगा।
ऐसे आएंगे पैसे…
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण के लिए तैयार हुआ है। एक समय के नौकरशाह नृपेन मिश्र इसके अध्यक्ष हैं। मंदिर के लिए दुनियाभर से लोग दान देंगे। यह व्यवहार पारदर्शी हो इसके लिए ट्रस्ट ने काम शुरू किया है। खुद उद्धव ठाकरे ने अयोध्या दौरे पर एक करोड़ रुपए की निधि घोषित की। ऐसे करोड़ों रुपए इसके आगे जमा होंगे। अयोध्या स्थित स्टेट बैंक में ट्रस्ट का खाता खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बैंक में विदेशी मुद्रा खाता भी खोला जाएगा। खाता खोलते ही वो इंटरनेट बैंकिंग सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। इससे देश-विदेश से कोई भी भक्त अपना दान इस खाते में जमा कर सकेगा। अगले मंगलवार तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का खाता खोला जाएगा। तब तक रामलला को पैन नंबर मिलेगा। दान देनेवालों को हाईटेक फीचर्सवाली रसीद दी जाएगी। राम मंदिर के लिए पैसा कम नहीं पड़ेगा, ये निश्चित है। दुनियाभर के पर्यटक आगरा स्थित ताजमहल देखने के लिए आते हैं। उसी तरह अयोध्या में राम मंदिर देखने के लिए आएं इस तरह से इस राम मंदिर की भव्य इमारत बेहतरीन उदाहरण के रूप में बने। इस कार्य के लिए पैसा कम नहीं पड़ेगा, ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि अयोध्या नगरी में धन के राजा कुबेर का भी चरण स्पर्श हो गया है। ७० एकड़ जमीन प्रस्तावित मंदिर के लिए अधिग्रहित की जाएगी। वहीं राम मंदिर बनेगा। इसी क्षेत्र में विवेचनी सभा द्वारा स्थापित किया गया ‘कुबेर टीला’ नामक शिलालेख है। अयोध्या का इतिहास स्पष्ट करनेवाले रुद्रयामल ग्रंथ के अनुसार युगों पहले यहां धन के देवता कुबेर का आगमन हुआ था। कुबेर ने ही राम जन्मभूमि के पास ऊंची पहाड़ी पर भोले बाबा के लिंग की स्थापना की थी। बाद में वहां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और कुबेर सहित लगभग ९ देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हुर्इं। अब इस स्थल को ‘नवरत्न’ परिसर कहा जाता है। इन सभी नवरत्नों का अब जीर्णोद्धार होगा। रामलला के लिए बैंक का खाता अयोध्या में खुल गया। इस खाते में पैसे की गंगा बहे। कारसेवकों के रक्त से सरयू लाल हो गई थी। वो दिन हर किसी को याद आए और उनका स्मरण हो, ऐसी कोई ‘शिला’ राम मंदिर में खड़ी हो तो अच्छा होगा। नहीं तो स्वतंत्रता के लिए कोई योगदान न देनेवाले जैसे बाद में स्वतंत्रता सेनानी बन गए और वास्तविक योद्धा हमेशा अंधेरे में रहे वैसा ही होगा। लड़ा कौन और बैठा कौन, हमेशा की तरह ऐसी राजनीति राम मंदिर निर्माण में तो न हो।