" /> दिल्ली में कोरोना; प्रदूषण का कहर…महाराष्ट्र के नेताओं, …राजनीति बंद करो!

दिल्ली में कोरोना; प्रदूषण का कहर…महाराष्ट्र के नेताओं, …राजनीति बंद करो!

राजधानी दिल्ली में फिलहाल प्रदूषण और कोरोना की ही लहर है। श्री अमित शाह कोरोना से उबर गए हैं। कांग्रेस के नेता अहमद पटेल गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में कोरोना से जूझ रहे हैं। राजधानी में कोरोना बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के भाजपाई नेता कोरोना पर राजनीति कर रहे हैं। उन्हें दिल्ली आकर हालत की गंभीरता को समझ लेना चाहिए।

दिल्ली में ठंड और प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण का स्तर गिरने से कई बीमारियां भूतों के तरह नाचती नजर आ रही हैं। यह शैतानियत जानलेवा है। दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर आई है। परंतु यह तीसरी लहर है ऐसा जानकार कहते हैं। बुधवार को मैं दिल्ली में था, उस दौरान उन २४ घंटों में कोरोना के विस्फोट को मैंने देखा। एक दिन में सामान्यत: साढ़े सात हजार कोरोना मरीज मिले। उन २४ घंटों में १५० मतलब सर्वाधिक मौतें हुर्इं। यह सब हुआ क्योंकि दिल्ली सरकार ने सब कुछ खोलने की जल्दबाजी की। उस अति आत्मविश्वास के कारण यह संकट बढ़ा। राजधानी में कोरोना संक्रमण बढ़ने के दौरान सरकार क्या कर रही थी? जिन्होंने अपने परिजनों को इन १० दिनों में गंवाया है, उन्हें सरकार क्या जवाब देगी? ऐसा सवाल अब दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से पूछा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल विगत २ महीनों से कोरोना से जूझ रहे हैं। उनका हाल जानने के लिए दिल्ली के मेदांता अस्पताल में गया था। श्री पटेल आईसीयू में भर्ती हैं। उनके परिजनों के चेहरों पर तनाव मुझे साफ महसूस हुआ। कोरोना किसी को भी छोड़ता नहीं है व तुम कितने भी बड़े होगे लेकिन कोई भी शक्ति तुम्हें बचाती नहीं है। दिल्ली में एक बार फिर ‘लॉकडाउन’ की तैयारी चल रही है। बाजार, दुकानें, सार्वजनिक स्थल, प्रार्थना स्थल पुन: बंद किए जाएंगे। यह क्यों हुआ, इसका विचार महाराष्ट्र के भाजपाई नेताओं को करना चाहिए।
विरोध किसलिए?
महाराष्ट्र के भाजपाई नेता फिलहाल जो भूमिका अपना रहे हैं। वह विरोध के लिए विरोध करने की है। पांच साल तक जिन्होंने राज्य की निरंकुश सत्ता भोगी उन्हें कम-से-कम नीति-नियमों का भान रखना चाहिए। मुंबई में छठ पूजा की अनुमति दी जाए, ऐसी मांग को लेकर भाजपावाले आंदोलन कर रहे थे। बिहार का चुनाव भाजपा ने जीत लिया है, यह सत्य है। परंतु मुंबई की बिहारी जनता को छठ पूजा के विवाद में खींचने की वजह नहीं थी। छठ पूजा के लिए समुद्र तट पर एक समय में हजारों लोग इकट्ठा होते और कोरोना के संकट काल में यह नियम के बाहर की बात है। छठ पूजा २० नवंबर को संपन्न हुई परंतु भीड़ एकत्रित करके गड़बड़ी पैâलाने का प्रयास विरोधियों का था ही। मुंबई में जिन्होंने छठ पूजा के लिए आंदोलन किया उन्हें अन्य राज्यों में क्या हुआ, यह देखना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा की अनुमति देने पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने ही रोक लगा दी। दिल्ली के यमुना घाट पर छठ पूजा की अनुमति मिले और कम-से-कम एक हजार लोगों को वहां एकत्रित होने की अनुमति दी जाए, ऐसी याचिका जनसेवा ट्रस्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मांग को कचरे की टोकरी में फेंक दिया। न्यायालय ने याचिका करनेवालों को फटकार लगाई, ‘कोविड-१९’ की स्थिति कितनी गंभीर है, इसका भान रखो। दिल्ली सरकार ने विवाह समारोह में ५० से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर रोक लगाई है। यह उचित है और तुम छठ पूजा के लिए १ हजार लोगों की अनुमति मांग रहे हो। यह संभव नहीं है।’ ऐसी दिल्ली उच्च न्यायालय की फटकार है। भारतीय जनता पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी है। किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी भूमिका राष्ट्रीय होनी चाहिए परंतु ऐसा होता दिख नहीं रहा है। छठ पूजा प्रमुख रूप से बिहार तथा उत्तर में की जाती है। मुंबई में यह प्रथा वैसे हाल ही में आई। मुंबई में छठ पूजा को सार्वजनिक जगहों पर अनुमति दी जाए, ऐसी मांग भाजपा के नेता करते हैं परंतु गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने छठ पूजा की अनुमति नकार दी। यह महाराष्ट्र के भाजपाई नेता वैâसे भूल जाते हैं? बिहार के लगभग सभी जिलों में वहां के प्रशासन ने आदेश जारी किया कि छठ पूजा घर के अंदर ही करें। सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बंदी लगाई ही थी, साथ ही नदी के घाटों पर पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। इसके माध्यम से सड़कों पर वाहनों की भीड़ न लगे इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए गए थे। यह सब करने के दौरान भाजपा हिंदू विरोधी नहीं ठहराई जाती परंतु महाराष्ट्र में भाजपा की भूमिका अलग है।
मुंबई के भाजपाई नेता जुहू चौपटी पर अनुमति मांग रहे थे तो किस आधार पर? मुंबई में पुन: कोरोना बढ़ाकर सरकार को बदनाम करने की राजनीति इसके पीछे है। परंतु इसमें लोगों की जान जाती है इसका भान नहीं रखा जाता है। यह क्रूरता और अमानवीयता है। सरकार के कुछ निर्णय मतभेद का मुद्दा बन सकते हैं। परंतु हर निर्णय का विरोध ही करना चाहिए, भले ही इसकी वजह से लोगों की जान ही चले जाए तो भी हर्ज नहीं है। यह नीति घातक है!
मंदिरों की राजनीति
महाराष्ट्र में मंदिर खोले जाएं इसके लिए जो हंगामा किया गया, वह राजनैतिक था। मंदिर खोलने का निर्णय नहीं ले रही है, इस वजह से ‘ठाकरे सरकार’ के हिंदुत्व विरोधी होने का शोर मचाना सीधे-सीधे स्वांग था। हरियाणा में भाजपा की सरकार है। वहां स्कूल शुरू करने का निर्णय लिया गया परंतु ७२ घंटों में ५०० से ज्यादा विद्यार्थियों और शिक्षक कोरोना से संक्रमित हो गए। बिहार में विजय हासिल की इसलिए कोरोना पर भी विजय पाई जा सकती है, ऐसा किसी को लगता है क्या? कोरोना के खिलाफ लड़ाई से जो हिंदुत्ववाद का संबंध जोड़ते हैं वे जनता के शत्रु हैं। दिल्ली में एक बार फिर लॉकडाउन लगाने का विचार चल रहा है। महाराष्ट्र पर ऐसा वक्त न आए। भाजपा जैसी पार्टी की ऐसी इच्छा होगी तो यह राज्य का दुर्भाग्य है! फिर देश के प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री शाह इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। देश की राजधानी में कोरोना की लहर उफान मार रही है और वहां भाजपा की सरकार नहीं है इसलिए अक्षम्य अनदेखी की जाए, यह उचित नहीं है। गृहमंत्री अमित शाह को कोरोना का संक्रमण हुआ इसलिए वे गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती हुए वहां उन्हें राहत नहीं मिली इसलिए वे ‘एम्स’ में भर्ती हुए और वहां से ठीक होकर बाहर निकले। ‘एम्स’ जैसी चिकित्सीय, वैज्ञानिक संस्था की संस्थापना पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। पंडित नेहरू ने चिकित्सीय, वैज्ञानिक, औद्योगिक, शैक्षणिक ऐसी संस्था का निर्माण कराया। पंडित नेहरू के नाम पर बने दिल्ली के महाविद्यालय का नाम बदलने का प्रयास अब हो रहा है। यह सत्य होगा तो यह हास्यास्पद सिद्ध होगा। जिन संस्थाओं का निर्माण आपने नहीं किया है, उन संस्थाओं का नाम अपनी सुविधा के अनुसार बदलने में कौन-सा पुरुषार्थ है? नया बनाओ, नया तैयार करो उन नव निर्मितों को तुम जैसा चाहो वैसा नाम दो, यह देश सिर्फ पांच-छह सालों में निर्माण नहीं हुआ है, जो सरकार वीर सावरकर को भारत रत्न नहीं दे सकी वह जवाहरलाल नेहरू विद्यापीठ का नाम बदलने की सोच रही है।
वास्तविक संकट कैसा है?
बिहार जीत गए, अब प. बंगाल जीतना है, ऐसा भाजपा ने तय किया होगा तो यह उनकी समस्या है परंतु वास्तविक संकट कोरोना, गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर है। उस पर कब जीत हासिल करोगे? दिल्ली पर कोरोना ने हमला किया है। उसी दिल्ली में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी रहते हैं। उनकी आंखों के सामने लोगों की जान जा रही है। किसी राष्ट्रीय संदेश में स्वपक्षीय लोगों को कोरोना पर राजनीति बंद करो, प्रधानमंत्री ने इतना कह दिया तो बड़ी राष्ट्रसेवा होगी।
भारतीय जनता पार्टी देश की सत्ताधारी पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष आज किसी की चुनौती नहीं है। देश की राजधानी में किसी तरह की हलचल नहीं है। प्रदूषण और कोरोना से वह ग्रस्त है। जब कोई भी हवा नहीं होती है तब प्रकृति नई चुनौती लेकर खड़ी हो जाती है। उससे कहीं तो सामंजस्य रखना होता है। देश में फिलहाल तो ऐसा ही वातावरण दिख रहा है!