" /> बाढ़ में रस्सी का सहारा, बारिश में टापू बन जाता है वसई का यह गांव

बाढ़ में रस्सी का सहारा, बारिश में टापू बन जाता है वसई का यह गांव

बीते चार दिनों से मूसलाधार बारिश के कारण ग्रामीण इलाके में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। मूसलाधार बारिश ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। बड़ी संख्या में लोगों के न रहने का ठिकाना है और न खाने का। दूर-दराज के गांवों में लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। जो जहां फंसा है, वहीं स्थिर हो गया है। वसई तालुका में ऐसा ही एक गांव है मोरी, जो बारिश और बाढ़ के चलते टापू में तब्दील हो गया है। अब यह मोरी गांव बाढ़ में रस्सी के सहारे है। लोग रस्सी के सहारे ही उफनते नाले को पाार करके कहीं बाहर जाते-आते हैं।
मूसलाधार बारिश से गांव के पास की कामन नदी उफान पर रहती है। ऐसी हालत में मोरी गांव के लोग बाढ़ जैसी हालात के चलते रस्सियों का सहारा ले रहे हैं। गांव के लोग जरूरत का सामान लेने के लिए रस्सी के जरिए नाले को पार करते हैं। इस गांव में तकरीबन १५० लोगों की जान जोखिम में रहती है।
यह गांव हर साल बारिश के मौसम में नदी में उफान आने पर बाढ़ के पानी में घिर जाता है और टापू बन जाता है। हालांकि शासन-प्रशासन समय-समय पर इनकी मदद के लिए तैयार रहता है। मोरी गांव के निवासी हीरादेवी ने बताया कि वे पिछले १० वर्षों से इस गांव में रहती हैं। गांव में हर साल बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। गांव के लोगों को जरूरत के सामान के लिए इस रस्सी के सहारे जाना पड़ता है। दुबे चाल में रहनेवाली मनीषा मिश्रा ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए कोई आगे नहीं आया। अधिक बारिश के कारण गांव में बिजली के खंभे गिर जाते हैं, जिससे गांव में दो-तीन दिन तक बिजली गुल रहती है। इस दौरान घरों में सांप और बिच्छु जैसे कीड़े निकलते हैं। गुरुवार तड़के सुबह मूसलाधार बारिश हो रही थी। इलाके के रहनेवाले दीपक जायसवाल घर से बाहर निकले और पानी में डूब गए। हालांकि स्थानीय निवासी सौरव शुक्ला ने छलांग लगाकर जायसवाल की जान बचाई। अब लोगों को अपनी इस समस्या से निजात पाने का कोई उपाय नहीं दिख रहा। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर कब तक इन रस्सियों के सहारे बरसात के मौसम में उनकी जिंदगी की डोर चलती रहेगी? वालीव पुलिस थाने के थानाध्यक्ष विलास चौगुले ने बताया कि अभी स्थिति सामान्य है। किसी के हताहत होने की कोई जानकारी नहीं है।