रथयात्रा का मार्ग कौन-सा?

भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र में एक रथयात्रा का आयोजन कर रही है। मित्रदल को इस यात्रा के लिए हम शुभकामनाएं दे रहे हैं। उस रथ पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सवार होंगे, ऐसी जानकारी चंद्रकांत दादा पाटील ने दी है। रथयात्रा का आयोजन और प्रयोजन इसलिए है ताकि जनता यह जान सके कि गत साढ़े ४ सालों में सरकार ने भव्य कार्यों का पहाड़ खड़ा किया है। ‘युति’ की सरकार होने के कारण जनता तक ये बातें पहुंचना महत्वपूर्ण है। चुनाव आते हैं तो ऐसी यात्राएं निकलती हैं। मुख्यमंत्री रथ पर सवार होकर यात्रा करनेवाले हैं कि पैदल महाराष्ट्र में पालथी मारकर बैठनेवाले हैं, इस संदर्भ में चंद्रकांत दादा ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। देखा जाए तो गत साढ़े ४ वर्षों में मुख्यमंत्री महाराष्ट्र भर में घूमे हैं और इस दौरान कई लोगों को उन्होंने धूल चटा दी है। अब एक विशेष उद्देश्य से भाजपा के माध्यम से यात्रा शुरू हो रही है। राज्य में अकाल की स्थिति भीषण है। खबर है कि महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में बरसात हुई है। मंत्रालय में दूषित पानी पीकर सैकड़ों कर्मचारियों को जुलाब और उल्टियां हुर्इं। लेकिन आधे से ज्यादा महाराष्ट्र की जनता टैंकर का या दूषित पानी पीने को मजबूर है। दो दिन पहले सरकार ने विधानसभा में आंकड़ों के साथ महाराष्ट्र की भयंकर तस्वीर दिखाई थी। ४ वर्षों में राज्य में १२ हजार किसानों द्वारा आत्महत्या करने की जानकारी मंत्री सुभाष देशमुख ने दी। इन १२ हजार उध्वस्त परिवारों के घरों की ओर रथयात्रा का मार्ग घुमा दें और उनकी वेदना को समझें। हम खुद महाराष्ट्र में घूम रहे हैं। रथयात्रा भले न हो लेकिन किसानों की पीड़ा को समझने के लिए हम घूम रहे हैं। सरकार घोषणा करती है, योजना बनाती है लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर उसका लाभ कितने लोगों को मिल पाता है? फसल बीमा प्रकरण में किसानों को फंसाया जा रहा है। बीमा का हफ्ता किसान भरता है लेकिन बीमा कंपनियां किसानों द्वारा भरे गए हफ्ते के बावजूद बीमा की रकम पर टालमटोल कर रही हैं। ऐसे लाखों मामले हमें कई तालुकाओं में दिख रहे हैं। बीमा कंपनियों ने किसानों की इस प्रकार लूट शुरू की है उन बीमा कंपनियों की दुकानदारी बंद करनी पड़ेगी। सरकार रथ पर और किसान सूखी जमीन में गड़ा हुआ है, ऐसी विषम तस्वीर न दिखने पाए। किसानों को किस प्रकार फंसाया जा रहा है, इसे सरकार की नजर में लाने के लिए हम घूम रहे हैं। राज्य में कांग्रेस की सरकार होती तो बेबाकी से कहते कि आंखों की पट्टी हटाओ लेकिन ये सरकार हमारी है और वह पूरे मन से काम कर रही है। फिर भी जहां गलती होती है वहां हम बोलते हैं। किसान व्याकुल हैं। हम जब मंच से उनसे सवाल पूछते हैं कि फसल बीमा का लाभ जिन्हें मिला हो वे हाथ ऊपर करें और कर्जमुक्ति का लाभ जिन्हें मिला हो वे हाथ ऊपर करें। हमें लगता है कि सामने बैठे सौ प्रतिशत किसान हाथ ऊपर करके सरकार की जय-जयकार करें। लेकिन किसानों का हाथ ऊपर नहीं उठता। सरकार ने दिया लेकिन किसानों तक पहुंचने के मार्ग में किसने बाधा पहुंचाई। इस दलाली के बांध को तोड़कर मुख्यमंत्री की रथयात्रा को आगे ले जाना पड़ेगा। कर्जमाफी के मामले में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज सम्मान किसान योजना के अंतर्गत राज्य के ५० लाख किसानों की कर्जमाफी करने का फैसला लिया गया। सरकार ने केवल कर्जमाफी की घोषणा नहीं की बल्कि उसके लिए २४ हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है लेकिन ३०-३५ लाख किसान दो साल से कर्जमाफी की प्रतीक्षा में हैं। यहां सहकार विभाग और बैंकों की प्रतिरोधक नीति स्वीकारी गई है। किसानों के मामले में यह प्रतिरोध चिंताजनक है। इतना सबकुछ सहने के बावजूद महाराष्ट्र में किसानों ने शिवसेना-भाजपा युति को रथ पर सवार कर दिल्ली भेजा। ऐसे ईमानदार किसानों की समस्याओं को दूर करना होगा। मुख्यमंत्री कौन होगा या किसका होगा, इन भौतिक प्रश्नों में हमें आज रस नहीं है। किसान तड़प रहा है। उसकी समस्याएं दूर की जाएं, ये हमारी मांग है। किसानों की कर्जमुक्ति फडणवीस सरकार के ४ वर्षीय कार्यकाल की सबसे बड़ी घोषणा है। बाकी पत्थर, मिट्टी, रेती, डांबर और सीमेंट के काम ठेकेदार करते ही रहते हैं। वो कल हुई और आगे भी होगी। लेकिन किसानों की कर्जमुक्ति की घोषणा अटक गई। फसल बीमा योजना में धोखा हुआ। मराठों को आरक्षण की घोषणा के बावजूद क्या मिला, ऐसा सवाल भाजपा सांसद छत्रपति संभाजी राजे ने ही पूछा है। गड्ढे में गया आरक्षण, ऐसा संताप कोल्हापुर के छत्रपति ने क्यों व्यक्त किया? इन सभी समस्याओं को रथ पर चढ़ने के पहले सुलझाना होगा। भाजपा ने रथ छोड़ दिया है और चंद्रकांत दादा उस रथ के सारथी बनेंगे। मतलब वो रथ ‘ऐसा-वैसा’ बिल्कुल नहीं होगा। महाराष्ट्र के विकास की गंगा जिस दिशा में बह रही है उसी मार्ग से रथयात्रा आगे बढ़ेगी। कुछ जगहों पर दलदल, कहीं दरकी हुई जमीन और कहीं किसानों के सूखे चेहरे दिखेंगे। यह सब ठीक करके आगे बढ़ो। रथ के पहिए कहीं न अटकें इसके लिए शुभकामनाएं! मुख्यमंत्री हमारे ही हैं, वे उत्तम नेतृत्व कर रहे हैं और सबको साथ लेकर काम कर रहे हैं इसलिए उनकी चिंता होती है। लालकृष्ण आडवाणी की अयोध्या रथयात्रा को २५ वर्ष हो गए। लेकिन राम वनवास में ही हैं। हमारा अयोध्या आना-जाना शुरू है और राम मंदिर बनेगा यह आशा जीवित है क्योंकि जहां तुम कम पड़ोगे वहां हम कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगे! रथ आगे बढ़ने दो!