" /> परमबीर ने दिया था ….सचिन वाझे को पॉवर… मुंबई पुलिस ने गृहविभाग को सौंपी रिपोर्ट

परमबीर ने दिया था ….सचिन वाझे को पॉवर… मुंबई पुलिस ने गृहविभाग को सौंपी रिपोर्ट

एंटीलिया विस्फोटक व मनसुख मर्डर मामले में एपीआई सचिन वाझे की गिरफ्तारी के बाद वाझे को मिले असीमित अधिकारों पर सवाल उठ रहे थे कि एक साधारण एपीआई इतना दुस्साहस किसके इशारे पर कर रहा था? इन सवालों का जवाब मुंबई पुलिस आयुक्त हेमंत नगराले की रिपोर्ट से मिल गया है। नगराले द्वारा गृहविभाग को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि वाझे को असीमित पॉवर मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह ने ही दी थी।
बता दें कि परमबीर सिंह ने आरोप लगाया है कि गृहमंत्री अनिल देशमुख एपीआई सचिन वाझे के सीधे संपर्क में थे और अक्सर अपने बंगले पर बुलाया करते थे। उन्होंने उसे १०० करोड़ की वसूली का टारगेट दे रखा था लेकिन गृहविभाग को मुंबई पुलिस की दी गई एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि एपीआई वाझे सीधे मुंबई पुलिस के तत्कालीन आयुक्त परमबीर सिंह के निर्देशों के अनुसार काम कर रहा था। वाझे क्राइम ब्रांच के किसी भी बड़े अफसर को रिपोर्ट नहीं करता था। ५ पन्नों की इस रिपोर्ट में वाझे की फिर से सेवा में नियुक्ति से लेकर ९ महीने तक की पूरी जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट में जो सबसे बड़ी बात ये है कि वाझे की ८ जून २०२० को मुंबई पुलिस के आर्म्ड फोर्स में नियुक्ति की गई। वाझे की नियुक्ति का पैâसला तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर, सह पुलिस कमिश्नर (एडमिन), अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (एलए) और मंत्रालय डीसीपी ने लिया था। ये नॉन एग्जिक्‍यूटिव पोस्टिंग थी, जो अमूमन निलंबित अफसरों की फिर से नियुक्ति के बाद दी जाती है, लेकिन वाझे के लिए ८ जून, २०२० को ही पुलिस स्थापना मंडल की बैठक हुई और उसमें वाझे को मुंबई क्राइम ब्रांच में लेने का आदेश पारित कर दिया गया। एक दिन बाद ९ जून, २०२० को ही तत्‍कालीन जॉइंट सीपी क्राइम ने वाझे को क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट में पोस्टिंग दिखा दी। रिपोर्ट में लिखा है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर के मौखिक आदेश पर जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) ने सीआईयू में कार्यरत पुलिस निरीक्षक विनय घोरपड़े और सुधाकर देशमुख का वहां से तबादला कर अलग जगह भेज दिया।