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पायलट की क्रैश लैंडिंग, हुई हकालपट्टी

राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने की चाहत रखनेवाले सचिन पायलट की कल आखिर व्रैâश लैंडिंग हो गई। मुख्यमंत्री तो खैर वे बन नहीं पाए और दूसरी तरफ उनकी मंत्रिमंडल से हकालपट्टी हो गई। साथ ही उनका प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी चला गया। इस तरह राजस्थान के सियासी संकट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पलड़ा भारी दिख रहा है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायकों ने कल अशोक गहलोत को अपना नेता माना और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद राजस्थान मंत्रिमंडल से सचिन पायलट और उनके दो करीबी मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया गया।
कांग्रेस पार्टी ने सचिन पायलट को राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया है। इसके अलावा उनके गुट के ३ मंत्रियों को भी अशोक गहलोत कैबिनेट से हटा दिया गया है। साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से भी पायलट की छुट्टी कर दी गई है। पर्यवेक्षक बनाकर जयपुर भेजे गए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यह घोषणा की है। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सचिन पायलट और उनके कुछ मंत्री साथी भाजपा के षड्यंत्र में भटककर कांग्रेस पार्टी की चुनी गई सरकार को गिराने की साजिश कर रहे हैं। यह अस्वीकार्य है इसलिए बड़े दुखी मन से कांग्रेस पार्टी ने कुछ फैसले लिए हैं। सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह को और रमेश मीणा को मंत्री पद से हटाया जा रहा है। लगातार दूसरे दिन कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सचिन पायलट गुट को पार्टी से बाहर निकालने का प्रस्ताव पारित किया गया। मंगलवार को विधायक दल की बैठक सुबह १०.३० बजे होनी थी, लेकिन यह एक घंटे देरी से ११.३० बजे शुरू हुई। बताया गया कि बगावत पर उतरे उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों का इंतजार किया गया। इससे पहले पायलट को इस बैठक के लिए न्यौता भेजा गया था। हालांकि पायलट खेमे ने फिर आने से इंकार कर दिया। बैठक में शामिल नहीं हुए विधायकों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित गया। इसके तहत इन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सभी विधायकों ने एकमत से सचिन पायलट को पार्टी से बाहर करने पर सहमति जताई। इसके पहले सीएम आवास पर सोमवार को दोपहर एक बजे विधायक दल की बैठक हुई थी। इसमें भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मांग की गई थी कि बैठक में शामिल नहीं होनेवाले विधायकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और बर्खास्त किया जाए।