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बोल्ड इमेज का दोष देते हैं!-सई ताम्हणकर

खुद के बलबूते मराठी फिल्मों से लेकर हिंदी फिल्मों तक का सफर सफलतापूर्वक तय करनेवाली अभिनेत्री सई ताम्हणकर का दूसरा परिचय है बोल्ड एंड ब्यूटीफुल। सई की सबसे बड़ी विशेषता है कि वो मैनिपुलेटर नहीं हैं, बल्कि अपने दिल की बात साफ-साफ कहनेवाली हैं। इस समय सई अपनी दो फिल्मों ‘इंडिया लॉकडाउन और ‘मीमी’ से चर्चा में हैं। पेश है, सई ताम्हणकर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 फिल्म ‘मीमी’ और `इंडिया लॉकडाउन’ में आप किस तरह की भूमिका निभा रही हैं?
मधुर भंडारकर बॉलीवुड के उन फिल्म मेकरों में से एक हैं, जिनके साथ काम करने की तमन्ना सभी अभिनेत्रियों की है। उनकी कहानियां अक्सर स्त्री प्रधान होती हैं, फिर वो चाहे फिल्म ‘पैâशन’ हो या `सत्ता’। जब मधुर ने फिल्म `इंडिया लॉकडाउन’ का ऑफर दिया तो मैंने इस फिल्म को करना चाहा। मधुर रियलिस्टिक फिल्मों के लिए जाने जाते हैं और उनकी फिल्मों में नायिकाएं हमेशा सक्षम होती हैं। फिल्म `मीमी’ के बारे में डिटेल्स शेयर करना अभी अलाऊ नहीं है।
 आपके लिए ‘फेमिनिज्म’ क्या है?
`फेमिनिज्म यानी स्त्री स्वतंत्रता। मेरे लिए फेमिनिज्म का मतलब है कोई भी स्त्री या युवती जीवन में जो करना चाहे उसे वो करने की आजादी मिले। यह आजादी उसके करियर के चुनाव को लेकर हो सकती है या जिस किसी व्यक्ति से वो शादी करना चाहती है उसकी आजादी हो सकती है। ये मुद्दे व्यक्तिगत तौर पर भिन्न हो सकते हैं। बस, खुशी इस बात की है कि धीरे-धीरे ही सही हमारा समाज इस बात को मानने लगा है कि महिलाओं में भी एक इंसान बसता है। उसकी सोच या विचार अलग हो सकती है। हर महिला को सपने देखने और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार है, फिर चाहे वो शहर में रहे या गांव में।
 क्या हमारा समाज नारी मुक्ति को मानता है?
जिसे हम समाज कहते हैं, आखिर वो हम सबसे ही मिलकर बना हुआ है। हम समाज के बारे में इतना क्यों सोचते हैं? क्या डॉ. आनंदी बाई जोशी के पति ने अपनी पत्नी को डॉक्टर बनाने से पहले ये सोचा था कि समाज मुझे क्या कहेगा? ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने कमाल के सामाजिक परिवर्तन किए। क्या उन्होंने उस दौर के दकियानूसी समाज को पूछकर अपनी पत्नी और समस्त महिलाओं को गरिमा दी? अगर सकारात्मक बदलाव चाहिए तो समाज के बारे में ज्यादा सोचना गलत होगा।
 आप कितनी फेमिनिस्ट हैं?
मैं फेमिनिस्ट हूं या नहीं, ये कहना जरा मुश्किल है। हां, मैं सपने देखती हूं और अपने सपनों को पूरा करने की मंशा रखती हूं। एक स्त्री होने के नाते अगर मेरे अधिकारों से मुझे कोई वंचित रखता है, तो मैं आवाज उठाती हूं।
 एक स्त्री होकर करियरिस्टिक वुमन बनना कितना आसान रहा आपके लिए?
मैं अभिनेत्री हूं, मेरा सर्कल बड़ा है लेकिन स्कूल और कॉलेज जानेवाली लड़कियों को कई चैलेंजेस फेस करने पड़ते हैं। कभी गली के लड़के उसे परेशान करते हैं, तो कभी कोई करीबी रिश्तेदार उसके साथ गलत तरीके से पेश आता है परंतु घबराहट के मारे वो बोल नहीं पाती। ऑफिस जानेवाली महिला घर और ऑफिस दोनों  फ्रंट  पर काम करती है। अगर उस पर अन्याय होता है, तो उसका साथ देनेवाला कोई नहीं होता। मेरा भी ऐसे लोगों से पाला पड़ा, जो बिना वजह मेरी ‘बोल्ड एंड ब्यूटीफुल’ इमेज की वजह से मुझे दोष देते हैं। वो ये समझ नहीं पाते या समझना नहीं चाहते कि ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन मेरी इमेज बहुत अलग है लेकिन क्या करें स्क्रीन इमेज को लोग सीरियसली लेते हैं।
 बिकनी पहनने और इंटिमेट सीन करते वक्त क्या कभी आपको हिचकिचाहट महसूस हुई?
अगर कहानी की डिमांड है तो इस तरह के सीन मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के किया। एक अभिनेत्री होने के नाते मुझे अपने किरदारों के साथ न्याय करना होगा लेकिन ग्लैमर वर्ल्ड में ऐसे कई चेहरे हैं, जिन्होंने बिकिनी पहनी, पर वो सई नहीं बन सकीं। कई सारी काबिलियतों की वजह से मैं १० वर्षों से अधिक वर्ष से राज कर रही हूं।
 आपकी अब तक की अभिनय यात्रा  कैसी रही?
मेरी अब तक की अभिनय यात्रा बहुत अच्छी रही। मेरी फिल्मों और किरदारों ने मुझे शांत और विनम्र बनाया। इस सफर में खून के रिश्तों से अधिक अपनापन और प्यार इंडस्ट्री ने दिया। उन्होंने मुझे समझा, मेरी काबिलियत पर विश्वास किया और मुझे हमेशा बेहतरीन किरदार दिया। मराठी फिल्म इंडस्ट्री में नंबर वन बनी रहने के कारण मुझे अगले पड़ाव पर हिंदी फिल्मों में मेकर्स ने मौका दिया। कुछ खट्टे और कुछ कड़वे अनुभवों से मैं और मजबूत बनती गई। मैं अपने हिंदी और मराठी अभिनय सफर से कृतज्ञ हूं और रहूंगी।