नौकरीपेशा को कर सहूलियत की आस! कंसल्टेंट कमाए ज्यादा नौकरीपेशा भरे ज्यादा

आयकर कटौती वेतनभोगियों को पीस रहा है। यह जहां व्यवसाइयों को तरह-तरह की सुविधाएं देता है, वहीं वेतनभोगियों को मिलनेवाले वेतन का कुछ हिस्सा ‘टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स’ के तौर पर काट भी लेता है। ऐसे में कटे वेतन का दंश झेल रहे नौकरीपेशा लोगों को इस बजट में सरकार से बड़ी सहूलियत की आस है।
जानकारों के अनुसार नौकरीपेशा लोगों को आयकर में छूट देने का सबसे बड़ा माध्यम है स्टैंडर्ड डिडक्शन में छूट। स्टैंडर्ड डिडक्शन वह छूट है, जिसे अलग-अलग मदों के अंतर्गत आयकर की सीमा से बाहर रखा गया है। यदि स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ा दिया जाए तो वेतन में आयकर कटौती अपने आप कम हो जाएगी। स्टैंडर्ड डिडक्शन को २०१८ फाइनेंस एक्ट के तहत पुन: शुरू किया गया। इसके तहत सालाना ४०,००० तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू किया गया, जिसमें ट्रांसपोर्ट अलाउंस के तौर पर १९,२०० और मेडिकल खर्च के तौर पर १५,००० रुपए के खर्च को सम्मिलित किया गया लेकिन इसका भी कोई खास अंतर नौकरीपेशा लोगों को नहीं मिल पाया। इस डिडक्शन से सालाना ५,८०० रुपए का ही नफा कर छूट में मिल पाया। हालांकि २०१९ के अंतरिम बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर रु. ५०,००० तक कर दिया गया लेकिन जानकारों के अनुसार इसका कोई खास फायदा अब भी नहीं होगा। इसमें मुख्य छूट के रूप में मेडिकल और ट्रैवेल अलाउंस नहीं रहे, वहीं कई ऐसे खर्च हैं जिनमें कई साल से बदलाव नहीं किया गया है। जिसमें बच्चों की शिक्षा के खर्च की सीमा रु.१०० प्रति बच्चा रखा गया है, जो दो बच्चों पर लागू होती है। इसी प्रकार होस्टल अलाउंस भी है, जिसे हर माह रु.३०० तक रखा गया है।
इसके उलट कंसल्टेंट की कमाई को देखा जाए तो यदि उसकी आमदनी ५० लाख के अंदर रहती है तो वह प्रकल्पित कर (प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन) का पात्र होता है और अपनी कुल आय के ५० फीसदी पर ही कर अदायगी का पात्र होता है। इसका अर्थ है कि वह आमदनी का ५० फीसदी खर्च दिखा सकता है। प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन ५० लाख से ज्यादा आमदनीवालों पर लागू नहीं होती। लेकिन इस सीमा के अंदरवालों को मिलनेवाली छूट के कारण यह छोटे और मझले करदाताओं को बड़ी राहत देता है जबकि नौकरीपेशा को कर अदायगी में कोई छूट नहीं मिल रही है। यदि आमदनी के लिहाज से देखा जाए तो नौकरीपेशा और कंसल्टेंट की आमदनी सालाना रु.३० लाख रुपए है तो नौकरीपेशा इसके लिए रु.६.७३ का कर अदायगी करता है जबकि कंसल्टेंट इस मद में मात्र रु.२.१८ की कर अदायगी करता है। यह कर अदायगी नौकरीपेशा की कर अदायगी का मात्र एक तिहाई है।