मछली को चारा खिलाएं समय होगा अनुकूल

गुरुजी क्या मेरे जीवन में कष्ट ही कष्ट है। कष्ट से छुटकारा कब मिलेगा और किस उपाय से मिलेगा, वह उपाय मुझे बतलाइए?
– अनीता
(जन्म- १७ अक्टूबर, १९५९, समय रात्रि ५.३० मैंगलोर)
अनीताजी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं मेष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली में द्वादशेष सूर्य लग्न में राहु के साथ में बैठकर ग्रहण योग बना रहा है और द्वादश भाव में भाग्येश शुक्र बैठकर के निर्भाग्य योग भी बना रहा है। सप्तम भाव पर केतु बैठ करके आपकी कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग भी बना दिया, इस योग के कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण फल भी प्राप्त नहीं कर पा रही होंगी। आपकी कुंडली में इस समय राहु की महादशा में केतु का अंतर चल रहा है जो कि आपके लिए अनुकूल नहीं है। समय को पूर्णतया अनुकूल बनाने के लिए सर्वप्रथम मछली को चारा खिलाएं यह क्रिया ४३ दिन तक आपको करना आवश्यक है तथा वैदिक विधि से कालसर्प योग की पूजा भी कराना आवश्यक है। तब धीरे-धीरे समय आपका अनुकूल होता जाएगा।
पंडितजी दो साल से शारीरिक कष्ट में हूं खर्च की भी अधिकता बनी हुई है कोई उपाय बताएं?
– प्रदीप दुबे
(जन्म- १ अक्टूबर, १९७९, समय प्रात: ७.०० बजे, मुंबई)
प्रदीपजी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। आपकी राशि पर जनवरी २०१७ से ही शनि की साढ़ेसाती चल रही है। वर्तमान स्थिति में जो आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है वह लौह पाद पर चल रही है लौह पाद की शनि की साढ़ेसाती धन की हानि भी करवाता है और स्वास्थ्य की भी हानि करवाता है। सबसे पहले शनि से अनुकूल फल प्राप्त करने के लिए आपको प्रतिदिन तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और प्रतिदिन हनुमानजी का दर्शन करना आवश्यक है और जीवन की हर प्रकार से विकास के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए आपकी कुंडली में जो काल सर्प योग बना हुआ है उस काल सर्प योग से भी शुभ फल प्राप्त करने के लिए वैदिक विधि से कालसर्प योग की पूजा कराना आपके लिए आवश्यक है। जीवन की विशेष गहराई को जानने के लिए आप को संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना चाहिए।
गुरुजी मेरी राशि क्या है? कुंडली में दोष क्या है? यदि कोई दोष है तो उपाय बताने की कृपा करें?
– हेमलता गुप्ता 
(जन्म- ३ जुलाई, १९९२, समय रात्रि ११.४५ कल्याण, थाना)
हेमलताजी आपका जन्म मीन लग्न में एवं मिथुन राशि में हुआ है। द्वितीय भाव में मंगल बैठ करके आपको जिद्दी प्रकृति का बना दिया है तथा पंचम भाव का स्वामी चंद्रमा छठे भाव में बृहस्पति के साथ में बैठा है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना जाता है इसी चंद्रमा के कारण आपका मन अस्थिर रहता है। मन पर अंकुश लगाना आपके लिए आवश्यक है नहीं तो लोग आपके साथ धोखेबाजी भी कर सकते हैं। आपकी कुंडली में सुख स्थान पर बैठे सूर्य के साथ में कर्म स्थान पर बैठा राहु की पूर्ण दृष्टि पड़ रही है अत: आपकी कुंडली में ग्रहण योग का पूर्ण प्रभाव है, जिस कारण आपका मन हर समय अशांत एवं बेचैन रहता है। कार्य करने में एकाग्रता नहीं रहती। इसी कारण समय को अनुकूल बनाने के लिए आप को ग्रहण योग की पूजा वैदिक विधि से कराना आवश्यक है। जीवन में अनुकूल जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए भी पूजा आपके लिए आवश्यक होगी।
गुरुजी परिश्रम का पूर्ण फल नहीं मिल पा रहा है, कुंडली में दोष क्या है, कोई उपाय बताएं?
– मनोज यादव
(जन्म- ६ जून, १९७३, समय दोपहर २.१० बजे, देवरिया, उत्तर प्रदेश)
मनोजजी आपका जन्म कन्या लग्न एवं कन्या राशि में हुआ है। लग्नेश एवं कर्मेश स्वगृही हो करके भाग्येश शुक्र के साथ कर्म भाव पर बैठकर के आपको भाग्यशाली तो बनाया ही है लेकिन सुख भाव में राहु एवं कर्म भाव में केतु बैठ करके ‘शंखपाल’ नामक ‘कालसर्प योग’ बना दिया है। गोचरीय व्यवस्था के आधार पर अगर देखा जाए तो वर्तमान समय में भी राहु धनु राशि पर बैठा है, केतु भी मिथुन राशि का होकर बैठा है तथा आपकी राशि पर शनि की ढैया का भी प्रभाव चल रहा है। इन्हीं कारणों से जीवन में उतार-चढ़ाव लगा है। आपकी कुंडली में जो उपयुक्त शंखपाल कालसर्प योग है कभी-कभी जीवन साथी के साथ भी वैचारिक मतभेद होते रहते हैं। व्यापार में भी नुकसान की संभावना बनी रहती है आप जिस पर ज्यादा भरोसा करते हैं वही आपके साथ विश्वासघात करता है अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए ‘शंखपाल नामक कालसर्प योग’ की वैदिक विधान से कम से कम ३ बार आपको पूजन कराना आवश्यक है। जीवन के अन्य गहराई को विस्तार से जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
मेरी शादी कब तक होगी, क्या कुंडली में कोई दोष है, यदि दोष है तो उपाय बताएं?
– सोहनलाल  
(जन्म- ६ फरवरी, १९९०, समय रात्रि ४.३० वापी, गुजरात)
सोहनलालजी आपका जन्म धनु लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का अच्छी प्रकार से अवलोकन किया गया। लग्न में ही शुक्र, बुध, शनि एवं मंगल बैठे हुए लग्न में ही मंगल के साथ में शनि बैठकर के आपको डबल मांगलिक बना दिया है। विवाह का समय तो चल ही रहा है लेकिन लग्न में ही मंगल और शनि बैठने के कारण आप अपने जीवन साथी का चयन नहीं कर पा रहे हैं और अनुकूल जीवन साथी भी प्राप्त नहीं कर पा रहे। अनुकूल जीवन साथी प्राप्त करने के लिए आपको वैदिक विधि के द्वारा मांगलिक दोष से शुभ फल प्राप्त करने के लिए ‘मंगल चंडिका स्तोत्र’ का पाठ कराना आवश्यक है। यदि कराएंगे तो अनुकूल जीवन साथी भी प्राप्त होगा और दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।