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सारे जग

सारे जग की आंख का तारा,
मैं हूं हिंदुस्थान प्यारा।
दुनिया जहान में आला
सारे जग से हूं मैं निराला,
विरासत में मुझे मिली है,
संस्कार-संस्कृति की धारा,
प्रेम से भरा हृदय है मेरा,
मैं हूं हिंदुस्थान प्यारा।

अतिथि देव समान जहां पर,
वेद, पुराण, मंत्र का होता जहां उच्चारण,
बड़े बुजुर्गों का जहां करते वंदन,
जाते जहां गुरु के शरण,
मैं हूं हिंदुस्थान प्यारा।

महाभारत-रामायण की होती जहां गाथा,
पत्थर भी जहां सम्मान है पाता,
शत्रुओं के लिए हूं मैं ज्वाला,
मित्रों का हूं मैं रखवाला,
मैं हूं हिंदुस्थान प्यारा।

संत-ऋषि-मुनियों की धरती का धर्ता,
वसुधैव कुटुंबकम धर्म का मैं कर्ता,
विविधता में एकता हूं रखता,
मैं हूं हिंदुस्थान प्यारा।

तेजी से बढ़ता आगे हूं,
विश्वगुरु शांति का देता नारा,
सारे जग में मेरी शान निराली,
दुनिया की आंख का मैं हूं तारा,
मैं हूं हिंदुस्थान प्यारा।
-संगीता पांडेय ‘हिंदुस्तानी’