सरहद पर लटका शौचालय! ४० साल से है स्कूल को इंतजार

जहां सोच वहां शौचालय के घोषवाक्य के साथ शुरू हुई केंद्र सरकार के शौचालय निर्माण की योजना पालघर के सरकारी स्कूल तक भी नहीं पहुंच पाई है। यहां कई सत्ता आई, अधिकारी आए लेकिन ४० साल से स्कूल को शौचालय मुअस्सर नहीं हो पाया है। इसके कारण स्कूल को शौचालय नहीं मिल पाया है और छात्र व शिक्षक सड़क पर शौच को मजबूर हैं। यहां के लोगों का कहना है कि यह स्कूल दो वॉर्डों के बीच स्थित है, जिससे सरहद के अस्पष्ट होने के कारण शौचालय का काम लटक गया है जबकि प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि उसे अब तक स्कूल से इस संदर्भ में कोई मांग ही नहीं की गई है।
गोपचर पाड़ा के मराठी स्कूल के पूर्व छात्र अभय अभ्यंकर और नावेद खान काफी समय से इस स्कूल में शौचालय की मांग कर रहे हैं। इस सिलसिले में नेताओं-अधिकारियों से सैकड़ों मुलाकातों के बाद जब निष्कर्ष नहीं निकला तो उन्होंने शौचालय निर्माण की मांग के संदर्भ में प्रशासन को सौंपे गए पत्र को प्लैक्स बैनर में बनाकर जगह-जगह लगवा दिया है लेकिन प्रशासन और नेता को इसकी सुध लेने का समय नहीं है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
इस संबंध में वसई-विरार महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त रमेश मनाले से बात की गई तो उन्होंने कहा कि स्कूल की तरफ से जब मांग और जगह की उपलब्धता बताई जाएगी तो मनपा शौचालय बनाकर देगी जबकि जिला शिक्षा परिषद अधिकारी माधवी तांडेल ने बताया कि इस मामले में महानगरपालिका से पत्र-व्यवहार करके जल्द ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी।
शिक्षकों को है तबादले का डर
स्कूल में शौचालय की मांग पर जब कुछ शिक्षकों से बात की गई तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शौचालय की समस्या बहुत ही गंभीर है मगर हम लोग कोई ऐसी मांग नहीं कर पाते। हमें डर है कि मांग करने पर हमारा किसी ऐसी जगह पर तबादला न कर दिया जाए, जहां हम पहुंच ही न सकें।