" /> ग्लैमर के नीचे गंदगी!

ग्लैमर के नीचे गंदगी!

चकाचौंध की दुनिया के पीछे एक बजबजाती गंदगी है। एक नहीं हजारों गंदगियां हैं। मगर जब कहीं किसी गटर का ढक्कन खुलता है तो इस बजबजाती गंदगी की सड़ांध बाहर निकलती है। थोड़ा शोर मचता है। मीडिया चिल्लाती है। कुछ दिनों के बाद सब शांत हो जाता है। लोग ग्लैमर में खो जाते हैं। बजबजाती गंदगी पर चकाचौंध फिर हावी हो जाती है और शो चलता रहता है। शो मस्ट गो ऑन! बॉलीवुड में नए-नए निर्माता और फाइनेंसर की इनकमिंग होती रहती है। नए निर्माता के आते ही न जाने कहां से परजीवियों को इसकी भनक लग जाती है। जो पहले चिपक गया, वह उसे चूसता रहता है। ऐसे कई निर्माता और परजीवी यहां मौजूद हैं। जब निर्माता का सारा रस निच़ुड जाता और वह सूख जाता है तो यह परजीवी भी उसको छोड़ देते हैं। इस खेल में कभी निर्माता तो कभी परजीवी का गेम ओवर हो जाता है।
एक दवा कंपनी के मालिक हैं। उन पर भी ग्लैमर का चस्का चढ़ा। उन्होंने फिल्म कंपनी बना दी। यह कंपनी कुछ ऐड फिल्म शूट करने लगी। कुछ पैसा सीरियल्स में डाल दिया और एक फिल्म भी बना डाली। बताते हैं कि इस फिल्म में १८ से २० करोड़ का खर्च हुआ था। २ साल पहले जब यह फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर वाशआउट हो गई थी। फिल्म की कहानी मुंबई की पृष्ठभूमि पर थी। माफियाओं के लिए बदनाम मुंबई की एक जगह पर इस फिल्म का नाम रखा गया था। जानकार बताते हैं कि इस फिल्म में जितना पैसा लगा था कमाई उसकी ५ज्ञ् भी नहीं हुई थी। इस फिल्म की हीरोइन इस फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी की निदेशक भी बन गई थी। इस फिल्म के निर्माण में कैसी लूट मची थी इसका एक ही उदाहरण काफी है। फिल्म में एक आइटम सॉन्ग डाला गया था। इस आइटम सॉन्ग के लिए कामुक फिल्मों की मल्लिका रह चुकी एक अभिनेत्री को लिया गया था। इस अभिनेत्री का अतीत कोई बहुत साफ- सुथरा नहीं रहा है। बिग बॉस में आने के कारण यह सुर्खियों में आई थी। एक आइटम सॉन्ग के लिए इस टाइप की अभिनेत्री को कितनी पारिश्रमिक मिलनी चाहिए २० लाख, २५ लाख, ४० लाख बहुत हो गया। मगर जानकार बताते हैं इस अभिनेत्री को एक गाने के लिए पूरे डेढ़ करोड़ रुपए दिए गए थे। अब इस डकैती पर क्या कहा जाए। बॉलीवुड में इस तरह की डकैती होती रहती है। अब जब लोग खुद लुटने को तैयार बैठे हैं तो लूटने वाला क्या करे? एक फिल्म बन रही है, पैसे पानी की तरह बहाया जा रहा है, बिना कुछ सोचे समझे। मामला वही परजीवी का हो जाता है। खैर, सुनने में आया है कि वह दवा कंपनी के मालिक अपने राज्य वापस लौट चुके हैं। उनकी तबीयत खराब रहती है। उनकी किडनी फेल हो चुकी है। अब किसी के २०-२५ करोड़ रुपए लुट जाएं तो इसका उसके स्वास्थ्य पर असर तो होगा ही। ग्लैमर के चक्कर में बर्बाद होने के बाद होश आता है। ये बर्बादी दो ही चीजों के कारण होती है। एक तो ये परजीवी और दूसरा बॉलीवुड की कोई मशहूर हस्ती का प्रभाव। यह ऊपर जो कहानी बताई गई यह परजीवी वाली है। यह परजीवी फिल्म की हीरोइन थी, यह हीरोइन आज छोटे-मोटे एड करती है और किसी अगले शिकार की तलाश में है। दूसरा मशहूर हस्ती का प्रभाव, ऐसे ही एक हैं खान साहब। तीन खान भाइयों में ऊपर के दो बड़े भाई तो काफी सफल हुए। छोटे साहब को ना एक्टिंग में सफलता मिली और ना डायरेक्शन में। इन्हें एक लखनऊ की पार्टी मिल गई। फिर तो यह चिपक गए। वह बेचारा उद्योगपति था। उसने अपने लिंक से बैंकों से मोटा कर्जा लिया और एक भारी-भरकम फिल्म बना डाली। इस मशहूर हस्ती का असर जो था उस पर। परेल के एक फाइव स्टार में फिल्म का म्यूजिक बड़े ही धूमधाम से रिलीज हुआ। फिल्म रिलीज हुई और पहले शो मे दर्शकों के ना होने के कारण कई थिएटर में शो कैंसिल तक करने पड़े थे। सोचिए कितना बुरा हाल हुआ होगा उस उद्योगपति का। बैंक उसके ऊपर चढ़ गए। उसकी कई प्रॉपर्टी बिक गई। उसकी बीवी भी छोड़ कर भाग गई। १५ सालों के बाद बड़ी मुश्किल से वह उद्योगपति अब जाकर खुद को संभाल पाया है। ऐसे सैकड़ों उदाहरण बॉलीवुड की ग्लैमर के पीछे दबे पड़े हैं।