" /> कुलभूषण जाधव मामला, पाकिस्तान का उल्टे चिल्लाना

कुलभूषण जाधव मामला, पाकिस्तान का उल्टे चिल्लाना

चीन हो या पाकिस्तान दोनों हिंदुस्थान से ‘मुंह में राम बगल में छुरी’ जैसा व्यवहार करते हैं। पिछले दिनों चीन ने गलवान घाटी में जान-बूझकर तनाव बढ़ाया था। अब पाकिस्तान को भी चीन की तरह ही हिंदुस्थान विरोधी ‘हिचकी’ लगी है। पाकिस्तान ने उसकी हिरासत में वैâद कुलभूषण जाधव के बारे में अजीब-सा दावा किया है। हिंदुस्थानी नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। नई नौटंकी करते हुए पाकिस्तान का कहना है कि इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने से खुद कुलभूषण ने इंकार कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने कुलभूषण से १७ जून को पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए कहा था। लेकिन जाधव ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। हालांकि हिंदुस्थान ने पाकिस्तान के इस दावे को खारिज कर दिया है। कुलभूषण पर पाकिस्तान दबाव डालकर ऐसा करने के लिए मजबूर कर रहा है, ऐसा आरोप हिंदुस्थान ने लगाया है। पाकिस्तान के आज तक की हरकतों को देखते हुए कहा जा सकता है कि कुलभूषण पर अवश्य ही दबाव बनाया गया होगा। एक तरफ पुनर्विचार याचिका नहीं करने के लिए दबाव तंत्र का प्रयोग और दूसरी तरफ कुलभूषण को दूसरा काउंसलर एक्सेस देने की बात। कुलभूषण जाधव मामले का एफआईआर, सबूत, वहां की अदालत के आदेश सहित किसी भी प्रकार के कागजात को देने से पाकिस्तान ने मना कर दिया है। सच कहें तो जाधव के पास अंतरराष्ट्रीय न्याय कानून के निर्णय को लागू करने का अधिकार है। पाकिस्तान इससे इनकार तो कर ही रहा है और ऊपर से यह भी कह रहा है कि ऐसा जाधव का ही कहना है। कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कहा था, ‘पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहा है।’ उधर चीन और इधर पाकिस्तान, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय नियमों, कानून और हिंदुस्थान से संबंधित अनुबंधित प्रावधानों को कचरे में फेंके रहते हैं। कुछ ऐसा ही कुलभूषण की पुनर्विचार याचिका के बारे में पाकिस्तानी कर रहे हैं। इस संदर्भ में हिंदुस्थान ने कड़ी भूमिका अपनाई, यह अच्छा ही हुआ। हालांकि इससे पाकिस्तान की पूंछ सीधी हो जाएगी, ऐसा नहीं है। पाकिस्तान की यह हरकत हिंदुस्थान को नीचा दिखाने की है। कुलभूषण की गिरफ्तारी मूलत: पाकिस्तान की ‘चोरी ऊपर से सीनाजोरी’ जैसी है। उन पर चल रहा मामला उसी चोरी को कानूनी जामा पहनाने का षड्यंत्र है। उसमें भी विएना अनुबंध के न्याय अधिकार को पाकिस्तान ने कुचल दिया है। कुलभूषण की फांसी को स्थगित करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कुलभूषण को काउंसलर एक्सेस देकर सजा पर पुनर्विचार करने का आदेश पाकिस्तान को दिया था। उसका पालन तो दूर, उल्टे कुलभूषण द्वारा ही इस बाबत इनकार किए जाने की झूठी बात पाकिस्तान कर रहा है। ये कुलभूषण की ओर उंगली दिखाते हुए खुद पाक साफ रहनेवाली हरकत है। यह पुनर्विचार याचिका मामला भविष्य में पाकिस्तान के लिए खुद के पैर पर मारी हुई कुल्हाड़ी साबित हो सकता है। इसके अलावा उस पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की तलवार भी टंगी हुई है। इस डर से पुनर्विचार याचिका मामले को टाला जा रहा है। परस्पर संबंध और अंतरराष्ट्रीय विश्वास के मामले में पाकिस्तान की प्रतिमा दुनिया भर में बहुत बुरी है। फिर भी कुलभूषण मामले में वो देश नैतिकता का बुर्का पहनकर मनमानी कर रहा है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वो उस बुर्वेâ को फाड़ डाले। इसके लिए पाकिस्तान की उल्टी चिल्लाहट उसी के हलक में डाल देनी चाहिए। केवल तभी कुलभूषण जाधव के सकुशल स्वदेश लौटने का मार्ग खुलेगा।