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चतुर्मास आज से : श्री हरि करेंगे 4 माह विश्राम

महादेव के हाथ होगी सृष्टि की कमान

देवशयनी एकादशी आज यानि 1 जुलाई को है। इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं।  इसी दिन से चातुर्मास शुरू हो जाते हैं। चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करने के लिए पाताल लोक यानि क्षीरसागर स्थिति अपने शयन में चलें जाएंगे। इस दौरान सृष्टि की कमान भगवान शिव के हाथों में रहेगी। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का विश्राम काल आरंभ हो रहा है।
इस दिन से ही चार्तुमास आरंभ हो जाएंगे। इस बार चार्तुमास 148 दिनों का है, जो 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी को समाप्त होगा। इस दिन भगवान विष्णु अपने शयन कक्ष से बाहर आ जाएंगे।
इस बार अधिकमास यानि मलमास भी है। मान्यता है कि जिस वर्ष 24 एकादशी के स्थान पर 26 एकादशी होती हैं तो चार्तुमास अधिक लंबा होता है। इस कारण इस बार चार्तुमास की अवधि लगभक 5 माह की रहेगी। देवशयनी एकादशी को पद्मनाभा भी कहा जाता है।
भगवान शिव देखते हैं धरती का कार्य
चार्तुमास आरंभ होते हैं भगवान विष्णु धरती का कार्य भगवान शिव को सौंप देते हैं। भगवान शिव चार्तुमास में धरती के सभी कार्य देखते हैं। इसीलिए चार्तुमास में भगवान शिव की उपासना को विशेष महत्च दिया गया है। सावन का महीना भी चार्तुमास में ही आता है, जो भगवान शिव को समर्पित है।
भगवान शिव करते हैं धरती का भ्रमण
मान्यता है कि चार्तुमास में भगवान शिव धरती का भ्रमण करते हैं। इस दौरान भगवान शिव उन लोगों को दंडित करने का भी कार्य करते हैं, जो गलत कार्य करते हैं। वहीं भगवान शिव उन लोगों पर अपना विशेष आर्शीवाद देते हैं, जो उनकी पूजा करता है और धरती को सुंदर बनाने का प्रयास करता है।
25 नवंबर को जागृत होेंगे भगवान विष्णु
पंचांग के अनुसार भगवान विष्णु कार्तिक मास की एकादशी पर जाग्रत अवस्था में आते हैं। उस समय सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करते हैं। इस सयम सूर्य मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं। जब भगवान का शयन काल समाप्त होता है तो उसे देवोत्थानी एकादशी कहते हैं।
चार्तुमास में नहीं किए जाते हैं शुभ कार्य
चार्तुमास में अनुशासित जीवन शैली का पालन करना चाहिए. इन दिनों में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। चार्तुमास में खानपान भी विशेष ध्यान दिया जाता है। चार्तुमास में भगवान का ध्यान किया जाता है।

शांत रहेगी शहनाई
आज यानी हरिशयनी एकादशी के दिन से शहनाई की धुन चार माह के लिए शांत हो जाएगी। अर्थात अब अब देवात्थान एकादशी तक शादी-विवाह के तमाम कार्यक्रम वर्जित रहेंगे।  क्योकिं इस दौरान चातुर्मास में होने के कारण भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में विश्राम करने के लिए चले जायेंगे। इस कारण शादी-विवाह की रस्में नहीं होंगी। हरिशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में विश्राम के लिए चले जाते हैं। विवाह में भगवान विष्णु के शामिल होने के बाद से ही शहनाई बजती है। देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान जगेंगे। उसके बाद से शहनाई बजेगी. 25 नवंबर को देवोत्थान एकादशी है।
इस बार विभिन्न कारणों से लगन काफी कम है। अब नवंबर में 25, 26, 30, दिसंबर महीने में 01, 02, 06, 07, 08, 09, 10, 11 और 13 को लगन है। इसके बाद से खरमास शुरू हो जायेगा। 14 जनवरी को खरमास समाप्त होगा। इसी दिन मकर संक्रांति भी है। खरमास की समाप्ति के बाद विभिन्न कारणों से जनवरी फरवरी-मार्च में कोई लगन नहीं है। मिथिला पंचांग के अनुसार नवंबर में लगन नहीं है। दिसंबर में 04, 06, 07,10 और 11 को अंतिम लगन है। वर्ष 2021 में जनवरी से लेकर मार्च तक लगन नहीं है।