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श्रीराम करनेवाले थे मां को अपने नेत्र समर्पित

दशहरा पूजा सामग्री: दशहरा प्रतिमा, गऊ का गोबर, चूना, तिलक, मौली, चावल और फूल, केले, मूली, ग्वारफली, गुड़, खीर पूरी आपके बहीखाते,

पंचांग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी अथवा दशहरे के रूप में देशभर में मनाया जाता है। दशहरा हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। अहंकार पर विजय का पर्व दशहरा शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन आता है। इस बार दशहरा या विजयादशमी का पर्व २५ अक्टूबर मनाया जाएगा। यह त्योहार भगवान श्री राम की कहानी तो कहता ही है, जिन्होंनें लंका में ९ दिनों तक लगातार चले युद्ध के पश्चात अहंकारी रावण को मार गिराया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया। इस तरह से बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में देशभर में मनाया जाता है। इसके कई प्रसंग हैं। एक घटना में रावण से युद्ध से पहले भगवान श्री राम, मां भगवती की पूजा करते हैं, ताकि रावण पर जीत का वर पा सकें। उस समय श्रीराम के भक्ति की परीक्षा के लिए पूजा के लिए रखे गए १०८ कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया। चूंकि श्री राम को राजीव नयन यानी कमल से नेत्रोंवाला कहा जाता था इसलिए उन्होंनें अपना एक नेत्र मां को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकालने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुर्इं और विजयी होने का वरदान दिया। भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में देशभर में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार युद्ध में विजय के कारण और पांडवों से जुड़ी एक कथा के कारण विजयदशमी को हथियार (अस्त्र-शस्त्र) पूजने की परंपरा भी है। दशहरे के दिन अगर किसी को नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो काफी शुभ होता है। नीलकंठ भगवान शिव का प्रतीक है, जिनके दर्शन से सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है। दशहरे के दिन गंगा स्नान करने को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। दशहरे के दिन गंगा स्नान करने का शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है इसलिए दशहरे दिन लोग गंगा या अपने इलाके की पास किसी नदी में स्नान करने जाते हैं। इस दिन भगवान राम, देवी अपराजिता तथा शमी के पेड़ की पूजा की जाती है।
दशहरा पूजा विधि-
दशहरा के दिन क्षत्रिय शस्त्र पूजन करते हैं जबकि इस दिन ब्राह्मण शास्त्रों का पूजन करता है, वहीं व्यापार से जुड़े यानी वैश्य वर्ग के लोग अपने प्रतिष्ठान आदि का पूजन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है, उसमें जीवनभर निराशा नहीं मिलती। यानी वह काम जीवनभर अच्छा फल देता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। गेहूं या चूने से दशहरा प्रतिमा बनाएं। गाय के गोबर के ९ गोले बनाएं। गोबर से दो कटोरियां बनाएं। एक कटोरी में कुछ सिक्के रखें दूसरे में रोली, चावल, फल और जौ रखें। पानी, रोली, चावल , फूल और जौ के साथ पूजा शुरू करें। प्रतिमा को केले, मूली, ग्वारफली, गुड़ और चावल अर्पित करें। प्रतिमा को धूप और दीप दें। बहीखातों को भी फूल, जौ, रोली और चावल चढ़ाएं। अगर दिवाली के लिए नए खाते मंगवाने हैं तो इसी दिन मंगवाए जा सकते हैं। पूजा के बाद गोबर की कटोरी से सिक्के निकाल कर सुरक्षित जगह रख दें। ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराकर दक्षिणा दें। रावण दहन के पश्चात् सोना पत्ती का वितरण करें और घर के बड़े और रिश्तेदारों को प्रणाम कर परस्पर मिलन आयोजन करें।
दशहरे के दिन का महत्व
इस दिन नया कार्य शुरू करें तो वो हमेशा फायदे में रहता है। वाहन, आभूषण और अन्य सामान खरीदना शुभ रहता है, इससे घर में बरकत बढ़ती है। भगवान शिव की पूजा का कई गुना फल मिलता है। इस दिन विजय की प्रार्थना करके कार्य आगे बढ़ाया जाता है और सफलता मिलती ही है।