" /> बेजुबानों के पालनहार!, लॉकडाउन के पहले दिन से जारी है आवारा जानवरों की सेवा

बेजुबानों के पालनहार!, लॉकडाउन के पहले दिन से जारी है आवारा जानवरों की सेवा

कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन ने इंसान के साथ ही मूक प्राणियों के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। लॉकडाउन में बेजुबान पशु-पक्षियों को खाने-पीने की काफी दिक्कत हो रही थी। क्योंकि इनका आहार भी आम लोगों के साथ जुड़ा होता है। लॉकडाउन में सभी लोग अपने घरों में वैâद होने पर मजबूर हो गए थे, जिससे सड़क के आवारा कुत्तों, बिल्लियों, पक्षियों आदि को हमेशा की तरह आहार नहीं मिल पा रहा था। लेकिन इन बेजुबानों के भी पालनहार हैं जो बिना किसी ब्रेक के इनकी सेवा कर रहे हैं। भाइंदर की कल्याण समिति ऐसी ही एक संस्था है। इसके अलावा भी कई संस्थाएं व व्यक्तिगत तौर पर भी कई प्राणीप्रेमी मूक पशु-पक्षियों की सेवा कर रहे हैं। ये लॉकडाउन के पहलें दिन से ही आवारा जानवरों की सेवा कर रहे हैं।

जैसलपार्क चौपाटी कल्याण समिति करीब ४ महीनों से प्रतिदिन सैकड़ों जानवरों व पक्षियों को निरंतर खाना-पानी दे रही है। समिति से जुड़े भाइंदर के जीवदया सेनानी खुद की परवाह किए बगैर बेजुबानों की भूख मिटाने में लगे हैं। समिति के कार्यकर्ता भाइंदर-पूर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में कुत्तों, गायों, बिल्लियों, कबूतरों व कौवों आदि को खाना खिला रहे हैं ताकि इनको कोरोना से लड़ाई की कीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े। कुत्तों व बिल्लियों को खिलाने के लिए कार्यकर्ता सुबह-शाम अपने-अपने घरों से पका चावल, दूध, पेडिकरी, बिस्किट्स आदि ले जाकर जैसल पार्क, चौपाटी, गणेश मंदिर, स्टेशन, बंदरवाड़ी, हनुमान नगर, आशा नगर, कोलीवाड़ा, आर. एन. पी.पार्क, नवघर रोड, एसवी रोड, बीपी रोड आदि जगह पर खिलाते हैं। यहां तक कि रात्रि को भी खिलाते हैं। भारी बरसात में भी बेजुबानों को खिलाया जाता है। लॉकडाउन में जहां घरों से बाहर निकलने की मनाही थी, वहीं बेजुबानों को खिलाने के लिए समिति के कार्यकर्ता निरंतर सक्रिय थे। महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि इनको खिलाने के बाद ही सुकून मिलता है और उन्हें चैन की नींद आती है।

कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन ने इंसान के साथ ही मूक प्राणियों के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। मगर समाज के कई ऐसे गुमनाम योद्धा हैं जो इन प्राणियों की निस्वार्थ सेवा में लगे हुए हैं और इन बेजुबानों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। चाहे धूप हो या बारिश, वे बिना किसी ब्रेक के इन मूक पशु-पक्षियों को खाना खिलाते हैं। भाइंदर में जैसलपार्क चौपाटी कल्याण समिति करीब ४ महीनों से प्रतिदिन सैकड़ों जानवरों व पक्षियों को निरंतर खाना-पानी दे रही है। लॉकडाउन में पुलिसकर्मी भी बेजुबानों की मदद के इस नेक काम में हरसंभव सहयोग दे रहे हैं।
महानगरपालिका से अनुमति लेकर समिति यह कार्य कर रही है। समिति के सदस्य गली-कूंचों सहित सड़क किनारे कुत्तों-बिल्लियों के साथ-साथ गायों का भी ख्याल रखते हैं। साथ ही लोगों से अनुरोध करते हैं कि घर में गाय के लिए रोटी बनाएं व बचनेवाले खाने व छिलकों को फेंकने की बजाय भूखे जानवरों तक पहुंचाएं। कबूतरों को जवारी व चना डाला जाता है। समिति द्वारा कार्यकर्ताओं को अनाज, दूध, बिस्किट, गाठिया, पेडिगरी आदि उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। सभी जीवदया सेनानियों के पास जानवरों के प्राथमिक उपचार के लिए दवा भी रहती है, जिससे तुरंत उपचार कर सकें। १५- २० कुत्तों की नसबंदी करवाई गई। गंभीर अवस्थावालों को हॉस्पिटल में ले जाकर इलाज करवाया जाता है एवं फोस्टर (केयर सेंटर) में भर्ती करवाया जाता है। यहां तक कि वैंâसर ग्रस्त कुत्ते को कीमोथेरेपी दिलायी जा रही है। किसी निर्दयी इंसान द्वारा मारे जाने से एक कुत्ते के पैर की हड्डी एकदम टूट गई थी। उसका ऑपरेशन करवाकर प्लेट लगवाई गई। इस कार्य में विशेष रूप से समिति के अध्यक्ष डॉ. एम.एल.गुप्ता, महासचिव नरेंद्र गुप्ता, वित्त सचिव भरत अग्रवाल, अग्रवाल समाज फतहनगर, सक्षम फाउंडेशन, भाइंदर सीए सोशल ग्रुप, संतोष जैन, दिव्या अमरनानी, संगीता शेट्टी, हेमलता सिंह, नैना मालोडे, पूनम वेले, मीनू राठोड़, वर्षा सिंह, शुभांगी, सोनल कोर, श्रीव्यास, राजेंद्र मित्तल, सीए पवन अग्रवाल, सीए अमित अग्रवाल, देवकीनंदन मोदी, सुशील पोद्दार, प्रदीप शर्मा, अनिल मित्तल, सुभाष जांगिड आदि का योगदान है।

जीव दया अभियान जारी रहेगा
जेसल पार्क चौपाटी कल्याण समिति के इस जीव दया अभियान को अब ४ महीने पूरे हो चुके हैं और संस्था द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि जब तक लॉकडाउन रहेगा या जब तक आवश्यकता होगी समिति द्वारा जीव दया अभियान जारी रहेगा।
-डॉ. एम.एल.गुप्ता
(अध्यक्ष जैसलपार्क चौपाटी
कल्याण समिति)

बेजुबान पशुओेंं को भोजन
बेजुबान जानवरों को इधर-उधर कचरे में मुंह मारते देखते थे, जिससे मन में यह भावना आई कि इनके खाने-पीने की व्यवस्था करनी चाहिए इसीलिए मैंने अपने ग्रुप में बात की और ग्रुप इन्हें खाना-पीना देने को तैयार हो गया। हम लोग जैसल पार्क चौपाटी कल्याण समिति से जुड़कर दूध, बिस्किट, जवारी आदि आहार के व्यवस्था करते हैं।
– सीए अमित अग्रवाल (फाउंडर मेंबर भाइंदर सीए सोशल ग्रुप)

घायल कुत्तों-बिल्लियों को दवा
मैं दोनों समय बेजुबान पशुओेंं को दूध, बिस्किट, पेडिगरी, चावल, आदि सुबह-शाम देती हूं। घायल कुत्तों व बिल्लियों को दवा लगाती हूं। ज्यादा बीमार को डॉक्टर बुलाकर दिखाती हूं। जगह-जगह खिलाने पर बहुत लोग मना करते हैं जो कि गलत है।
-संतोष जैन

कुत्ते के जबड़े का ऑपरेशन
एक कुत्ते का छोटा बच्चा नवघर पुलिस स्टेशन के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जिसमें उसका जबड़ा टूट गया और बांया पैर प्रैâक्चर हो गया था, हमने उसे अजीज सर के साथ संचालित किया। उसका कुल सर्जिकल कॉस्ट २४,००० रुपए तक चला गया। जबड़े को पूरी तरह से बदल दिया गया है। उसके ठीक होने तक देख -रेख लिए पालक भी रखा गया।
-शुभांगी योगेश लाड

मन को बहुत शांति व संतुष्टि
हमने देखा कि लॉकडाउन में बेजुबान प्राणियों को खाने-पीने की बहुत दिक्कत हो रही थी। तब हमने इनकी मदद करने की ठानी और सब अपने-अपने तरीके से इन प्राणियों की सेवा में जुट गए। इस कार्य से मन को बहुत शांति व संतुष्टि की अनुभूति होती है। हमारे इस कार्य मे समिति के सदस्यों के अलावा पुलिस व मनपा प्रशासन का भी समय-समय पर सहयोग मिलते रहता है।
-नरेंद्र गुप्ता (महासचिव जैसलपार्क चौपाटी कल्याण समिति)

लकवाग्रस्त पिल्ले का उपचार
जैसल पार्क पर ५ जून की रात को एक पिल्ला दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मुझे लोगों ने फोन से इसकी जानकारी दी। मैंने वहां जाकर देखा तो पिल्ला दर्द में था, बेहोश था और उसके मुंह से पानी निकल रहा था। अगले दिन सुबह हम उसे निजी पशु चिकित्सक के पास ले गए और डॉक्टर ने कहा कि उसका बायां हाथ लकवाग्रस्त है। डॉक्टर ने कुछ दवाएं और एंटीबायोटिक दवाएं दीं। ५ दिनों तक लगातार मैं उस पिल्ले को सलाइन के लिए डॉक्टर के पास ले जाती थी। अब डॉक्टरों ने इस पिल्ले को स्पा ठाणे में ऑपरेशन कराने की सलाह दी है। – पूनम वेले