" /> मिस्टर ओवैसी, अब तो रोना बंद करो!

मिस्टर ओवैसी, अब तो रोना बंद करो!

अयोध्या में भव्य-दिव्य राम मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने राम का दर्शन कर साष्टांग दंडवत किया। मोदी ने कहा कि राम जन्मभूमि संकट के चक्रव्यूह से मुक्त हो गई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अयोध्या समारोह का स्वागत किया है। लेकिन विघ्नसंतोषी राजनीतिज्ञों का पेटदर्द नहीं थम रहा। मतलब हमेशा की तरह असदुद्दीन ओवैसी यहां भी आगे हैं। श्री ओवैसी कहते हैं ‘बाबर जिंदा है। जिंदा रहेगा।’ ओवैसी ने जो यह बांग दी है, ये उनकी ‘स्वगत’ है। इस ‘स्वगत’ का देश के मुसलमान बंधुओं ने स्वागत नहीं किया। सर्वोच्च न्यायालय के राम मंदिर के संदर्भ में दिए गए निर्णय को देश के मुसलमानों ने स्वीकार किया है। ओवैसी कहते हैं, ‘बाबर जिंदा है।’ हम पूछते हैं, ‘बाबर कौन है? यह बाबर तुम्हारा क्या लगता है?’ बाबर इस देश में दो बार मरा। पहली बार ४५० साल पहले मरा और दूसरी बार तब मरा जब ६ दिसंबर, १९९२ को अयोध्या में राम भक्तों ने बाबरी ढांचे को उद्ध्वस्त किया। अब तो बाबरी का नामोनिशान मिट चुका है और भूमि पूजन समारोह के कारण अयोध्या का सूतक भी समाप्त हो गया है। बाबर अब हिंदुस्थान ही क्या, पूरी दुनिया में कहीं भी जिंदा नहीं है। जिस उज्बेकिस्तान नामक प्रांत से वह आया, उस देश में वह कितना जिंदा है? इसका भी खयाल ओवैसी जैसे उच्च शिक्षित मुसलमान नेताओं को रखना चाहिए। बाबर हिंदुस्थान में घुसने वाला आक्रांता था। हिंदुस्थान में मुगल साम्राज्य का संस्थापक था। उसने अपना आत्मचरित्र लिखा है। उसने ‘हिंदू’ और ‘हिंदुस्थान’ शब्द का प्रयोग किया है। मुगलों के आक्रमण के बाद हिंदुओं पर कुछ काल तक राज कर लेने से उनका अस्तित्व समाप्त नहीं हो जाता। बाबर ने राम जन्मभूमि का विध्वंस किया और वहां मस्जिद बनाई। इस बात को ओवैसी जैसे नेता स्वीकार क्यों नहीं करते? ओवैसी कानून के अभ्यासक हैं? उन्होंने एक और मुद्दे पर बांग दी है। वह कहते हैं, ‘हिंदुस्थान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है इसलिए राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में उपस्थित रहकर मोदी ने संवैधानिक शपथ तोड़ी है। आज का दिन लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की हार का और हिंदुत्व की विजय का दिन है।’ ओवैसी के ऐसा बोलने में कोई तथ्य नहीं है। वह माहौल में गर्मी लाना चाहते हैं लेकिन अब यह संभव नहीं है। खुद ओवैसी धर्मनिरपेक्ष हैं क्या, इसका उन्हें आत्मपरीक्षण करना चाहिए। ओवैसी ने अयोध्या के भूमि पूजन को हिंदुत्व की विजय कहा है। हम कहते हैं, यह न्याय और सत्य की जीत है। जोकि कानूनी रूप से संविधान के अंतर्गत मिली है। हिंदुस्थान में बहुसंख्यक हिंदुओं की भावनाओं का आदर करना लोकतंत्र है। इस भावना का आदर करके राम मंदिर निर्माण करना धर्मनिरपेक्षता की हार के रूप में ओवैसी कैसे देखते हैं? पाकिस्तान के कुछ नेताओं को भी ऐसा ही लगता है। पाकिस्तान के एक मंत्री हैं शेख अहमद। उनके और हमारे ओवैसी मियां के बोलने की समानता को समझना चाहिए। शेख अहमद अयोध्या में हुए भूमि पूजन के बाद अपना संताप व्यक्त करते हुए कहते हैं, ‘हिंदुस्थान में क्या चल रहा है? हिंदुस्थान अब ‘सेक्युलर’ देश नहीं रहा। अब वह ‘रामनगर’ बन गया है। हिंदुस्थान अब श्रीराम के हिंदुत्व वाले विचारों का देश बन गया है!’ पाकिस्तान को इस मामले में अपनी नाक घुसाने की जरूरत नहीं है। मूलतः पाकिस्तानियों का शासन भी धर्मनिरपेक्ष नहीं, बल्कि ‘इस्लामी रिपब्लिक’ है। पहले वे तो धर्मनिरपेक्ष होने की घोषणा करके संवैधानिक बदलाव करें। पाकिस्तान के हिंदुओं के मंदिरों, गुरुद्वारों और चर्च आदि पर लगातार हमले हो रहे हैं। हिंदुओं से दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। हिंदू लड़कियों को भगाकर उनका जबरन धर्मांतरण करवा दिया जा रहा है। ऐसे में हिंदुस्थान की धर्मनिरपेक्षता पर पाकिस्तानियों को अपना मुंह खोलने की कोई जरूरत नहीं है। ओवैसी कहते हैं, ‘अयोध्या में मोदी द्वारा किया गया मंदिर का भूमि पूजन असंवैधानिक है।’ श्रीमान ओवैसी, आप किस संविधान की बात कर रहे हैं? देश के सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर पर अपना निर्णय सुनाया है। मतलब संविधान का आदर रखते हुए प्रधानमंत्री ने अयोध्या में भूमि पूजन किया है। हिंदुत्व सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष है क्योंकि वह देश के संविधान और न्यायालय का आदर करता है। हिंदू धर्म का अपना अलग ‘शरीयत’ नहीं है या अन्य धर्मों को ‘काफिर’ आदि भी नहीं मानता। राम मंदिर उसी संविधान का राष्ट्रीय प्रतीक है। दिवंगत प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने १९९२ के अप्रैल महीने में धर्मनिरपेक्षता पर अपने विचार रखे थे। उन्होंने कहा था, ‘कोई दल धर्मनिरपेक्ष है। इसे कैसे साबित किया जाए? उसी प्रकार धर्मनिरपेक्ष दल और जो दल धर्मनिरपेक्ष नहीं है, उनके बीच के भेद को कैसे समझा जाए?’ राव ने जो कहा, सही कहा। जामा मस्जिद में इमाम के सामने बैठकर राजनीतिक फायदे-नुकसान की बात करनेवाले धर्मनिरपेक्ष और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण करनेवाले धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं, ऐसा मानना ही धर्मनिरपेक्षता का ढोंग है। यह ढोंग ६ दिसंबर, १९९२ को हमेशा के लिए गाड़ दिया गया। असदुद्दीन ओवैसी कहते हैं, ‘अयोध्या में प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए। मिस्टर प्रधानमंत्री, मैं भी उतना ही भावुक हो गया हूं क्योंकि मैं एकता में विश्वास रखता हूं। मैं भावुक हो गया क्योंकि उस जगह पर ४५० साल से एक मस्जिद खड़ी थी।’ ओवैसी जो कहते हैं, वह ढोंग ही है क्योंकि ५ हजार साल से वहां एक राम मंदिर था। उसे तोप चलाकर गिरा दिया गया और वहां मस्जिद खड़ी कर दी गई। इसलिए भावुक किसे होना चाहिए? जो पाप तोपों से खड़ा किया गया था। उस पाप को शिवसैनिकों ने हथौड़ों से उद्ध्वस्त कर दिया। यह जन-भावनाओं की विजय है! मिस्टर ओवैसी, अब रोना वगैरह बंद करो।