" /> ईडी के बाद सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट की फटकार!… एफआईआर से पहले पीई अनिवार्य नहीं

ईडी के बाद सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट की फटकार!… एफआईआर से पहले पीई अनिवार्य नहीं

♦ खुलासा होने पर सीधे मामला दर्ज करें
♦ भ्रष्टाचार मामले में हो प्रारंभिक जांच

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले को लेकर ईडी को फटकार लगाई थी। अब कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाया है। अदालत ने कहा कि सीबीआई के लिए एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच (पीई) अनिवार्य नहीं है। सीबीआई को प्राप्त जानकारी में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है तो वह पीई करने के बजाय सीधे मामला दर्ज कर सकती है। अदालत ने अपने ६४ पन्नों के पैâसले में स्पष्ट किया कि यदि सीबीआई पीई नहीं रखने का विकल्प चुनती है तो आरोपी इसे अधिकार के रूप में नहीं मांग सकता है।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने १९९२ बैच की आईआरएस अधिकारी विजयलक्ष्मी और उनके पति ऑडिमुलपु सुरेश के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के ११ फरवरी, २०२० के आदेश को रद्द कर दिया।
दरअसल सीबीआई ने २० सितंबर, २०१७ को दर्ज अपनी प्राथमिकी में दावा किया कि दंपति ने १ अप्रैल, २०१० से २९ फरवरी, २०१६ की जांच अवधि के दौरान ४.८४ करोड़ रुपए से अधिक की आय के मुकाबले ५.५५ करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति अर्जित की है। इस मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में प्रारंभिक जांच की संस्था को सीआरपीसी, पीसी अधिनियम या यहां तक की सीबीआई मैनुअल के तहत प्राथमिकी दर्ज करने से पहले अनिवार्य नहीं बनाया गया है। पीठ ने कहा कि यदि किसी अधिकारी पर लगाए गए आरोप झूठे साबित होते हैं तो उसके खिलाफ दायर पंजीकरण करियर के लिए विनाशकारी हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच का दायरा एक संज्ञेय अपराध के कमीशन का खुलासा करता है। प्रारंभिक जांच की आवश्यकता प्रत्येक के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।