" /> लचर कानून का उठाया फायदा, टली फांसी,  राष्ट्रपति के पास दया याचिका लंबित होने के चलते टली फांसी

लचर कानून का उठाया फायदा, टली फांसी,  राष्ट्रपति के पास दया याचिका लंबित होने के चलते टली फांसी

लचर कानून का एक बार फिर निर्भया के दोषियों ने फायदा उठाया, फांसी फिर से टल गई। दिल्ली की पटियाली हाउस कोर्ट ने कल होने वाली फांसी अगले आदेश तक के निरस्त कर दी। फांसी टलवाने के लिए वकीलों ने इस बार नई तरकीब अपनाई। उन्होंने ने मानवाधिकार का हवाला देकर फांसी रूकवाई। तीसरी बार फांसी टल जाने से भारतीय कानून का हिंदुस्तान में ही नहीं, बल्कि समूचे विश्व में मजाक बना है। जनमानस की अंतिम उम्मीद कहे जाने वाली अदालत की हर तरफ फजीहत हुई है। लोगों ने शायद ही इससे पहले कानून का इतना दुरूप्रयोग होते कभी देखा हो।निर्भया के दोषी तीसरी बार फांसी के फंदे तक पहुंचते-पहुंचते बचे हैं। उनके बचने का कारण हमारा लचर और उदार न्याय सिस्टम है। दरिंदों ने जिस बेहरहमी से पैरामेडिकल छात्रा की हत्या और घिनौनी हरकत की थी, उससे देश जनाक्रोश से उबल गया था। पूरा देश विरोध में सड़कों पर उतर आया था। पुलिस ने मामले में सिर्फ उन्नीस दिन के भीतर चार्जशीट कोर्ट में जमा कर दी थी। घटना के एक साल बाद ही निचली अदालत में फांसी मुकर्रर हो गई थी, लेकिन इस बीच सात साल बीत गए, फांसी नहीं हुई। निर्भया के माता-पिता घटना के दिन से लेकर आज तक अदालतों की चैखटों पर न्याय के लिए जजों के समक्ष भीख मांग रहे हैं। पर, हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बता दें, सोमवार को शाम के वक्त जब पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट पर रोक लगाने का आदेश दिया, कोर्ट में मौजूद निर्भया की मां आशा देवी बिलख-बिलख कर रोने लगी। उन्होंने जजों से बस इतना कहा ‘सर अदालतों का मजाक न बनाएं, प्लीज। फांसी को टालते हुए कोर्ट ने कहा कि दोषी पवन की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है इसलिए उसकी फांसी नहीं हो सकती। वहीं, होम मिनिस्ट्री ने बताया है कि राष्ट्रपति के पास भेजने जाने के लिए दोषी पवन की याचिका मिल गई है।