मेरा कोई गॉड फादर नहीं है…! तापसी पन्नू

नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से बॉलीवुड में आई मॉडल-अभिनेत्री तापसी पन्नू की २०१९ में अब तक दो फिल्में रिलीज हो चुकी हैं। ‘अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस’ के मौके पर फिल्म ‘बदला’ और १५ अगस्त के दिन ‘मिशन मंगल’। ये दोनों ही फिल्में सफल रहीं। अब तापसी की तीसरी फिल्म ‘सांड की आंख’ २५ अक्टूबर को रिलीज होगी, जो एक बायोग्रॉफिकल फिल्म है। नई जनरेशन की अभिनेत्रियों में तापसी को लंबी रेस का घोड़ा कहा जाने लगा है। फिल्म ‘सांड की आंख’ के अलावा तापसी के व्यक्तिगत और करियर के बारे में पूजा सामंत से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
बायोग्रॉफिकल फिल्म ‘सांड की आंख’ आपको वैâसे मिली? इस फिल्म को करने की कोई खास वजह?
फिल्म ‘सांड की आंख’ चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर इन दो महिलाओं के जीवन की आपबीती है। अपने देश की ये सबसे उम्रदराज शार्प शूटर्स हैं। आज ये दोनों ही महिलाएं उम्र के ७५ पायदान पार कर चुकी हैं लेकिन जब ये ६०-६२ वर्ष की थीं तब के उनके जीवन की घटनाओं को निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने दर्शाया है। जब महिलाओं का घर की दहलीज पार करना गुनाह समझा जाता था, उस दौर में रिवॉल्वर चलाना किसी ख्वाब से कम नहीं था। ऐसे पिछड़े माहौल में वे दोनों देश की प्रोफेशनल शार्प शूटर्स कैसे बनीं? कहानी और घटनाएं सच हैं ही और बहुत ही प्रेरणादायी भी। मैं हूं चंद्रो और मेरी सिस्टर इन लॉ बनी हैं प्रकाशी दादी, जिनका किरदार भूमि पेडणेकर ने निभाया है। सच्चाई ये है कि जब मुझे पता चला कि ऐसी कोई फिल्म बन रही है तो मैंने खुद मेकर्स से संपर्क किया और सामने से अपने लिए रोल मांगा।
किरदार में वास्तविकता लाने के लिए आपने क्या-क्या तैयारियां कीं?
मैं इस फिल्म के प्रति शुरू से उत्सुक थी और मेरे दिल में दोनों शार्प शूटर्स दादियों के प्रति बेहद आदर भी था। इस फिल्म के लिए मैंने अपने ४ महीने रिजर्व्ड रखे। मेरी उम्र ३० की है और मुझे दिखना ६० का है यानी ये डबल उम्र का रोल है। कितना भी मेकअप कर लो पर जब तक पूरी बॉडी लैंग्वेज नहीं बदलती आसान नहीं होता दोगुने उम्र का दिखना। हमारी स्किन टैन लगे और कुछ झुर्रियां दिखें इसीलिए प्रोस्थेटिक मेकअप भी अनिवार्य था। रिवॉल्वर चलाने की भी प्रैक्टिस की। ये न पूछिए कि क्या-क्या नहीं किया? उम्मीद है कि हमारी मेहनत रंग लाएगी।
भूमि और आपकी ट्यूनिंग कैसी रही?
फिल्म में मेरा और भूमि का रोल पैरलल है बल्कि मैं तो भूमि की शुक्रगुजार हूं जो उन्होंने फिल्म के लिए हां कही।
बात जब कंगना रनोट की निकली तो एक बात बताइए कि आप पर लगातार रंगोली (कंगना की बहन) के आरोप चलते रहते हैं, क्या कहना चाहेंगी आप?
इस मुद्दे पर न ही बोलूं तो अच्छा है। इन बहनों के मुंह कौन लगे? रंगोली को लगता होगा, कहीं तापसी कंगना से आगे, उनसे ज्यादा फेमस न हो इसीलिए ट्विटर पर मेरे खिलाफ ट्वीट करती हैं।
आपके करियर को ५ वर्ष पूरे हो गए। वैâसा रहा आपका ये सफर?
आपको तो पता ही होगा मैं सॉफ्टवेअर इंजीनियर हूं और शौक से की गई मॉडलिंग मुझे धीरे-धीरे यहां तक ले आई। अभिनय की शुरुआत साउथ की फिल्मों से हुई। फिर ‘बेबी’, ‘नाम शबाना’, ‘पिंक’, ‘जुड़वां-२’, ‘मुल्क’ जैसी फिल्मों में मुझे पसंद किया गया और मैं आगे बढ़ती गई।
आपकी सफल फिल्मों का प्रमाण औसतन अधिक है, जिससे आपको लंबी रेस का घोड़ा माना जाने लगा है। कितना फायदा मिल रहा है आपको प्रोफेशनली?
मेरा पारिश्रमिक बढ़ा है। मेरे प्रति मेकर्स को यह विश्वास हो चुका है कि तापसी हर टाइप का किरदार निभाने में सक्षम है। मेरे लिए यही विश्वास मिलियन डॉलर है।
आपकी व्यक्तिगत जिंदगी कितनी चेंज हुई सक्सेस के बाद?
मेरी व्यक्तिगत लाइफ ज्यादा नहीं चेंज हुई। मैं पहले और आज भी लो मेंटेनंस लड़की रही हूं। मेरे माता-पिता ने हम दोनों बहनों को अच्छे संस्कार दिए और जिन मिडल क्लास वैल्यूज में मेरी परवरिश हुई है, वो आज भी मुझमें है। फिल्म ‘मिशन मंगल’ पहली बार दिल्ली में अपने पूरे परिवार को दिखाने ले गई, उसी समय मेरे परिवार के सभी सदस्यों ने कहा, ‘तेरी ‘मिशन मंगल’ तो मंगल है।’ मेरा कोई गॉड फादर नहीं है।
आपकी अगली रिलीज?
‘सांड की आंख’ के बाद मेरी अगली फिल्म आएगी ‘थप्पड़’, जो महिला दिवस पर आएगी। अनुराग कश्यप की साइंस सायकोलॉजिकल थ्रिलर पर काम चल रहा है।
जन्मतारीख – १ अगस्त जन्मस्थान – न्यू दिल्ली
कद- ५ फुट ७ इंच, वजन- ५८ किग्रा
प्रिय परिधान – घर पर हूं तो कप्तान, बाहर जाते समय निर्भर करता है कि मुझे किस इवेंट पर जाना है।
मनपसंद व्यंजन – मेरे घर पर पंजाबी खाना बनता है। छोले-भटूरे और दिल्ली की चाट खाना पसंद है।
पसंदीदा डेजर्ट – अब मैंने डेजर्ट खाना कम किया है फिर भी कुल्फी, मटका कुल्फी, ब्राउनी सब पसंद है।
हॉबी – अब हॉबी के लिए वक्त नहीं मिलता पर जब दिल्ली जाती हूं बीजी (मां) और सिस्टर शगुन के साथ बहुत गप्पे लड़ाती हूं। पहले हॉकी खेलना मेरी हॉबी थी।
प्रिय पर्यटन स्थल – कश्मीर से बेहतर कोई और जगह नहीं है दुनिया में। कश्मीर हमारा स्वर्ग है।