" /> एमबीपाल पद्धति से मुंबई में शुरू हुआ टीबी का उपचार!

एमबीपाल पद्धति से मुंबई में शुरू हुआ टीबी का उपचार!

♦  देशभर के नौ अस्पतालों में होगा इलाज
♦  छह महीने तक ही चलेगी दवा

सामना संवाददाता / मुंबई
टीबी के ऐसे मरीज जिन पर दवाओं का खासा असर नहीं हो रहा है, ऐसे मरीजों पर एमबीपाल पद्धति का ट्रायल किया जा रहा है। इसी क्रम में बीएमसी के गोवंडी स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय शताब्दी अस्पताल में मंगलवार से टीबी के एक मरीज पर परीक्षण शुरू कर दिया गया है। मनपा के स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस पद्धति से उपचार करानेवाला पूरे देश में यह पहला मरीज है। जानकारी के मुताबिक, दवाइयों का सेवन करने के बाद भी उसका सही तरीके से असर न होने की वजह से हर दो मिनट में तीन टीबी ग्रसित मरीजों की मौत हो रही है। नए तरीके के इलाज से टीबी के मरीजों को राहत मिल सकती है।
तीन दवाओं का करना होगा सेवन
बताया गया है कि एक्यूट ड्रग-रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (प्री-एक्सडीआर टीबी) के मरीजों को बेडाक्विलिन, प्रीटोमेनिड, लिनाजोलिड नामक तीनों दवाओं की एक-एक गोलियां दिन में तीन बार दी जाती हैं। हालांकि, इससे पहले की उपचार पद्धति में मरीज को दिन में चार से पांच दवाइयों की १० से १२ गोलियां १८ से २४ महीने तक खानी पड़ती थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई पद्धति से मरीजों को केवल छह महीने तक ही गोलियों के सेवन की जरूरत पड़ेगी।
दो जगहों पर शुरू हुआ इलाज
मनपा और मुंबई जिला क्षय रोग नियंत्रण संस्थान के संयुक्त प्रयासों से यह दवा प्रणाली अब मुंबई में भी शुरू की गई है। ये दवाइयां एमबीपाल ट्रायल नाम से मुहैया कराई जाएंगी। कहा गया है कि भारत में इस दवा पद्धति के मुख्य शोधकर्ता डॉ. विकास ओसवाल की अध्यक्षता में सबसे पहले मुंबई में गोवंडी स्थित पंडित मदनमोहन मालवीय शताब्दी मनपा अस्पताल, घाटकोपर में सर्वोदय अस्पताल सहित देश के नौ अस्पतालों में इलाज शुरू किया जा रहा है।