हर साल ३ लाख शिक्षकों को मिलती है नौकरी, १९ लाख रहते हैं बेरोजगार

विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से प्रतिवर्ष २२ लाख विद्यार्थी शिक्षक बनकर निकलते हैं पर इनमें से तीन लाख शिक्षकों को ही नौकरी मिल पाती है। इसको ध्यान में रखते हुए वैश्विक स्तर पर शिक्षक तैयार करने की दिशा में नेशनल काउंसिल टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) करिकुलम में बदलाव किया जा रहा है।
अब इंट्रीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के तहत ४ साल की बीएड इंट्रीग्रेटेड डिग्री होगी। यह जानकारी एनसीटीआई की चेयर पर्सन डॉ. सतबीर बेदी ने दी है। उल्लेखनीय है कि ऑल इंडिया एसो. ऑफ प्राइवेट   कॉलेज तथा एनसीटीई के संयुक्त तत्वावधान में बच्चों की शिक्षा एवं शैक्षणिक गतिविधियों में सुधार लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन लोनावला के नारायणी सेवा संस्थान में किया गया था।
वैश्विक स्तर के शिक्षक किस तरह से तैयार किए जाय इस पर चर्चा हुई। आज देश में प्रतिवर्ष २२ लाख शिक्षक तैयार हो रहे हैं, जबकि सालाना मात्र ३ लाख शिक्षकों की भर्ती निकलती है। एनसीटीई डेटा मैनेजमेंट पर कार्य कर रही है। इस अवसर पर एनसीटीई के सदस्य सचिव संजय अवस्थी, एसो. के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक व्यास, वाइस चांसलर डॉ. अनिल शुक्ल, शिक्षाविद मोहम्मद, एनकेटी संस्थान के अध्यक्ष नानजी खिमजी ठक्कर, जे. के. जोशी, प्रो. पी. के. मिश्रा, प्रणिती पांडा, निमरत कौर सहित देश भर से आए कई शिक्षाविद और संस्था के संचालकों ने अपने विचार व्यक्त किए।
 बेहतर टीचर बनाने के उद्देश्य से टीचर ट्रेनिंग संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने का काम होगा तब ही ग्लोबल स्तर पर टीचर तैयार होंगे। अब चाइल्ड ऑफ टूडे नहीं टूमारो की बात करनी होगी। देश के ९०० विश्वविद्यालयों में २३० विश्वविद्यालय टीचर एजुकेशन प्रोग्राम चलाते हैं, इनकी गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। ट्रेनर और शिक्षक में अंतर है और हमारी व्यवस्था में ट्रेनर तैयार हो रहे हैं शिक्षक नहीं। क्लास रूम में जीवन जीना सिखाया जाना चाहिए।
आज ९० प्रतिशत जो पढ़ाया जा रहा है वह प्रासंगिक नहीं है। सम्मेलन में देश के कई राज्यों से आए शैक्षणिक संस्था संचालक, शिक्षक उपस्थित थे। सभी अतिथियों का स्वागत डॉ. प्रेमचंद्र तिवारी, प्रकाश मिश्र, संतोष गुप्ता, दिनेश सिंह सिकरवार, रामबाबू शर्मा सहित एसो. के पदाधिकारियों ने किया।