" /> कश्मीर की कड़वी शहादत!, हिंदुस्थान–पाकिस्तान के चारों युद्ध से ज्यादा वादी में सैनिक हुए शहीद, हर ४० घंटे में १ कुर्बानी!

कश्मीर की कड़वी शहादत!, हिंदुस्थान–पाकिस्तान के चारों युद्ध से ज्यादा वादी में सैनिक हुए शहीद, हर ४० घंटे में १ कुर्बानी!

जम्मू-कश्मीर के बारामुल्ला में कल आतंकियों ने ३ सुरक्षाकर्मियों को शहीद कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर बता दिया कि घाटी में लाख दावों के बावजूद आतंकवादियों पर लगाम नहीं लगाई जा सकी है। इस साल सुरक्षाबलों ने काफी आतंकियों को मार गिराया है फिर भी आतंकियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। कश्मीर में आतंक का खेल शुरू हुए ३२ साल हो चुके हैं। इन ३२ सालों में जितने सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं अगर उनके ऊपर गौर किया जाए तो पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर में हर ४० घंटे में १ सुरक्षाकर्मी की कुर्बानी हो रही है।

बता दें कि पिछले ३२ सालों में लगभग ७,००० सेना व अर्धसैनिक बलों के सुरक्षाकर्मी वहां आतंकवादियों के हमले में शहीद हो चुके हैं। इनमें अगर स्थानीय पुलिस की एक हजार की संख्या भी जोड़ दी जाए तो यह संख्या ८,००० से ज्यादा हो जाती है।

जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों की संख्या पर नजर डालें तो एक कड़वा सच का सामना होता है। कश्मीर की यह कड़वी शहादत बताती है कि अभी तक पाकिस्तान के साथ हुए चार युद्धों में जितने हिंदुस्थानी सैनिक शहीद हुए हैं, करीब उतने ही या उससे कुछ ज्यादा कश्मीर वादी में आतंकी हमल में शहीद हुए हैं (देखें बॉक्स)। गौरतलब है कि कल सुबह उत्तरी कश्मीर के जिला बारामुल्ला के करीरी इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों द्वारा लगाए गए संयुक्त नाके पर घात लगाकर हमला किया था। आतंकियों द्वारा नाका पार्टी पर अचानक से की गई गोलीबारी में जम्मू-कश्मीर पुलिस का एसपीओ मुजफ्फर अहमद, सीआरपीएफ के दो जवान लोकेश शर्मा और खुर्शीद खान शहीद हो गए। इस घटना के तुरंत बाद सेना, पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों ने इलाके की घेराबंदी करते हुए सर्च ऑपरेशन चलाया। अधिकारियों ने बताया कि बागों में छुपे आतंकियों ने हमला करने के तुरंत बाद अपने कपड़े बदले और भाग गए। सुरक्षाबलों पर हुए हमले की जिम्मेदारी एक नए गुट पीपुल्स एंटी फासिस्ट प्रâंट ने ली है। आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आज सुबह बारामुल्ला में आतंकियों द्वारा किए गए हमले में जम्मू कश्मीर पुलिस का एक एसपीओ और सीआरपीएफ के दो जवान शहीद हो गए हैं। उन्होंने बताया कि ये आतंकी नाका पार्टी के नजदीक ही छिपे हुए थे। मौका पाकर उन्होंने अचानक से उस पर गोलियां बरसाना शुरू कर दी। इस घटना में तीन सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए।

जम्मू-कश्मीर के बारामुल्ला जिले में करीरी कस्बे में तीन सुरक्षाकर्मियों पर घात लगाकर हमला करनेवाले तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया। इनमें एक टॉप कमांडर भी शामिल है। कश्मीर में यह ऐसा पहला ऑपरेशन था, जिसमें हमला होने के बाद इतनी तेजी के साथ सूचनाएं एकत्र कर आतंकियों को तलाश किया गया और मार दिया गया। इतना जरूर था कि तीनों आतंकियों को ढेर करने में सुरक्षाबलों के उस स्निफर डॉग की अहम भूमिका थी, जिसने आतंकियों द्वारा उतारे गए कपड़ों को सूंघकर उन्हें तलाश किया था।

कल सुबह उत्तरी कश्मीर के जिला बारामुल्ला के करीरी इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों द्वारा लगाए गए संयुक्त नाके पर घात लगाकर हमला किया था। आतंकियों द्वारा अचानक की गई गोलीबारी में जम्मू-कश्मीर पुलिस का एसपीओ शहीद मुजफ्फर अहमद जबकि सीआरपीएफ ११९ बटालियन के दो जवान लोकेश शर्मा और खुर्शीद खान शहीद हो गए, वहीं गोलीबारी करते हुए आतंकी मौके से फरार होने में सफल थे। इस घटना के तुरंत बाद सेना, पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों ने इलाके की घेराबंदी करते हुए सर्च ऑपरेशन चलाया।

अधिकारियों ने बताया कि बागों में छुपे आतंकियों ने हमला करने के तुरंत बाद अपने कपड़े बदले थे और वे थोड़ा दूर भाग गए। तुरंत डॉग स्क्वाड को भी बुलाया गया था और स्निफर डॉग को आतंकियों द्वारा उतारे गए कपड़े मिले तो सुरक्षाबलों को आतंकी भी मिल गए। फिर कुछ घंटों तक चली मुठभेड़ में एक आतंकी कमांडर समेत तीनों आतंकियों को मार गिराया गया। फिलहाल मारे गए आतंकियों की पहचान तो नहीं हो पाई है लेकिन सुरक्षाबलों पर हुए हमले की जिम्मेदारी एक नए गुट पीपुल्स एंटी फासिस्ट प्रâंट ने ली है। आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कल सुबह बारामुल्ला में आतंकियों द्वारा किए गए हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक एसपीओ और सीआरपीएफ के दो जवान शहीद हो गए हैं। उन्होंने बताया कि ये आतंकी नाका पार्टी के नजदीक ही छिपे हुए थे। मौका पाकर उन्होंने अचानक से उस पर गोलियां बरसाना शुरू कर दीं। इससे पहले की सुरक्षाकर्मी संभलते और अपनी पोजीशन लेते आतंकवादी गोलियां बरसाते हुए मौके से फरार हो गए।
दोनों जवान मूल रूप से बिहार के निवासी थे। सीआरपीएफ द्वारा एक ट्वीट में कहा गया है कि हम शहीद जवान खुर्शीद खान और शर्मा लवकुश सुदर्शन की वीरता और दृढ़ता के प्रति समर्पण को सलाम करते हैं।

४ युद्धों में ७,५०० सैनिक शहीद
हिंदुस्थान और पाकिस्तान के बीच अभी तक ४ युद्ध हुए हैं। इन चारों युद्ध में जितने सैनिक शहीद हुए हैं, करीब-करीब उसके बराबर या उससे कुछ ज्यादा ही सुरक्षाकर्मी ३२ सालों में आतंकवाद से लड़ते हुए वादी में शहीद हुए हैं। अशोक कृष्णा की किताब- ‘इंडिया आर्म्ड फोर्स: फिफ्टी इयर ऑफ वार एंड पीस’ के अनुसार १९४७-४८ के युद्ध में हिंदुस्थान के १,५०० जवान और ऑफिसर शहीद हो गए थे तथा ३,५०० घायल हुए और लगभग १,००० सैनिक लापता हो गए। वहीं, १९६५ के युद्ध में हिंदुस्थानी सेना के २,९०२ जवान शहीद हुए।
८,४४४ घायल हुए और ३५९ जवान लापता हो गए थे। इसके बाद १९७१ के युद्ध में भारतीय सेना को अपने बेहतरीन रणनीति के कारण कम नुकसान सहना पड़ा। इस युद्ध में हिंदुस्थान के २,५०० सैनिक शहीद हो गए तो वहीं ३,८४३ घायल हो गए थे। कारगिल युद्ध की बात करें तो सरकारी आकड़ों के मुताबिक हिंदुस्थान ने इस युद्ध में अपने ५२७ जवान खोए थे, जबकि पाकिस्तान की तरफ से ३५७ से ज्यादा की जान गई थी। इस तरह दोनों देशों के बीच चार युद्ध हुए और इन चारों युद्ध में कुल मिलाकर ७,५०० के करीब सैनिक शहीद हुए।