" /> जेल में जलेगा जल्लाद!, ५१ लोगों का किया था कत्ल, सलाखों के पीछे बीतेगी जिंदगी

जेल में जलेगा जल्लाद!, ५१ लोगों का किया था कत्ल, सलाखों के पीछे बीतेगी जिंदगी

गत वर्ष १५ मार्च को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में दो मस्जिदों पर अंधाधुंध गोलीबारी करके पूरी दुनिया को दहलानेवाले ऑस्ट्रेलियाई हमलावर को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषी को कत्ल और कत्ल के प्रयास के कुल ८२ मामलों में सजा सुनाई गई। उसके द्वारा मस्जिदों में घुसकर की गई फायरिंग में ५१ लोग मारे गए थे और ४० अन्य घायल हुए थे। हमलावर ने इस कत्लेआम की फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग की थी लेकिन वह जल्लाद अब धूप और बाहर की हवा के लिए भी तरसेगा, क्योंकि उसे पैरोल भी नहीं मिलेगी। सजा सुनाते वक्त जज ने दोषी से कहा कि इस देश को इंसानियत के लिए जाना जाता है और तुम हमारे देश में सिर्फ कत्लेआम के मकसद से आए थे। न्यायाधीश कैमरन मंडेर ने कहा कि इसे सलाखों की पीछे डाल दो और चाहो तो चाबी कहीं फेंक दो। न्यूजीलैंड के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी आरोपी को बिना पैरोल के उम्रकैद की सजा सुनाई गई। न्यूजीलैंड में मौत की सजा पर रोक है, इसीलिए उसकी आगे की जिंदगी जेल में जलते हुए बीतेगी।
न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में दो मस्जिदों के बाहर की गई गोलीबारी के आरोपी ब्रेंटन टैरंट को कोर्ट ने आजीवन कैद की सजा सुनाई है। १५ मार्च, २०१९ को २९ वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई ब्रेंटन हैरिसन टैरंट ने ५१ लोगों की हत्या कर दी थी।
ब्रेंटन स्वचालित रायफल और मैग्जीन के साथ क्राइस्टचर्च की एक मस्जिद पहुंचा। अंदर घुसा और फायरिंग शुरू कर दी। ४० लोगों की मौत हुई। इसके बाद कुछ दूरी पर दूसरी मस्जिद में फायरिंग की, यहां ११ लोग मारे गए। न्यूजीलैंड के इतिहास में सबसे बड़े आतंकवादी हमले को अंजाम देने वाला ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ब्रेंटन टैरेंट ने कहा कि वो क्राइस्टचर्च की दोनों बड़ी मस्जिदों को तबाह कर देना चाहता था और उसने इसीलिए नमाज के समय को चुना था, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वो निशाना बना सके। टैरेंट ने अपनी सजा की सुनवाई के दौरान ये बात बताई थी
ब्रेंटन ने वर्षों पहले इस आतंकी हमले की योजना बना ली थी। उसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारना था। वर्ष २०१७ में ऑस्ट्रेलिया से न्यूजीलैंड शिफ्ट हुआ था। यहां आकर किराए का मकान लिया, हथियार जुटाए। हमले के महीनों पहले वह क्राइस्टचर्च की यात्रा कर चुका था। उसने न्यूजीलैंड की मस्जिदों के बारे में जानकारी इकट्ठा की। उसने मस्जिदों की लोकेशन और दूसरे विवरणों का अध्ययन किया था और अल नूर मस्जिद के ऊपर ड्रोन भी उड़ा चुका था। अल नूर मस्जिद और लिनवुड इस्लामिक सेंटर के अलावा उसकी योजना अशबर्तोन मस्जिद को भी निशाना बनाने की थी। हमलेवाले दिन ब्रेंटेन पहले अल नूर मस्जिद गया। ब्रेंटन के पास एआर-१५ समेत सेमी ऑटोमेटिक राइफल भी थी। उसने मस्जिद के पास गाड़ी खड़ी की और जुमे की नमाज पढ़ते लोगों पर गोलीबारी की जिनमें मर्द, औरत और बच्चे शामिल थे। इसके बाद वो कार चलाकर पांच किलोमीटर दूर लिनवुड मस्जिद पहुंचा और वहां भी गोलीबारी की। इस हमले में ब्रेंटन ने ५१ लोगों की जान ले ली थी। इनमें ८ भारतीय भी शामिल थे। वहीं इस हमले में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के खिलाड़ी बाल-बाल बच गए थे।
माना जाता है कि ब्रेंटन ने अपनी राइफल में अधिक मारक क्षमता वाले कुछ बदलाव किए थे, ताकि उसमें अधिक से अधिक गोलियां आ सकें। दोषी ब्रेंटन टैरंट ने इस नरसंहार का फेसबुक पर लाइव वीडियो भी जारी किया था, जो वायरल होकर एक अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी देखा गया था। हालांकि पुलिस ने उक्त हमले के २१ मिनट के बाद उसे उस समय गिरफ्तार कर लिया था, जब वो तीसरी मस्जिद को निशाना बनाने जा रहा था। यह हमला इतना भयावह था कि इसने न्यूजीलैंड ही नहीं पूरी दुनिया खासकर मुस्लिम समुदाय को दहला दिया था।
इस जघन्य नरसंहार मामले की सुनवाई के दौरान टैरंट बिना हिले-डुले बैठा रहा और अपने खिलाफ गवाहों के बयानों को सुनता रहा। कुल ९१ लोग इस हमले के गवाह थे और उन्होंने अपने खास लोगों को गंवाने को लेकर कोर्ट में अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ब्रेंटन की वजह से उनकी आंखों के सामने उनके अपनों ने दम तोड़ा था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान क्राउन सॉलिसिटर ने आरोपी के लिए आजीवन कारावास की सजा और इस दौरान उसे पैरोल भी नहीं दी जाने की मांग की। कल क्राइस्टचर्च हाईकोर्ट के जज कैमरून मेंडर ने ब्रेंटन की सजा का ऐलान कर दिया। मेंडर ने कहा- यह जघन्य अपराध है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी व्यक्ति के अंदर इतनी नफरत भी हो सकती है? ब्रेंटन टैरंट को अपने किए पर कोई पछतावा भी नहीं है, इस पर मेंडर ने हैरानी भी जताई। जज ने ब्रेंटन से कहा- तुम हमारे देश में सिर्फ कत्लेआम मचाने आए थे। सुनवाई के बाद न्यायाधीश इस नतीजे पर पहुंचे की आरोपी को बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाएगी। न्यायाधीश मंडेर ने आरोपी को सजा सुनाते हुए कहा, ‘हर एक हत्या के बारे में पीछे जाकर सोचना भी दुखदाई है, हालांकि तुम एक हत्यारे नहीं हो बल्कि एक आतंकवादी हो। तुम्हारे द्वारा किए गए कृत्य अमानवीय हैं। तुमने एक तीन साल के मासूम की भी हत्या की, जो अपने पिता की टांगों से चिपका हुआ था। ‘न्यायाधीश मंडेर ने इस हमले में जान गंवाने वाले लोगों को मौखिक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, अदालत का ध्यान जवाबदेही, निंदा और समुदाय की सुरक्षा के लिए केंद्रित होना चाहिए।’