" /> मोदक पर छाई मंदी!, गणेशोत्सव में सिर्फ २०% की बिक्री

मोदक पर छाई मंदी!, गणेशोत्सव में सिर्फ २०% की बिक्री

कोरोना वायरस ने सभी उद्योग-धंधों की कमर तोड़कर रख दी है। अन्य व्यवसायों की तरह मिठाई विक्रेता भी कोरोना के दंश से बच नहीं सके। धंधा इतना मंदा हो चुका है कि रक्षा बंधन, स्वतंत्रता दिवस और गणेशोत्सव जैसे पर्व-त्योहारों में अच्छी कमाई करनेवाले मिठाई व्यवसायी इस साल मिठाई करीगरों को मजदूरी तक नहीं दे पा रहे। गणेशोत्सव में तो मोदक की सबसे ज्यादा बिक्री होती आई है। पर इस साल पिछले साल की तुलना में एक दुकान से औसतन २० फीसदी मोदक ही बिके। इस तरह मोदक की बिक्री पर भी मंदी छाई हुई है। गौरतलब है कि अगस्त महीने में रक्षाबंधन से त्योहारों की शुरुआत हो जाती है। मगर इस साल मांग ही ठंडी है। खास बात ये है कि कोरोना संकट के बीच लोगों ने खुद के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए मिठाइयों का इस्तेमाल नाममात्र कर दिया है। इससे आम मिठाइयों की बिक्री ७० से ८० फीसदी घट चुकी है। औसतन सामान्य मिठाई विक्रेता का एक दिन का २५ से ३० हजार और बड़े मिठाई विक्रेता का ५० से ६० हजार रुपए के बीच बिक्री होती है। मिठाई व्यवसायी बाबूभाई चौधरी के अनुसार उन्होंने पिछले साल गणेशोत्सव में २५० किलो मोदक बेचे थे। इस साल दाम तो वही ४८० रुपए किलो है पर बमुश्किल वे ५० किलो बेच पाए हैं। बाबूभाई ने बताया कि कोरोना संकट के दौरान जब लॉकडाउन लगा तो अपने कारीगरों को घर बिठाकर खाना खिलाते रहे और जब अनलॉक होना शुरू हुआ तो कारीगरों को अपने परिवारों की चिंता सताने लगी और वो जल्द वापस लौटने का वादा करके या फिर बिना बताए अपने गांव चले गए। सागर स्वीट्स के मालिक नरेश चौधरी ने बताया कि कोरोना संकट के कारण अचानक लगनेवाले लॉकडाउन २३ मार्च के दिन अच्छा खासा स्टॉक था। इस स्टॉक में निर्मित मिठाई और कच्चा मैटीरियल दोनों शामिल थे। वे लंबे समय तक बेकार पड़े रहे। आखिर तीन माह चले लॉकडाउन के बीच मिठाई व्यवसायियों को उसे फेंकना ही पड़ा। अब तो ऐसा लगने लगा है कि कोरोना संकट खत्म होने तक मिठाई विक्रेताओं के कारोबार बिलकुल ठप हो जाएंगे। न ग्राहक हैं, न ही शादी ब्याह हो रहे हैं। अब तो दुकान पर बैठकर ग्राहक के आने का इंतजार करना भी मुश्किल हो रहा है। वसई-विरार स्वीट्स असोसिएशन के अध्यक्ष अर्जुनसिंह राजपुरोहित ने बताया कि छोटे-बड़े सभी मिठाई विक्रेताओं का व्यापार तो बिलकुल चौपट हो गया है। पहले कारीगर चले गए। अब किसी तरह दुकानों को खोला है तो ग्राहक नहीं हैं। लॉकडाउन के वक्त लाखों रुपए का तैयार व कच्चा माल बेकार हो चुका है, जिससे मिठाई दुकानदारों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।